शिक्षा पर शिकंजा

मानव संसाधन मंत्रालय ने राष्ट्रवाद के नाम पर एक नया फरमान जारी किया है। अब आईआईटी, आईआईएम, विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में स्टूडेंट्स को राष्ट्रवाद से जो?ने के लिए रॉक बैंड भेजे जाएंगे। ये बैंड वहां देशभक्ति से लबरेज गाने गुनगुनाएंगे और युवा उस पर रॉक करेंगे। इसके पीछे का मकसद, इन संस्थानों से निकलने वाली युवा फौज में राष्ट्रवाद का इंकलाब पैदा करना है।

सवाल ये है कि क्या शिक्षण संस्थानों में किसी नवराष्ट्रवाद की स्थापना के लिए मशक्कत की जरूरत है या गुणवत्तापूर्ण पठन-पाठन की ओर सोचने व काम करने का समय है? दरअसल, मानव संसाधन मंत्रालय जब स्मृति ईरानी से लेकर प्रकाश जावड़ेकर को सौंपा गया था तो लोगों को उम्मीद जगी थी कि शायद आईआईटी और आईआईएम और विश्वविद्यालयों की स्वायत्तता बढ़ेगी। कैंपस का माहौल बदलेगा और पढ़ाई होगी।

सरकार स्टूडेंट्स की निजता का भी ख्याल रखेगी। क्योंकि जिस तरह से जेएनयू और हैदराबाद सेंट्रल यूनिवर्सिटी में पुलिस ने एबीवीपी की मदद की थी, उससे सरकार की काफी किरकिरी हुई थी। नेतागिरी से भी छात्र ऊब गए थे लेकिन जावड़ेकर के आने के बाद भी कुछ नहीं बदला। इस रॉक बैंड के आदेश से पता चलता है कि सरकार संघ के एजेंडे पर ही काम कर रही है।

मानव संसाधन मंत्रालय ने स्टूडेंट्स को देशभक्ति की फिल्में और गाने दिखाने के लिए एक प्राइवेट फर्म को हायर किया है। यही नहीं, इन संस्थानों में ऊंचे से ऊंचे राष्ट्रीय ध्वजों की स्थापना, दीवारों पर राष्ट्रीय आंदोलनों से जु?े नेताओं और परमवीर चक्र विजेताओं की पेंटिंग्स बनाने की भी मुहिम शुरू की जा चुकी है। इसके अलावा देशभक्ति से जुड़े सेमिनार और गोष्ठियां भी आयोजित की जाएंगी, जिनमें संघ से जुड़े लोगों को बुलाया जाएगा।

संघ परिवार और इसके आनुषंगिक संगठनों को लगता है कि आईआईटी, आईआईएम और विश्वविद्यालयों में पढ़ रहे विद्यार्थी देशभक्ति की संघीय कसौटी पर खरे नहीं हैं। इस सारी कवायद का मकसद इन संस्थानों से वाम विचारधारा को जड़ से बाहर निकालना है। मोदी सरकार की इस राष्ट्रवादी कवायद के पीछे पूरी तरह से संघ की आइडियोलॉजी है, जबकि जरूरत इस बात की है कि मानव संसाधन विकास मंत्रालय देश में ऐसे शैक्षिक संस्थान विकसित करे, जिनका नाम दुनिया के टॉप संस्थानों में हो। यह शर्म की बात है कि जिस देश ने दुनिया को पहला विश्वविद्यालय नालंदा दिया हो, आज उसका एक भी संस्थान दुनिया के टॉप-100 विश्वविद्यालय की लिस्ट में शामिल नहीं है।

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