मेट्रो में नशे में सफर, गाली- गलौज की तो लगेगा पांच हजार का जुर्माना

मेट्रो ट्रेन में नशे में धुत्त होकर सफर करने, परिचालन में बाधा उत्पन्न करने या गालीगलौज करने पर पांच हजार रुपये तक का जुर्माना भरना पड़ सकता है। सरकार ने मेट्रो रेल (निर्माण, परिचालन एवं रखरखाव)-2017 विधेयक में ऐसे मामलों में भारी जुर्माने और सख्त सजा का प्रस्ताव किया है।

केंद्रीय आवास एवं शहरी मामलों के मंत्रालय ने मेट्रो रेल (निर्माण, परिचालन एवं रखरखाव)-2017 विधेयक के मसौदे को मंजूरी के लिए विधि मंत्रालय को भेजा है। इसके मुताबिक अगर नशे में धुत्त होकर यात्रा करने और गालीगलौज करने वाला मेट्रो कर्मी हुआ, तो जुर्माने की राशि बढ़कर 10 हजार रुपये हो जाएगी। यात्रियों की जिंदगी को खतरें में डालने की स्थिति में 20 हजार रुपये तक के जुर्माने और दो साल कैद का प्रस्ताव किया गया है।

सरकारी सूत्रों ने बताया कि मसौदे को विधि मंत्रालय से हरी झंडी मिलने के बाद अंतिम मंजूरी के लिए कैबिनेट के समक्ष पेश किया जाएगा। विधेयक के मुताबिक मेट्रो ट्रेन और परिसर में प्रदर्शन करने, ट्रेन में खाना खाने, गंदगी फैलाने, सह यात्रियों की जान आफत में डालने पर भी भारी जुर्माना भरना होगा।

विधेयक में नियमित अंतराल पर किराए की समीक्षा के लिए ‘एकीकृत मेट्रो रेल किराया नियामक प्राधिकरण’ बनाने का प्रस्ताव है। यह संबंधित मेट्रो के के अनुरोध पर उस मेट्रो सेवा के किराए की समीक्षा करेगा। साथ ही प्राधिकरण का फैसला संबंधित मेट्रो रेल के लिए बाध्यकारी होगा। प्राधिकरण पूरी तरह से स्वायत्त होगा और अध्यक्ष के अलावा दो सदस्य इसमें होंगे। मौजूदा कानून के तहत केंद्र अस्थायी रूप से किराया निर्धारण समिति का गठन करता है।
विधेयक में नई मेट्रो रेल परियोजनाओं के परिचालन से पहले प्रमाणित करने के तौर तरीके का खाका भी पेश किया गया है। इसके अनुसार केंद्र जरूरतों के मुताबिक नई मेट्रो सेवा शुरू करने से पहले सुरक्षा जांच करने और प्रमाणित करने के लिए कई मेट्रो रेल सुरक्षा आयुक्त नियुक्त कर सकती है। मौजूदा समय में यह जिम्मेदारी नागरिक उड्डयन मंत्रालय के अधीन कार्यरत रेल सुरक्षा आयुक्त की है।

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