वादा तो विकास का था पर योगी के मंत्री विवादित बयान देने में व्यस्त

अजय कुमार 

राजनीति बिना शोहरत के नहीं चलती है और शोहरत बिना नाम और काम के नहीं मिलती है। सियासत के मैदान में वही नेता लम्ब समय तक टिका रहता है जिमसें धैर्य कूट−कूट कर भरा हो। अपमान का कड़वे से कड़वा घूंट पीने की क्षमता हो। यहां जनता की नब्ज को पकड़ कर चलना कामयाबी की कसौटी होती है तो समय की समझ सफलता का मापदंड होता है। इसीलिये राजनीति के मैदान में कूदने वाले तमाम नेता बहुत कुछ हासिल करने के बाद भी राजनैतिक शिखर पर नहीं पहुंच पाते हैं। यह वह नेता होता हैं जो राजनीति को शॉर्टकट से आगे बढ़ाने पर विश्वास रखते हैं और जब यह रास्ता चुनते हैं तो ऐसे नेताओं का विवादों से नाता जुड़ जाता है। बात उत्तर प्रदेश की कि जाये तो यहां तो ऐसे नेताओं की लम्बी चौड़ी फौज है जो अपने काम से अधिक कारनामों से जाने जाते हैं। इनके विवादित बोल, इनको सुर्खियां तो दिलाते हैं, लेकिन बहुत जल्दी ही ऐसे नेतागण राजनैतिक परिदृश्य से गायब भी हो जाते हैं।

सभी सरकारों में ऐसे नेता मिल जाते हैं। न इससे कांग्रेस, समाजवादी और बसपा सरकारें अछूती रहीं और न पार्टी विद डिफरेंस का दम भरने वाली बीजेपी की सरकारें। योगी सरकार को भी इससे दो चार होना पड़ रहा है। मुख्यमंत्री बनने के बाद योगी तो अपनी फायर ब्रांड छवि और विवादित बयानों वाली भाषा से दूरी बनाये हुए हैं, लेकिन अपने मंत्रियों के विवादास्पद बयानों के कारण अक्सर योगी को सफाई देनी पड़ जाती है। योगी अपने मंत्रियों के अलावा कुछ केन्द्रीय मंत्रियों और विधायकों के विवादास्पद बयानों के चलते भी अक्सर असहज हो जाते हैं।
हाल ही में अपना दल सांसद और मोदी सरकार में केन्द्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण राज्य मंत्री अनुप्रिया पटेल ने इलाहाबाद में विवादित बयान दिया था। अनुप्रिया ने कहा था कि कानून व्यवस्था के मुद्दे पर विफल रहने पर इलाहाबाद के डीएम और एसएसपी को उनकी पार्टी के दबाव में हटाया गया था। उन्होंने कहा कि कानून व्यवस्था को लेकर अपना दल सोनेलाल के राष्ट्रीय अध्यक्ष आशीष पटेल ने प्रमुख सचिव गृह से मुलाकात की थी, जिसके बाद ही सरकार ने दोनों अधिकारियों की इलाहाबाद जिले से छुट्टी कर दी।
बात एतिहासिक धराहरों को लेकर छिड़े विवाद की कि जाये तो हिन्दुओं के आस्था के प्रतीक धर्मस्थल अयोध्या, काशी और मथुरा पर दशकों से विवाद चल रहा है। हाल ही में ताजमहल को लेकर एक बार फिर विवाद शुरू हो गया। पूरा विवाद बीजेपी विधायक संगीत सोम के बयान के बाद शुरू हुआ। संगीत सोम ने ताजमहल को भारतीय संस्कृति पर एक धब्बा बताया था। उन्होंने कहा था हम किस इतिहास के बारे में बात कर रहे हैं? ताजमहल के निर्माता (शाहजहां) ने अपने पिता को कैद कर दिया था। वह हिंदुओं को समाप्त करना चाहता था। यदि ये लोग हमारे इतिहास का हिस्सा हैं, तो यह हमारे लिए बहुत दुख की बात है और हम इस इतिहास को बदल देंगे।
संगीत सोम के बयान को लेकर जब विवाद बढ़ा तो बीजेपी ने यह कहते हुए संगीत सोम का बचाव किया कि नेता को अपनी राय देने का हक है। भारतीय इतिहास को विकृत करने का प्रयास लम्बे समय से किया जा रहा है। यह स्मारक भी बर्बरता का प्रतीक है, जहां तक संगीत सोम का संबंध है, उनके पास बोलने की स्वतंत्रता है। यह उनका व्यक्तिगत दृष्टिकोण है और प्रत्येक वक्तव्य पर पार्टी लाइन की आवश्यकता नहीं है। यह विवाद इतना बढ़ा था कि योगी को ताजमहल देखने के बाद इस पर सफाई देनी पड़ गई थी।
