खाकी का अलग रंग: क्या कहें ‘अधिकारी’ या ’फरिश्ता’

संजय श्री.
लखनऊ। वर्दी से सभी खौफ खाते हैं,स्वाभाविक है। अधिसंख्य लोग खाकी पहनने के बाद दंभ में चूर होकर अत्याचार पर अतारू हो जाते हैं। लेकिन कई ऐसे भी लोग हैं जो अपने दम पर उच्च पद पर पहुंचे और आज भी उनके अंदर इंसानियत है। वे दयालू हैं, अपने अधीनस्थों के सुख-दुख में हमेशा भागीदार रहते हैं,कोई पीडि़त उनके सामने चला जाये तो वे अपनी हैसियत से ज्यादा मदद करते हैं। मुझे गर्व है कि मैं एक ऐसे ही साथी,भाई के साथ जुड़ा हूं जिसके लिये आज मेरे पास कोई शब्द नहीं है। मैं उन्हें क्या कहूं अधिकारी या फरिश्ता…। मैं बात कर रहा हूं मेरठ में तैनात सुधाकराचार्य पाण्डेय की।


होमगार्ड विभाग,मेरठ में तैनात सुधाकराचार्य पाण्डेय ने आज एक बार फिर इंसानियत की मिसाल कायम कर दी है। उन्होंने महिला होमगार्ड 1212 रामा शर्मा जिन्हें कैंसर है। ये जानलेवा बीमारी अंतिम चरण में है। रामा शर्मा की बिटिया की शादी में कमाण्डेंट सुधाकराचार्य ने 21 हजार रुपए की धनराशि भेंट की। उन्होंने बिटिया से वायदा भी किया कि जिंदगी में कभी किसी चीज की जरूरत हो तो इस भाई से जरूर कहना…।

मेरठ में सुधाकराचार्य के इस अंदाज पर लोग तरह-तरह की कसीदें गढ रहे हैं। सभी उनकी भरपूर सराहना कर रहे हैं लेकिन मैं जानता हूं कि ये उनका अपना अंदाज है।
ये उन्होंने पहली बार नहीं किया है। इससे पहले जब वे लखनऊ में जिला कमांडेंट थे तो कई कैंसर से पीडि़त होमगार्डों को आर्थिक मदद की।

विभाग में सराहनीय कार्य करने पर जवानों का हौसलाअफजाई करने के साथ-साथ ईनाम देना,मानों उनकी फितरत सी बन गयी थी। यही वजह है कि आज भी होमगार्ड विभाग उन्हें याद करता है। मैं तो यही कहूंगा कि सुधाकराचार्य भाई आपको मेरा सैल्यूट

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