अपहरणकर्ताओं ने युवक की पत्नी से कहा: पैसा दो नहीं तो जमीन में जिंदा गाड़ देंगे…

योगीराज की सुस्त पुलिस अपहरणकर्ताओं को थाने में बिठाकर करा रहे हैं नाश्ता

बस्ती पुलिस ने नहीं दर्ज किया अपहरण का मुकदमा,साहिबाबाद पुलिस अपहरणकर्ताओं पर मेहरबान

संजय श्रीवास्तव

लखनऊ।

यूपी पुलिस में योगीराज का कहीं से खौफ नहीं है। मानवाधिकार के नियमों का उल्लंघन करना मानों पुलिस ने अपनी फितरत बना रखा हो। ऐसा ही एक मामला जिला बस्ती और साहिबाबाद कोतवाली में देखने को मिला। एक युवक का पैसों के लेन-देन में साहिबाबाद के रहने वाले कुछ दबंगों ने अपहरण कर लिया। एक हफ्ते से कोई सुराग ना मिलने पर युवक के परिजन जिला बस्ती थाने में अपहरण का मुकदमा दर्ज कराने गये लेकिन एसओ ने यह कहकर टाल दिया कि अपहरण का मुकदमा फर्जी है, लेन-देन का मामला दर्ज कराओ। उसने एक एसआई को परिजनों के साथ साहिबाबाद भेज दिया। पुलिस ने जब अपहरणकर्ताओं के नंबर पर धौंस दिया कि उसे हाजिर करो वर्ना अपरहण का मुकदमा दर्ज करने जा रहे हैं। कुछ घंटों में ही दबंगों ने उस युवक को साहिबाबाद कोतवाली में पेश कर दिया।

29 की शाम से युवक साहिबाबाद थाने के हवालात में बंद है। परिजनों ने दारोगा से पूछा कि जब दबंगों ने अपहरण किया था उनके खिलाफ मुकदमा क्यों नहीं दर्ज किया गया? एसओ बात को टाल गये। एसओ का जवाब था कि युवक के खिलाफ फरीदाबाद थाने में मुकदमा दर्ज है। जब अधिवक्ता सवाल ने एसओ से सवाल किया कि फरीदाबाद में मुकदमा दर्ज है तो उसकी कॉपी आपके पास है? एसओ के पास कोई जवाब नहीं था।

 

सवाल है कि यदि पैसों के लेन-देन का मामला है तो आखिर 24 घंटे से अधिक गुजर जाने के बाद भी एसओ ने युवक को किस आधार पर हवालात में रखा? उसका चालान काट कर जेल क्यों नहीं भेजा? मान लेते हैं, यदि पैसों के लेन-देन का मामला है तो युवक के खिलाफ एसओ ने मुकदमा क्यों नहीं दर्ज किया? यदि कोई अपराध नहीं बन रहा तो युवक को रिहा क्यों नहीं किया? सबसे अहम् सवाल यह है कि जिन दबंगों ने डेढ़ करोड़ रुपए देने की बात की,आखिर उनके पास इतनी रकम आयी कहां से? युवक के परिजनों का कहना है कि यदि पुलिस से इंसाफ नहीं मिलेगा तो वे लोग आत्मदाह कर लेंगे।

बस्ती के रहने वाले विवेक मिश्रा पुत्र स्व: जुगल किशोर गाजियाबाद में रहकर रियल एस्टेट में ब्रोकर का काम करते हैं। इनके साथ कई लोग इस काम में शामिल हैं। जमीन के काम में विवेक मिश्रा के साथ काम करने वालों ने हरेन्द्र शर्मा, राजीव, दीपक एवं सुशील गाबा का पैसा लगा रखा था। नोटबंदी के बाद रियल एस्टेट मंदी के दौर से गुजर रहा है जिसकी वजह से सभी का पैसा ब्लॉक हो गया है। इनलोगों ने विवेक मिश्रा पर पैसा तुरंत देने का दबाव बनाया,जिस पर उनका जवाब था कि पैसा अन्य लोगों ने लिया है और मंदी का दौर खत्म होते ही निवेश का लाभ मिल जायेगा। विवेक द्वारा समय मांगने पर चारों ने धमकी देते हुये उसका अपहरण कर

लिया। इस बात की सूचना मिलने पर विवेक के घरवाले जिला बस्ती थाने पहुंचे। वहां पर उनलोगों ने विवेक के अपहरण का मुकदमा दर्ज करने की बात एसओ विनोद कुमार यादव से कही तो उन्होंने मना कर दिया। कहा, पैसों के लेन-देन का ही मुकदमा दर्ज करेंगे। बिना मुकदमा दर्ज किये एसओ ने 28 सितंबर को विवेक की पत्नी के साथ एक दारोगा को साहिबाबाद भेज दिया।साहिबाबाद थाने के एसओ राकेश कुमार सिंह ने हरेन्द्र शर्मा,राजीव,दीपक एवं सुशील गाबा के नंबर पर जब धमकी दी कि विवेक को थाने लाओ वर्ना तुम सबके खिलाफ अपहरण का मुकदमा दर्ज कर देंगे। इस पर बौखलाये अपहरणकर्ताओं ने विवेक को साहिबाबाद थाने ले आये। मजे की बात यह है कि एसओ ने उन चारों को गिरफ्तार करने के बजाये दामाद की तरह थाने में बिठाकर चाय पिलाया।

 

विवेक मिश्रा की पत्नी प्रकाशमणि ने बताया कि 30 सितंबर की सुबह बस्ती से साथ आये एसआई किसी काम से बाहर गये थे,उसके बाद दबंगों ने धमकी दी कि पैसा दो नहीं तो तुम्हें जमीन में जिंंदा गाड़ देंगे। 29 सितंबर से लेकर एक अक्टूबर तक विवेक मिश्रा थाने के हवालात में बंद हैं। उन्होंने बताया कि साहिबाबाद थाने में उनके पति के खिलाफ कोई मुकदमा दर्ज नहीं है। चारो दबंग थाने में खुलकर गुंडई कर रहे हैं। वे जो चाह रहे हैं एसओ राकेश कुमार सिंह वही कर रहे हैं। पहली बात यह है कि पुलिस को मालूम है कि पैसों के लेन-देने में चारो युवकों ने विवेक मिश्रा का अपहरण किया था तो उनलोगों को गिरफ्तार क्यों नहीं किया? क्या वे इलाके के दबंग हैं तो योगी सरकार की पुलिस उनके सामने नतमस्तक है?

 

 

 

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