बात योगी के विवादित बोल बोलने वाले मंत्रियों की कि जाये तो उनके कई मंत्री अपने विवादित बयानों से यूपी ही नहीं केन्द्र की मोदी सरकार की भी किरकिरी करा रहे हैं। प्रत्येक दूसरे−तीसरे दिन कोई न कोई मंत्री विवादित बयानबाजी करके सुर्खियां बटोर ही लेता है। सबसे ज्यादा विवादास्पद बयान ताजमहल को लेकर दिये जा रहे है। हाल ही में ताजमहल विवाद के बीच योगी सरकार के कैबिनेट रैंक के मंत्री लक्ष्‍मी नारायण चौधरी ने ताजमहल के बारे में विवादित बयान देते हुए कहा था कि उनकी सरकार ने पर्यटन विभाग की बुकलेट से ताजमहल को हटाकर सही किया। बता दें कि विश्व के सात अजूबों में शामिल ताजमहल को पिछले महीने योगी सरकार द्वारा जारी की गई पर्यटन बुकलेट में जगह नहीं दी गई थी। यह बुकलेट पर्यटन मंत्री रीता बहुगुणा द्वारा जारी की गई। उसके बाद से ही इसको लेकर विवाद चल रहा था। ताजमहल को यूपी पर्यटन बुकलेट में शामिल नहीं करने की वजह बताते हुए चौधरी ने कहा कि दरअसल, मौजूदा राज्‍य सरकार ‘राष्‍ट्रवादी है और धर्म नीति’ से चल रही है। चौधरी ने कहा कि ताजमहल कोई धार्मिक प्रतीक नहीं है। यह सात अजूबे के लायक भी नहीं है और जिसने इसे दुनिया के अजूबे की लिस्ट में जगह दी, वो शाहजहां की मानसिकता का ही रहा होगा। मंत्री जी का कहना था कि इस वक्त देश में राष्ट्रवादी सरकारें हैं, जो ताजमहल को पाश्चात्य सभ्यता से प्रभावित मानती हैं। गोरखपुर पीठ को सात अजूबों में शामिल करने की वकालत करते हुए चौधरी ने कहा कि ये लोगों की आस्‍था का प्रतीक है जबकि यूनेस्‍को द्वारा घोषित विरासत स्‍थल ताजमहल किसी धर्म को प्रतिबिंबित नहीं करता।
उत्तर प्रदेश में योगी सरकार में कैबिनेट मंत्री और भारतीय समाज पार्टी के मुखिया ओम प्रकाश राजभर ने अपने समाज के लिए ही आपत्तिजनक बात कह दी। पूर्वी यूपी के मऊ में अतिपिछड़ा, अतिदलित भागीदारी रैली में राजभर ने कहा कि यूपी में बीजेपी एक महीने में जितना खर्च करती है उतने का तो उनकी बिरादरी वाले एक दिन में शराब पी जाते हैं। मंत्री जी का यह बयान सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बना रहा था। राजभर का कहना था, ‘एक बार प्रधानमंत्री जी ने मुझसे पूछा कि बिना पैसों के आप पार्टी कैसे चलाते हैं तो मैंने कहा− माननीय प्रधानमंत्री जी, हम जिस बिरादरी में पैदा हुए हैं, उसके पास रुपया तो नहीं है लेकिन आपकी पार्टी यूपी में जितना एक महीने में खर्च करती होगी, हमारी बिरादरी उतने रुपये का एक दिन में शराब पी जाती है।’ इससे पहले उन्होंने एक रैली में खुद को गब्बर सिंह बताया था। एक मीटिंग के दौरान तो राजभर ने यहां तक कह दिया था कि बच्चे स्कूल नहीं पहुंचेंगे तो उसके बाप को जेल भेज दिया जाएगा। उनका कहना था कि प्राथमिक विद्यालयों के बच्चे पहले होमगार्डस जवान जैसी वर्दी पहनकर विद्यालय जाते थे। अब उन्हें सुन्दर पोशाक दी गयी है। आखिर इस बयान के मायने हैं। ऐसा लगता है कि मुंह खोलने से पहले मंत्री साहब न तौलते हैं न सोचते हैं, लेकिन क्या कीजियेगा मंत्री जो ठहरे ! पहले भी राजभर ने कहा था कि अपने बच्चों को स्कूल ना भेजने वाले अभिभावकों को वे पांच दिन तक थाने में भूखा−प्यासा बैठाएंगे।
