सियासत की लहर में दिखा विवादित बयानों का जोर, सालभर हुई जमकर बे-हयाई

 
राजनीति में उठा-पटक चलती रहती है लेकिन सियासी बयानबाजी और छींटाकशी की होड़ इतनी बुरी है कि राजनेता अक्सर अपने पद और ओहदे की सीमा तक लांघ जाते हैं। इन सबके बीच धर्म-जाति को खींचने से लेकर व्यक्तिगत टिप्पणी तक की गई है। साल के अंत में इन सभी बयानों पर एक नजर डालते हैं जिन्होंने राजनीति के रंग को खूब चोखा किया…

वैसे तो बयानबाजी और तंजबाजी में कोई भी पार्टी पीछे नहीं रही लेकिन इसमें बीजेपी के नेता रेस में आगे निकल गए। सबसे पहले बात करें साक्षी महाराज की जिनके बयानों के बिना सियासत कई बार पूरी नहीं होती। बीजेपी के सबसे विवादित नेता उन्नाव से सांसद साक्षी महाराज एक बार फिर चर्चा में आ गए। मेरठ में एक कार्यक्रम के दौरान मुस्लिम समुदाय को निशाना बनाते हुए बयान दिया कि ‘देश की आबादी हिंदुओं की वजह से नहीं बढ़ रही है, ये कुछ समुदाय के लोगों के कारण बढ़ रही है जो चार पत्नी रखते हैं और 40 बच्चे पैदा करते हैं।’ उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से ठीक पहले साक्षी महाराज ने यह बयान दिया था जिसके बाद खूब विवाद हुआ।वहीं विवादों से चोली दामन का साथ रखने वाले विनय कटियार भी पीछे नही रहे। कटियार ने प्रियंका गांधी पर सीधे टिप्पणी करते हुए कहा कि ‘प्रियंका गांधी से बहुत सी सुंदर महिलाएं हैं जो स्टार प्रचारक हैं।’ उनके इस बयान पर कांग्रेसी खूब बरसे। उन्होंने यह बयान उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव से पहले दिया था। इसके बाद ताजमहल को ‘तेजोमहालय’ बताते हुए भगवान शिव का मंदिर बताया और खूब विवाद हुआ।इसके बाद जनता दल के पूर्व नेता शरद यादव भी ‘बेटी की इज्जत से भी वोट की इज्जत बड़ी है, बेटी की इज्जत जाएगी तो गांव और मोहल्ले की इज्जत जाएगी, लेकिन वोट एक बार बिक गया तो देश की इज्जत और आने वाला सपना पूरा नहीं हो सकता है।’  बोलकर विवादों से घिर गए।

इसके बाद कांग्रेस नेता और शीला दीक्षित के बेटे संदीप दीक्षित आर्मी चीफ बिपिन रावत को ‘सड़क का गुंडा’  बताकर सुर्खियों में आ गए। वहीं बीजेपी के फायरब्रांड नेता संगीत सोम भी विवादों से घिरे रहे। सोम ने दुनिया के सात अजूबों में शामिल ताजमहल को निशाने पर लेते हुए बयान दिया कि ‘ताजमहल को देशद्रोहियों ने बनवाया था। साथ ही ताजमहल को भारतीय संस्कृति पर धब्बा बताते हुए उसे इतिहास में शामिल ना किए जाने की बात कही।’ जिसके बाद सोम ऐसे घिरे की खुद ही किरकिरी करवा बैठे।सोम के बयान को नजरअंदाज करने के बजाय इसपर खूब सियासत हुई। सपा नेता आजम खां इसमें कूद पड़े और बोले की ‘मैं पहले से ही ये राय रखता हूं कि गुलामी की उन तमाम निशानियों को मिटा देना चाहिए जिनसे कल के शासकों की बू आती हो, अकेले ताजमहल ही क्यों संसद भवन, राष्ट्रपति भवन, कुतुब मीनार, लाल किला क्यों नहीं। ये सब गुलामी की निशानी है।’ जिसके बाद तो ताजमहल देश की सियासत में रह रहकर शामिल होता रहा और गहमा गहमी बढ़ाता रहा।गुजरात चुनावों में बयानों की होली खेली गई। इस बार कांग्रेस नेता मणिशंकर अय्यर सबसे आगे थे। मणिशंकर अय्यर ने पीएम मोदी को नीच कह दिया जिसके बाद खूब बवाल हुआ। ‘एक व्यक्ति जोकि लगातार अंबेडकर व नेहरूजी के सपने को पूरा करने के लिए काम कर रहा है। उस परिवार के बारे में गलत बात करना, मुझे लगता है कि ये नीच आदमी है, उसे बात करने की तमीज नहीं है, इस समय में इस तरह की बात करने की क्या जरूरत थी। ‘लेकिन इसके बाद उन्हें पार्टी से बाहर कर दिया गया।गाय की तस्करी को लेकर राजस्‍थान के अलवर में बीजेपी के विधायक ज्ञानदेव अहूजा बोल पड़े की ‘अगर गाय की तस्‍करी करते रहोगे तो यूंही मरोगे।’ पहले भी अहूजा अपने बयानों को लेकर चर्चा में बने रहे हैं। हाल ही में केंद्रीय कौशल विकास राज्यमंत्री अनंत कुमार हेगड़े विवादों से घिर गए। उन्होंने खुद अपनी पार्टी को ही विवादों में डाल दिया। हेगड़े ने कहा कि ‘लोग धर्मनिरपेक्ष शब्द से इसलिए सहमत हैं, क्योंकि यह संविधान में लिखा है। ये संविधान बहुत पहले बदल दिया जाना चाहिए था और अब हम इसे बदलने जा रहे हैं।’ उन्होंने कहा ‘जो लोग खुद को धर्मनिरपेक्ष कहते हैं, वो बिना माता-पिता से जन्म की तरह हैं। अगर कोई कहता है कि मैं मुस्लिम, ईसाई, लिंगायत, ब्रह्मण या हिंदू हूं, तो मुझे खुशी महसूस होती है, क्योंकि वे अपनी जड़ों को जानते हैं। जो खुद को धर्मनिरपेक्ष कहते हैं, मैं नहीं जानता उन्हें क्या कहा जाए।’   हेगड़े के इस बयान पर खूब सियासत हुई जो अभी भी जारी है।

 

 

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