भाजपा ने नाराज नेताओं को मनाने के लिए तैयार किया प्लान

लखनऊ
भाजपा संगठन के मौजूदा पदाधिकारियों में कुछ को नई जिम्मेदारी सौंपी जा सकती है। इसकी कवायद शुरू हो गई है। कुछ पदाधिकारी खुद संगठन के बजाय अब सत्ता का हिस्सा बनना चाहते हैं। रणनीतिकार कुछ को लोकसभा चुनाव के मद्देनजर नया दायित्व सौंपकर भावी चुनौतियों से निपटने की तैयारी कर लेना चाहते हैं।साथ ही समीकरणों को भी समय से दुरुस्त करना चाहते हैं। क्षेत्रों और जिलों के संगठन के लोगों को विभिन्न संस्थाओं में समायोजित कर उन्हें सत्ता का स्वाद चखाया जाएगा। भाजपा के प्रमुख नेताओं का संघ पदाधिकारियों के साथ दो बार विचार-विमर्श भी हो चुका है।भाजपा के रणनीतिकारों ने निकाय चुनाव के नतीजों से निकले संदेशों से सबक लेते हुए कार्यकर्ताओं की नाराजगी दूर करने की सोची है। पिछले दिनों निकाय चुनाव की समीक्षा बैठकों में क्षेत्रीय, जिला और महानगर के कार्यकर्ताओं का समायोजन न होने का मुद्दा उठा था।

कहा गया था कि कई जगह अपेक्षा के अनुरूप नतीजे न आने के पीछे स्थानीय स्तर पर कार्यकर्ताओं में उत्साह की कमी एक वजह है। कुछ जगह कार्यकर्ता उदासीन बने रहे तो कहीं तटस्थ भाव अपना लिया। इस कारण, छोटे नगरों में अपेक्षा के अनुरूप नतीजे नहीं आए। रणनीतिकारों को एहसास हो गया है कि इस स्थिति को ठीक न किया गया तो लोकसभा चुनाव में मुश्किलें बढ़ सकती हैं।

भले ही भाजपा नेतृत्व यह दावा कर रहा हो कि निकाय चुनाव में जीत उसकी बड़ी उपलब्धि है। लगातार तीसरा चुनाव जीतकर भाजपा ने यह साबित कर दिया कि जनता का समर्थन उसके साथ बना हुआ है। पर, पार्टी सूत्र बताते हैं कि छोटे शहरों के नतीजों ने रणनीतिकारों को चिंता में डाल दिया है। वे समझ गए हैं कि यह रुझान पार्टी के लिए बहुत सुखद नहीं है। भले ही नगर पालिका परिषद में 70 और नगर पंचायतों में 100 स्थानों पर भाजपा के अध्यक्ष जीत गए हों लेकिन इन नतीजों की तुलना अगर नौ महीने पहले विधानसभा चुनाव से करें तो निष्कर्ष चिंतित करने वाले ही हैं।

पार्टी के 14 उपाध्यक्षों में 5 पहले ही केंद्र और प्रदेश सरकार में मंत्री बन चुके हैं। मगर, इनके अलावा अब जिन लोगों को समायोजित कर नई जिम्मेदारी सौंपी जा सकती है, उनमें प्रदेश उपाध्यक्ष रामनरेश रावत, बाबूराम निषाद, जेपीएस राठौर और अश्विनी त्यागी के नाम प्रमुख रूप से चर्चा में हैं। इसके अलावा महामंत्रियों में अशोक कटारिया व  विजय बहादुर पाठक को भी नई जिम्मेदारी दी जा सकती है।
उच्च पदस्थ लोगों का तो यह भी कहना है कि महामंत्रियों में दो लोगों तथा उपाध्यक्ष में एक को विधान परिषद का सदस्य बनाकर योगी मंत्रिमंडल में भी भेजा सकता है। पार्टी के प्रदेश मंत्रियों में कौशलेन्द्र सिंह पटेल, गोविंद नारायण शुक्ल, महेश श्रीवास्तव और धर्मवीर प्रजापति को समायोजित किया जा सकता है। मीडिया विभाग संभालने वालों में दो लोगों को सरकारी पदों पर समायोजित करने के संकेत हैं। पश्चिम के क्षेत्रीय अध्यक्ष भूपेन्द्र चौधरी और अवध के क्षेत्रीय अध्यक्ष मुकुट बिहारी वर्मा पहले ही मंत्रिमंडल का हिस्सा हैं लेकिन बताया जाता है कि काशी के क्षेत्रीय अध्यक्ष लक्ष्मण आचार्य को भी नया दायित्व सौंपा जा सकता है।

जिलों और क्षेत्रों के साथ संबंधित संगठनों की तरफ से भी कई चेहरों को सरकारी पदों पर समायोजित किया जा सकता है। इसके लिए न सिर्फ संगठन के स्तर पर कवायद चल रही है बल्कि क्षेत्रों और जिलों के कार्यकर्ता खुद दौड़भाग में जुटे हैं। बताया जाता है कि कुछ लोग पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के जरिये अपना बायोडॉटा क्षेत्र से लेकर प्रदेश नेतृत्व तक पहुंचा चुके हैं। साथ ही संघ के वरिष्ठ पदाधिकारियों के यहां भी हाजिरी लगा रहे हैं। दूसरे दलों से भाजपा में आए नेता भी समायोजन के समीकरणों में अपने लोगों को फिट करके अपनी आगे की सियासी राह दुरुस्त करने में जुटे हैं। हालांकि, रणनीतिकारों की तरफ से भी कार्यकर्ताओं को फोन कर उनका ब्योरा मांगा जा रहा है लेकिन ज्यादातर नेता और कार्यकर्ता खुद ही अपना समायोजन कराने की दौड़भाग में लगे हैं। माना जा रहा है कि मकर संक्रांति के बाद पार्टी समायोजन पर कार्रवाई शुरू कर देगी।

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