योगी सरकार के मंत्री उपेन्द्र तिवारी के विवादित बयान ने भी खूब सुर्खियां बटोरी थीं। उनका कहना था कि नई सरकार में अफसर घोड़े की तरह दौड़ेंगे। उत्तर प्रदेश की महिला एवं बाल विकास मंत्री स्वाति सिंह परिवार संग रामलला और हनुमानगढ़ी के दर्शन के लिए अयोध्या पहुंचीं। दर्शन के दौरान एक पुलिसवाले ने स्वाति सिंह की मां को धक्का देकर भीड़ से बाहर कर दिया। स्वाति की मां ये कहते हुए आगे बढ़ गईं कि हमको धक्का दे दिया। इससे स्वाति नाराज हो गईं और पुलिसकर्मी को डांटने लगीं, जिसके बाद पुलिस अधिकारी उन्हें और उनकी माता को मनाते रहे। बता दें कि कुछ दिनों पहले ही लखनऊ के गोमती नगर इलाके में स्वाति सिंह ने भंडारे का आयोजन किया था। इस भंडारे में प्रसाद के साथ स्वाति 100−100 रुपये के नोट बांटती दिखी थीं। इसकी तसवीर सोशल मीडिया पर वायरल हो गई थी।
उत्तर प्रदेश के कैबिनेट मंत्री राजेंद्र प्रताप उर्फ मोती सिंह अपने गृह जनपद प्रतापगढ़ पहुंच कर अपनों के बीच काफी भावुक हो गये और जनता से आह्वान कर डाला कि जिले के जिन विधायकों ने पंद्रह दिन में विकास का दावा किया था, अगर विकास नहीं होता तो जनता उन तीनों विधायकों के मुँह पर कालिख पोत दे। उन्होंने दावा किया कि क्षेत्र के सांसदों के दर्शन दुर्लभ हो गये हैं। उन्होंने अपना दल सांसद हरीवंश सिंह को निशाना बनाते हुए आरोप लगाया कि उन्होंने जनता के साथ धोखा किया। सांसद ने एक भी विकास कार्य नहीं करवाया। इसी तरह से उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा अयोध्या नगर निगम के गठन को मंजूरी दिये जाने के एक दिन बाद राज्य के कैबिनेट मंत्री श्रीकांत शर्मा ने अयोध्या में रामलला के दर्शन किये। शर्मा ने फैजाबाद जिले के अयोध्या में रामलला के दर्शन के बाद कहा कि रामलला के दर्शन के लिए राम भक्तों को बाबर के अनुयायियों से किसी वीजा की आवश्यकता नहीं है। मंत्री ने कहा, ”लगभग 500 साल पहले आक्रमणकारियों ने हमारी संस्कृति के प्रतीक को ध्वस्त करने का प्रयास किया।”
बस्ती में एक प्रोग्राम में शामिल होने आए योगी के मंत्री स्वामी प्रसाद मौर्य अपने सम्मान से इतना गद्गद हो गये कि उनकी जुबान ही फिसल गई। उन्होंने यहां तक कह दिया, ‘कोई हवस पूरा करने के लिए लगातार पत्नी बदले, बच्चों−पत्नी को भीख मांगने पर मजबूर करे, इसे कोई अच्छा नहीं कहेगा।’ उन्होंने तीन तलाक के मुद्दे में बीजेपी को मुस्लिम महिलाओं के साथ बताया। मौर्य का कहना था कि मुस्लिम पुरुष बेवजह अपनी पत्नियों को तलाक दे रहे हैं जो बिल्कुल सही नहीं ठहराया जा सकता है।
सूबे में लगातार बिगड़ रही कानून व्यवस्था को लेकर योगी सरकार जब सवालों के घेरे आती है तो उनके मंत्रियों के अब बोल बदले−बदले नजर आते हैं। गाजियाबाद दौरे पर आए नगर विकास मंत्री सुरेश खन्ना से जब पत्रकारों ने ग्रेटर नोएडा में हुए गैंगरेप को लेकर सवाल पूछा तो उन्होंने बेहद अजीबोगरीब जवाब दिया। नगर विकास मंत्री ने विवादित बयान देते हुए कहा कि हर जगह पुलिस नहीं लगाई जा सकती। उन्होंने कहा कि कोई भी सरकार क्राइम मुक्त समाज नहीं दे सकती।

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