योगी राज में वाह ताज! नहीं आह ताज!

संजय श्रीवास्तव

शायर मिर्जा गालिब ने कभी कहा था- ‘तुम न आए तो क्या सहर न हुई’, इसे अपने देहाती अंदाज

में कहें तो यूं कहा जाएगा कि- ‘मुर्गा बांग न देगा तो क्या सुबह न होगी’!

यही बात आज ताजमहल को उत्तर प्रदेश की पर्यटन सूची में शामिल न किए जाने पर याद आई। योगीजी सोच रहे होंगे कि अपनी बुकलेट से ताजमहल को हटाकर वे ताजमहल को ही गायब कर सकते हैं, या उसकी हस्ती मिटा सकते हैं तो ये उनकी गलतफहमी ही है। हालांकि अब उनकी पर्यटन मंत्री रीता बहुगुणा सफाई दे रही हैं कि नहीं…नहीं, ताजमहल पर तो पूरा ध्यान दिया जा रहा है और इसका पूरा विकास किया जाएगा।

विश्व के अजूबों में से एक। आगरा स्थित इस धरोहर पर आजकल जंग छिड़ी हुई है। पिछले दिनों बीजेपी विधायक संगीत सोम तो शाहजहां से इस कदर नाराज थे, जैसे उन्हीं की जमीन पर ताजमहल बना हो। यूपी की योगी सरकार इस पर सफाई तो दे रही है। मगर ये सफाई उसे अमेरिकी लोगों के सामने देनी होगी, ये उसने नहीं सोचा होगा। 23 अक्टूबर को यूपी में इंवेस्टमेंट की संभावनाएं तलाश रहीं अमेरिका की 26 कंपनियों का एक डेलिगेशन आया था। ताज का मुद्दा छिड़ गया तो योगी सरकार

के मंत्री सिद्धार्थनाथ सिंह को इन कंपनियों के डेलिगेशन के सामने ताजमहल विवाद पर ध्यान ना देने की बात कहनी पड़ी। उन्होंने कहा कि ताजमहल हमारे लिए गर्व का विषय है और हमारी प्रियॉरिटी में है। यूएस-इंडिया स्ट्रैटजिक पार्टनरशिप फोरम के डेलिगेशन के सामने सिद्धार्थनाथ सिंह ने इस विवाद को कुछ मीडिया हाउसेज का किया-धरा बता दिया। उन्होंने उस किताब का जिक्र भी कर डाला जिसमें ताजमहल को जगह नहीं दी गई थी। बताया कि उस किताब में सिर्फ नए टूरिस्ट स्पॉट्स का जिक्र था,

जिसको गलत तरीके से भ्रम फैलाने के लिए इस्तेमाल किया गया। ताजमहल को गरियाने वालों को बता दें देश को पैसा कमा के देने के मामले में भी ताजमहल सबसे आगे है। ऐसे जितने भी धरोहर हैं यूपी में जहां टिकट लगती है, उनमें से ताजमहल से होने वाली कमाई का हिस्सा 49 प्रतिशत रहता है। वहीं, देश में 21 प्रतिशत कमाई ताज के टिकटों से होती है। भारत आने वाले 23 प्रतिशत फॉरेन टूरिस्ट ताजमहल जरूर जाते हैं।

ये सब बातें खुद केंद्र सरकार के मंत्री महेश शर्मा ने राज्यसभा में अगस्त 2016 में एक सवाल का जवाब देते हुए बताईं थीं। क्या उत्तर प्रदेश सरकार सच में ताजमहल को किनारे कर रही है? गदर काट दिया पब्लिक ने जब मालूम चला कि उत्तरप्रदेश सरकार ने एक टूरिज़म बुकलेट निकाली है जिसमें ताजमहल नहीं है। न कवर पर, न अंदर पन्नों पर। क्या ट्विटर, क्या टीवी क्या अखबार सब जगह यही खबर थी (हनीप्रीत के मिलने से पहले तक)। फिर हनीप्रीत मिल गई। और उत्तर प्रदेश सरकार को भी जब लगा कि नाहक सी बात हाथ से निकल रही है, पूरी बहस पर उसने अपना पक्ष रखा।

जो पूरी बात न जानते हों, उनके लिए पूरा मामला हम दोबारा बता देते हैं। 27 सितंबर, 2017 को था विश्व पर्यटन दिवस। इस दिन उत्तर प्रदेश सरकार ने एक टूरिज़म बुकलेट निकाली, जिसका नाम था ‘उत्तर प्रदेश पर्यटन अपार संभावनाएं।’ जब ये किताब लोगों ने अलटी-पलटी तो उसमें गंगा आरती से लेकर गोरखनाथ मंदिर तक कई सारी घूमने लायक जगहों का जिक्र था लेकिन एक ताजमहल की फोटू तक नहीं थी। इसे लेकर कई लोगों की राय कुछ इस तरह की रही कि ताजमहल को बनाने वाला शाहजहां एक मुस्लिम शासक था, इसीलिए उत्तर प्रदेश सरकार ने उसे अपनी बुकलेट से बाहर रखा। कई लोगों ने योगी आदित्यनाथ के तीन महीने पहले दिए एक बयान का जिक्र भी किया।

दरभंगा में हुई एक रैली में योगी आदित्यनाथ ने विदेशी महमानों को ताजमहल वाला मेमेंटो देने के चलन की ये कहकर आलोचना की थी कि ये भारतीय संस्कृति को नहीं दर्शाता। योगी के पहले बजट में एक सेक्शन था ‘हमारी सांस्कृतिक विरासत।’ इसमें भी ताजमहल का कोई जिक्र नहीं था।

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