हिमाचल प्रदेश विधानसभा चुनाव: 9 नवंबर को वोटिंग, 18 दिसंबर को आएंगे नतीजे

नई दिल्ली

चुनाव आयोग ने गुरुवार शाम आगामी हिमाचल प्रदेश के विधानसभा चुनाव की तारीखों का ऐलान कर दिया। प्रदेश की सभी 68 सीटों पर मतदान 9 नवंबर को कराए जाएंगे। वहीं, नतीजे 18 दिसंबर को घोषित होंगे। चुनाव आयोग ने प्रेस कांफ्रेंस कर बताया कि इस बार सभी बूथों पर वीवीपैट मशीन का इस्तेमाल होगा। चुनाव आयोग ने बताया कि हिमाचल प्रदेश विधानसभा चुनाव 7521 पोलिंग बुथ पर कराया जाएगा। वहीं, चुनाव आयोग ने साफ किया कि आज गुजरात विधानसभा चुनाव की तारीखों का ऐलान नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश विधानसभा चुनाव के दौरान नामांकन, रैली और जुलूस की वीडियोग्राफी होगी।

इससे पहले चुनाव आयोग ने संकेत दिए थे कि गुजरात चुनाव दिसम्बर में हो सकते हैं। मुख्य चुनाव आयुक्त अचल कुमार ज्योति की मानें तो गुजरात में 50 हजार से अधिक मतदान केंद्रों पर मतदाता मतदान सत्यापन पर्ची वीवीपैट प्रणाली का प्रयोग होगा। इसके अलावा आयोग पहली बार इन चुनावों में महिलाओं के लिए मतदान केंद्र बनाने जा रहा है।

ज्योति ने चुनाव दिसंबर में होने की मीडिया में आई खबरों और कुछ नेताओं के दावे से जुड़े सवाल पर कहा, ‘चुनाव दिसंबर में होंगे क्योंकि वर्तमान गुजरात विधानसभा का कार्यकाल अगले वर्ष जनवरी के तीसरे सप्ताह में खत्म हो रहा है।’ उन्होंने इस बारे में कुछ कहने से मना किया कि चुनाव एक चरण में होगा या एक से अधिक में। उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग गुजरात दौरे के दौरान एकत्रित इनपुट पर विचार करेगा। इस टीम में चुनाव आयुक्त ओपी रावत और सुनील अरोड़ा सहित 12 अन्य वरिष्ठ अधिकारी शामिल थे।

चुनाव आयोग को मिले ये सुझाव

दरअसल चुनाव आयुक्त ने भाजपा, कांग्रेस सहित विविध राष्ट्रीय दलों के प्रतिनिधियों से मुलाकात कर चुनाव सुधार संबंधी सुझाव मांगे हैं। इसमें कहा गया है कि विधानसभा चुनाव 14 दिसंबर से 14 जनवरी के बीच करवाए जाएं क्योंकि उन दिनों कोई हिंदू शादी नहीं होती। चुनाव आयोग को सौंपे गए मेमौरेंडम में कहा गया है कि 14 दिसंबर से 14 जनवरी के बीच के वक्त को हिंदू धर्म की शादी के लिए सही नहीं माना जाता वहीं 10 दिसंबर से 14 दिसंबर के बीच में ज्यादा समारोह होते हैं। ऐसे में 14 दिसंबर से 14 जनवरी के बीच किसी तारीख में चुनाव करवाए जाने चाहिए।

बीजेपी ने कहा है कि यह वक्त वोटरों और सभी राजनीतिक पार्टी के उम्मीदवारों के लिए सबसे सही रहेगा। इस तर्क के समर्थन में कहा गया है कि चुनाव को त्योहार की तरह मनाना चाहिए ताकि ज्यादा से ज्यादा लोग इसमें भागीदारी करें। कहा गया है कि दिसंबर में शादी के सीजन की वजह से एनआरआई भी अपने घर आए हुए होते हैं। वहीं कांग्रेस ने संवेदनशील इलाकों में सीसीटीवी लगाने व वीवीपैट के 10 फीसदी वोट गिनकर ही परिणाम घोषित करने की मांग रखी थी।

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