शरद पूर्णिमा 2017: आज के दिन कृष्णमय हो जाती है सृष्टि

इस बार शरद पूर्णिमा 5 अक्टूबर यानी गुरुवार हो है। शरद पूर्णिमा को लेकर कई कहानियां प्रचलित हैं। शरद पूर्णिमा की प्रमुख कथाएं और मान्यताएं कुछ इस प्रकार हैं। चंद्र देव अपनी 27 पत्नियों- रोहिणी, कृतिका आदि नक्षत्र के साथ अपनी पूरी कलाओं से पूर्ण होकर इस रात सभी लोकों पर शीतलता की वर्षा करते हैं। इस दिन इंद्र और महालक्ष्मी का पूजन करते हुए कोजागर व्रत करने की परंपरा है। मान्यता है कि इस दिन चंद्रमा की किरणों से अमृत बरसता है।

इस रात्रि को अद्भुत कृष्णलीला होती है। भगवान गोपियों की कईजन्मों की तपस्या को पूर्णकरते हैं। गोपियां भगवान की लीला का अंश बनकर धन्य होती हैं। भगवान धीरे-धीरे नाच रहे हैं। गोपियां गा रही हैं। कृष्ण को बना कर लिखे गीतों में कृष्ण के सौत के प्रति प्रेम पर उन्हें नटनागर कहा जा रहा है। नटनागर सबकुछ जान रहे हैं और मुस्करा रहे हैं। बांसुरी के संगीत में अद्भुत मोहक धुन है। गोपियां कृष्ण भक्ति में तल्लीन हैं। योगेश्वर श्रीकृष्ण सभी के साथ अलग-अलग, लेकिन एक ही रूप में हैं। रास पूर्णिमा तभी तो कहते हैं इसे।

भगवान शिव तो इसी रासलीला के मोह में भगवान श्रीकृष्ण का यह वचन भी भूल गए कि जो इस रास में शामिल होगा, उसे स्त्री का ही रूप स्वीकारना होगा। पर रासलीला का उनका मोह समाप्त नहीं हुआ, वरन् कृष्ण को देखने की प्रबल इच्छा में बदल गया। वृन्दावन में गोपेश्वर महादेव के मंदिर में इसीलिए तो शिवजी दिन में शिव रूप में रहते हैं और फिर साज-श्रृंगार के साथ गोपी का रूप धारण करते हैं। यूं इसे कौमुदी महोत्सव भी कहा जाता है। वृन्दावन में इस दिन भव्य उत्सव मनता है।

शरद पूर्णिमा के दिन मानों चंद्रमा की शीतलता मन में भी घर कर जाती है। इस दिन में गजब की ईश्वरीय शांति है। संकटों से घिरा मन प्रसन्नता से भरा-पूरा होता है। इस दिन सात्विक रहें। पूर्ण ब्रह्मचर्य भी जरूरी है।

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