योगी आदित्यनाथ नोएडा आकर तोड़ेंगे ‘अंधविश्वास’

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सियासी गलियारों में नोएडा यात्रा से जुड़ा एक अंधविश्वास तोड़ने जा रहे हैं। वह 25 दिसम्बर को राजनीतिक रूप से ‘अपशकुन’ समझे जाने वाले नोएडा जाएंगे। वहां प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी नोएडा के बॉटनिकल गार्डन से दक्षिणी दिल्ली के कालकाजी तक जाने वाली मेट्रो रेल सेवा का उद्घाटन करेंगे। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी इस समारोह में शामिल होंगे। सीएम का कहना है कि वह ‘अशुभ’ को ‘शुभ’ करने जाएंगे। यही नहीं सीएम 23 को नोएडा जाकर वहां 25 दिसंबर के कार्यक्रम की तैयारियों की समीक्षा भी करेंगे। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ऐसे दूसरे मुख्यमंत्री हैं जो जानबूझ कर राजनीतिक रूप से ‘मनहूस’ माने जाने वाले नोएडा जाने की हिम्मत कर रहे हैं। इससे पहले पूर्व मुख्यमंत्री मायावती जानते-बूझते 2011 में नोएडा गई थीं और 2012 के चुनावों में उन्हें हार का मुंह देखना पड़ा था।

यह है अंधविश्वास 
सियासी गलियारों में नोएडा को लेकर यह अंधविश्वास है कि अगर प्रदेश का कोई मुख्यमंत्री अपने कार्यकाल के दौरान नोएडा का दौरा करता है तो उसको कुर्सी गंवानी पड़ती है। आधुनिक तकनीक के कायल  तत्कालीन मुख्यमंत्री अखिलेश यादव अपने पूरे कार्यकाल में नोएडा जाने की ‘हिम्मत’ नहीं जुटा पाए। हालांकि इसके बाद भी वह 2017 में सत्ता गंवा बैठे। इतना जरूर रहा कि वह इसे अंधविश्वास नहीं मानते थे और दावा करते थे जब वह 2017 का चुनाव जीतेंगे तो नोएडा जरूर जाएंगे। पर यह नौबत नहीं आई।

पुरानी रही है यह परपाटी
यूपी का मुख्यमंत्री रहते हुए हुए वीर बहादुर सिंह ने नोएडा का दौरा किया था जिसके कुछ दिन बाद जून 1988 को उनकी कुर्सी चली गई थी। 1989 में नारायण दत्त तिवारी और 1999 में कल्याण सिंह की कुर्सी भी नोएडा आने के बाद चली गई थी। 1995 में मुख्यमंत्री रहते हुए मुलायम सिंह यादव ने नोएडा का दौरा किया पर अगली बार वह सत्ता से बाहर हो गए और 1997 में मायावती के नोएडा आने के बाद ही सत्ता ने उनसे दूरी बना ली। वहीं मायावती दोबारा 2011 में नोएडा आईं और 2012 के चुनाव में वह हार गईं।

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