नौकरशाहों ने मंत्री का किया ‘मान ‘ या ‘अपमान ‘

 

संजय श्रीवास्तव
लखनऊ।

उत्तर प्रदेश के कुछ नौकरशाहों में अभी भी पिछली सरकार वाली ‘ ऐंठन’ बाकी है। वे ‘साइकिल’ से नीचे उतरना नहीं चाहते,तभी तो सरकारी ‘कमल’ पूरी तरह से नहीं खिल पा रहा है। ऐसा ही नजारा योगी सरकार के एक मंत्री और उनके अधिनस्थ आईपीएस के बीच देखने को मिला। माननीय ने सभी अफसरों को छह माह के कार्यकाल के बाद समीक्षा बैठक में बुलाया। एक साहेब तो आये नहीं,दूसरे आये भी तो बीच बैठक में ही प्रमुख सचिव का हवाला देकर मुख्यालय भाग गये। अब आप ही बतायें बेचारे मंत्री जी क्या करें। मेरा सवाल यह है कि जब नौकरशाह मंत्री की महत्वपूर्ण बैठक में नहीं आयेंगे तो सरकार जनता के बीच क्या संदेश लेकर जायेगी? सत्ता के गलियारों से लेकर विभाग में चर्चा है कि आखिर कब तक नौकरशाह मंत्री को गुमराह करते रहेंगे? आखिर कब मंत्री जी कब ‘ऐक्शन मोड’ में आयेंगे ताकि आइपीएस ‘राइट टाइम’ हो जायें?


प्रदेश सरकार ने छह माह के काम-काज का ब्यौरा जनता तक पहुंचाने के लिये ताबड़तोड़ प्रेस कान्फ्रेंस कर रही है। मंत्री सरकारी योजनाओं को आवाम तक पहुंचाने एवं विभाग में हो रही अव्यवस्थाओं को दूर करने के लिये कमियों को दूर करने के लिये अफसरों के साथ समीक्षा बैठक कर रहे हैं। इसी कड़ी में 3 अक्टूबर को बापू भवन में होमगार्ड मंत्री अनिल राजभर ने 3 बजे प्रेस कान्फ्रेंस का आयोजन किया था। उसके बाद उनकी विभागीय अफसरों के साथ समीक्षा बैठक थी। होमगार्ड विभाग में पिछले छह माह की उपब्धियों को लेकर 3 अक्टूबर को मंत्री अनिल राजभर ने समीक्षा बैठक रखी थी। बैठक में मुख्यालय पर तैनात सभी सीनियर अफसर के अलावा समस्त डिप्टी कमांडेंट जनरल,मंडलीय कमांडेंट,जिला कमांडेंट को बुलाया गया था।

बैठक के लिये डी जी,होमगार्ड डॉ. सूर्य कुमार ने एक पत्र भी जारी किया था। प्रेस कान्फ्रेंस में होमगार्ड विभाग से डीजी डॉ. सूर्य कुमार एवं जिला कमांडेंट, लखनऊ कृपाशंकर पाण्डेय के अलावा कोई अफसर मौजूद नहीं था। उसके बाद मंत्री अफसरों के साथ समीक्षा बैठक करने चले गये। इस दौरान डी.जी. सूर्य कुमार,डीआईजी,मुख्यालय एस. के. सिंह,स्टॉफ अफसर टू कमांडेंट जनरल रामलाल वर्मा, वित्त नियंत्रक विजय कुमार,एसएसओ सुनील कुमार सहित मंडल के सभी वरिष्ठï अधिकारी मौजूद थें, लेकिन एडीजी जसवीर सिंह नदारद थें।

एडीजी की गैरमौजूदगी पर मंत्री अनिल राजभर सहित डीजी सूर्य कुमार भी चौंक गये। मुख्यालय के अफसरों ने बताया कि एडीजी होमगार्ड मुख्यालय पर थे लेकिन मंत्री स्तर से बुलाये गये
समीक्षा बैठक में आना मुनासिब नहीं समझा। इसे सीधे तौर पर अनुशासनहीनता से जोड़कर देखा जा रहा है। यह बेहद शर्मनाक बात है कि होमगार्ड विभाग के मुख्यमंत्री द्वारा बुलाये जाने वाले बैठक का एडीजी ने एक तरह से बहिष्कार कर दिया। इस दौरान विभाग के डीजी जो अपने व्यस्तम कार्यों को छोड़ मंत्री के साथ प्रेस वार्ता एवं समीक्षा बैठक दोनों में आखिर तक रहें। फिर, एडीजी मंत्री के बैठक में ना आकर आखिर विभाग में क्या संदेश देना चाहते हैं?

नाम न छापने की शर्त पर मुख्यालय के अफसरों ने बताया कि एडीजी किसी काम में व्यस्त नहीं थें बल्कि वे मुख्यालय पर अपने कार्यालय में बैठे थे। एक तरह से उन्होंने मंत्री के आदेश की अवहेलना कर यह जताना चाह रहे हैं कि आइपीएस अपने मन का मालिक होता है। सत्ता के गलियारों में भी इस बैठक की चर्चा रही। मंत्री को अंधेरे में रखकर नियम बनाने की कुछ विचारों पर अफसरों ने ही सिरे से खारिज कर दिया। अफसरों ने बताया कि स्टॉफ अफसर टू डीजी रामलाल वर्मा भी बीच बैठक से यह कहकर उठ गये कि उन्हें प्रमुख सचिव ने बुलाया है,जबकि वे मुख्यालय निकल गये थे।
खैर,हम तो यही कहेंगे कि भईया, आइपीएस तो अपने को खुदा समझते हैं,अब उनकी नजरों में माननीय क्या…

 

 

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