आईएएस एसोसिएशन आमसभा: अफसर बोले- हर मर्ज के लिए सिर्फ कॉडर ही जिम्मेदार कैसे

लखनऊ

लखनऊ

यूपी आईएएस एसोसिएशन की वार्षिक आमसभा में काडर की छवि को लेकर उठाए जा रहे सवालों पर चिंता साफ नजर आई। सदस्यों ने इस चुनौती से निपटने के लिए वरिष्ठ अधिकारियों को युवा अधिकारियों का मार्गदर्शन करने और अच्छे अधिकारियों के साथ खड़े होने की जरूरत बताई।
शुक्रवार को एजीएम के बाद एसोसिएशन के सचिव आलोक कुमार ने सवालों के जवाब में बताया कि चर्चा में यह बात सामने आई कि हम अपनी बात लोगों तक नहीं पहुंचा पा रहे हैं। इसके लिए सोशल मीडिया व अन्य प्लेटफॉर्म का उपयोग किया जाए। वहीं, सर्विस की इमेज में सुधार के लिए सलाह दी गई कि अधिकारी पूरी दृढ़ता, ईमानदारी और कर्मठता से काम करें।

बैठक में शामिल एक अन्य अधिकारी के अनुसार, मुख्य सचिव राजीव कुमार ने सदस्यों को सुनने के बाद कहा कि विश्वसनीयता में कमी के साथ नई-नई चुनौतियां बढ़ रही हैं। यह समय प्रवाह के विरुद्ध तैरने की तरह है। मुख्य सचिव ने इन परिस्थितियों में ज्यादा मेहनत, समर्पण और ईमानदारी से काम कर, ज्यादा डिलीवरी देकर अपने को जस्टिफाई करने की जरूरत बताई।

केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर कार्यरत वरिष्ठ आईएएस अधिकारी अनिल स्वरूप ने कहा कि हर जगह की तरह यहां भी कुछ गलत और भ्रष्ट लोग हो सकते हैं। उनके खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए, लेकिन एसोसिएशन को सही लोगों के साथ खड़े होने के लिए एक सिस्टम डवलप करना चाहिए। एक अन्य अधिकारी ने कहा कि राजनीतिज्ञ हों या मीडिया या ज्यूडिशियरी, प्रशासनिक अधिकारियों के खिलाफ सभी आक्रामक हो रहे हैं। हर नाकामी के लिए काडर को कैसे जिम्मेदार ठहराया जा सकता है? क्या आईएएस अफसर ही हर मर्ज की दवा हैं?आमसभा में वरिष्ठ आईएएस अधिकारी देवेंद्र स्वरूप, चंद्र प्रकाश, प्रभात कुमार, अवनीश अवस्थी, आलोक सिन्हा, संजय भूसरेड्डी, आराधना शुक्ला, पार्थसारथी सेन शर्मा, डॉ. हरिओम, जगदीश प्रसाद, अनिल कुमार पाठक ने विचार रखे।

एसोसिएशन ने संसद में विचाराधीन प्रिवेंशन ऑफ करप्शन एक्ट की धारा 13(1)-डी के प्रावधानों पर पुनर्विचार की मांग की। सचिव आलोक कुमार ने बताया कि एक्ट के प्रावधान के अनुसार यदि किसी फैसले से किसी को अनुचित आर्थिक लाभ प्राप्त होता है तो उसके लिए निर्णय प्रक्रिया में शामिल होने की वजह से आईएएस अधिकारी भी जिम्मेदार होंगे। चूंकि लोक कल्याणकारी राज्य के हर फैसले से किसी न किसी को फायदा होता है, लिहाजा यह धारा एक्ट से बाहर होनी चाहिए।

प्रमुख सचिव सूचना अवनीश कुमार अवस्थी ने बताया कि एसोसिएशन के नए सदस्यों को मार्गदर्शन के लिए वरिष्ठ सदस्यों को बतौर ‘मेंटरशिप’ की जिम्मेदारी से जोड़ने का सुझाव आया। इसे वरिष्ठ सदस्यों ने मान लिया है। एक विचार है कि 10 वर्ष वरिष्ठ अधिकारियों को कनिष्ठ के साथ जोड़ा जाए। हालांकि आलोक कुमार ने कहा कि अभी तय नहीं है कि वरिष्ठता 10 वर्ष रखी जाए या 20 वर्ष, या रिटायर्ड अधिकारियों का भी सहयोग लिया जाए। जल्द ही यह तय कर लिया जाएगा।

एसोसिएशन ने 1986 व 1987 बैच के आईएएस अधिकारियों को मुख्य सचिव वेतनमान में पदोन्नति देने की मांग उठाई। अधिकारियों का कहना था कि आईपीएस संवर्ग को दो बैच आगे पदोन्नति मिल रही है।सरकारी सेवा के दौरान किसी निर्णय के विरुद्ध अभियोजन स्वीकृति से जुड़ा संरक्षण रिटायरमेंट के बाद भी दिए जाने, रिटायर्ड आईएएस अधिकारियों को वाहन पास तथा वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों के लिए आवासीय कॉलोनियां आरक्षित करने की भी मांग की गई।

आईएएस एसोसिएशन के अध्यक्ष प्रवीर कुमार ने कहा कि शासन और प्रशासन का काम टीम वर्क से होता है। आईएएस और आईपीएस अफसर हमेशा से मिलकर काम करते आए हैं। दोनों संवर्गों में किसी तरह का टकराव नहीं है। इस संबंध में एजीएम में कोई चर्चा नहीं हुई।

You May Also Like

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *