अब इग्नू के कॉमन सर्विस सेंटर में भर सकेंगे आवेदन फॉर्म

नई दिल्ली।

इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मुक्त विश्वविद्यालय (इग्नू) ने देशभर के दूरदराज और ग्रामीण क्षेत्रों के छात्रों को बड़ी राहत दी है। छात्र अब गांवों में ही खुले कॉमन सर्विस सेंटर में जाकर इग्नू का दाखिला और परीक्षा के आवेदन पत्र भर सकेंगे। साथ ही प्रवेश पत्र भी डाउनलोड कर सकेंगे। इंटरनेट फ्रेंडली न होने के कारण पहले छात्रों को इन कामों के लिए रिजनल सेंटर या साइबर कैफे का चक्कर लगाना पड़ता था। खास बात यह है कि इन सुविधा केंद्रों में छात्रों को इग्नू के ऑनलाइन डिग्री, डिप्लोमा व सर्टिफिकेट प्रोग्राम में पढ़ाई करने भी मौका मिलेगा।

2.5 लाख सुविधा केंद्र खोले 
इग्नू प्रबंधन के मुताबिक, छात्रों को उच्च शिक्षा से जोड़ने के मकसद से सूचना व प्रौद्योगिकी मंत्रालय से सहयोग मांगा गया था। इसी के तहत मंत्रालय ने देशभर के  ग्रामीण इलाकों में करीब दो लाख 50 हजार सुविधा केंद्र खोले हैं। आने वाले वक्त में और सुविधा केंद्र खोले जाएंगे। इन सुविधा केंद्रों में जाकर छात्र मात्र पांच या दस रुपये देकर आवेदन पत्र भर सकेंगे क्योंकि इन केंद्रों में ब्रॉडबैंड की सुविधा भी उपलब्ध कराई गई है। इसके अलावा वे ऑनलाइन आवेदन में बदलाव के साथ विश्वविद्यालय से जुड़े अन्य काम भी निपटा सकते हैं। यहां छात्र दाखिला, परीक्षा या एडमिट कार्ड के अलावा पाठ्यसामग्री भी डाउनलोड कर सकेंगे।

इग्नू में पढ़ने वालों में 44 फीसदी छात्राएं 
इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मुक्त विश्वविद्यालय (इग्नू) ने रविवार को अपना 32वां स्थापना दिवस मनाया। स्थापना दिवस कार्यक्रम मैदानगढ़ी परिसर आयोजित हुआ। इस दौरान विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति प्रो. रविंद्र कुमार बतौर मुख्य अतिथि उपस्थित रहे। कार्यक्रम में इग्नू के कुलपति प्रो. एसबी अरोड़ा ने अध्यक्षीय भाषण दिया। उन्होंने कहा कि इग्नू 13 क्षेत्रीय कार्यालय से अब 56 केंद्र खोल चुका है। आज इग्नू के कुल 2900 शिक्षण केंद्र है। हम शिक्षा को आम लोगों के बीच तक ले जाना चाहते है। उन्होंने बताया कि मुझे खुशी है की आज इग्नू से पढ़ाई करने वालों में 44 फीसदी संख्या छात्राओं की है।

मौजूदा पाठ्यक्रमों में बदलाव होगा
इग्नू के पूर्व कुलपति प्रो. रविंद्र कुमार ने कहा कि इग्नू ने बीते तीन दशकों खुद को एक प्रीमियम शिक्षण संस्थान के रूप में स्थापित किया है। उन्होंने कहा कि अब समय आ गया है कि हम अपने पाठ्यक्रमों में बदलाव करें। डिजिटल प्लेटफॉर्म का समर्थन करते हुए कहा कि उन्होंने नौ बिंदुओं का एक प्रस्ताव रखा जिसे ध्यान में रखकर मौजूदा पाठ्यक्रमों में बदलाव किया जाना चाहिए। इससे हम 21वीं सदी में यहां से पढ़कर निकलने वाले छात्रों को नौकरी के लिए पूरी तरह तैयार कर सकेंगे। स्थापना दिवस कार्यक्रम में भारतीय शिक्षण मण्डल के राष्ट्रीय संगठन मंत्री मुकुल कानिटकर भी मौजूद थे। उन्होंने कहा कि वर्ष 1823 के शिक्षा से जुड़े शोधों की मानें तो तब भारत 100 फीसदी शिक्षित था। उन्होंने कहा कि भारत हमेशा से ही ओपन लर्निंग का पक्षकार रहा है।

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