चलने की स्पीड होती है कम तो समझो दिल हो रहा है कमजोर

नई दिल्ली। 

एक नई स्टडी में यह बात सामने आई है कि दिल की बीमारी का और आपके चलने की गति में संबंध है। स्टोकहोम कारोलिंसका इंस्टीट्यूट ने अलग-अलग उम्र के बुजुर्गों पर इससे जुड़ी शोध की। टीम ने स्वीडिश नेशनल स्टडी ऑन एजिंग एंड केयर कुंग्शोलमेन से जानकारी ली।

शोधकर्ताओं ने 60 साल और उससे ज्यादा उम्र के स्टोकहोम में रहने वाले प्रतिभागियों पर शोध की। इन प्रतिभागियों में से किसी को भी स्टडी की शुरुआत में दिल की बीमारी नहीं थी। यही नहीं जब स्टडी शुरू हुई तो उन्हें चलने में भी दिक्कतें नहीं थी। शोधकर्ताओं ने 2001 से 2004 तक प्रतिभागियों को एनरोल किया। उन्होंन हर 6 साल में (60, 66, और 72) उम्र के प्रतिभागियों से जानकारी ली। इसके साथ ही 78 और इससे ज्यादा उम्र के लोगों से हर तीन साल में जानकारी ली गईं।

शोधकर्ताओं ने प्रतिभागियों के फिजिकल एक्टिविटी लेवल, एल्कोहल लेने की मात्रा, बॉडी मास इंडेक्स और सोचने और निर्णय लेने की क्षमता देखी। इसके साथ ही सी रिएक्टिव प्रोटीन के ब्लड लेवल भी टेस्ट किए गए। शोध में ये बातें सामने आई कि दिल की बीमारी की शिकायत उन लोगों में ज्यादा थी जिनकी चलने की गति कम थी। चलने में दिक्कतें और दिल की बीमारियां 78 साल वाले लोगों में देखीं गईं।

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