डीजी साहेब, यदि योग्यता का पैमाना ‘मूंछें’ हैं तो यूपी के सीएम…

डीजी, होमगार्ड अब ‘मूंछों’ से नापेंगे योग्यता का पैमाना: जिन अफसरों की मूंछें नहीं है,उन्हें क्या मानें?

सूबे में डीजी के इस फरमान से बिना ‘मूंछ’ वाले अफसरान हो रहें शर्मशार

क्या सकारात्मक प्रभाव डालने के लिये मुंछ का होना जरूरी है?

बिना मुंछ वाले अफसरों का सवाल : शायद इसीलिये डीजी मूछ वाले अफसरों की घटिया करतूत पचा जाते हैं

संजय श्रीवा.
लखनऊ।

उत्तर प्रदेश विकास की राह पर कम, विवादों की राह पर तेज रफ्तार से चल पड़ी है। सरकार की अच्छी योजनाओं के बारे में चर्चा करने के बजाये ‘अफसर’ और ‘मंत्री’ अपने बेतुका फरमान की वजह से सरकारी योजनाओं को तहस-नहस कर रहे हैं। डीजी,होमगार्ड डॉ. सूर्य कुमार शुक्ला ‘डीजीपी’ की रेस में थें लेकिन उनका सपना ‘अधूरा ख्वाब’ बनकर रह गया। रिटायरमेंट भी करीब है। आये दिन पत्र जारी करने में माहिर श्री शुक्ला ने कल ऐसा पत्र जारी कर दिया जिसने विभाग के साथ-साथ सरकार पर भी एक सवालिया निशान लगा दिया है। होमगार्ड विभाग के अफसर,कर्मचारी के अलावा प्रदेश के माननीय से लेकर सभी ऐसे लोग शर्मशार महसूस करेंगे जिनकी ‘मूंछ’ नही है।

जी हां,डीजी ने सूबे के सभी डिप्टी कमांडेंट जनरल,मंडलीय कमांडेंट एवं जिला कमांडेंट्स को 8 जनवरी को एक पत्र जारी किया है। पत्र में साफ तौर पर लिखा है कि होमगार्ड विभाग के अधिकारियों,कर्मचारियों एवं अवैतनिक अधिकारियों, होमगाड्र्स स्वयं सेवकों को ‘अच्छी ‘मूंछों’ पर पुरस्कार दिया जायेगा। इस पत्र में विभाग में भूचाल ला दिया है। जिनकी ‘मूंछे’ हैं वे गौरवान्वित महसूस कर रहे हैं और जिनकी नहीं है,वे शर्मशार हैं।डीजी साहेब, मेरा आपसे एक सवाल है- क्या ‘मूंछों’ से अफसरों की योग्यता का पैमाना नाप रहे हैं? क्या ‘बिना मूंछ’ वाले अफसर या कर्मचारी नकारा हैं ? आपके ज्ञानवर्धन के लिये बताना चाहेंगे कि यूपी को चलाने वाले ईमानदार,कर्मठ सीएम योगी आदित्यनाथ, देश का गौरव बढ़ाने वाले गृहमंत्री  राजनाथ सिंह सहित कई ऐसे माननीय हैं जो ‘बिना मूंछ’ वाले हैं, इन्हें आप क्या मानेंगे…

8 जनवरी को जारी पत्र में डीजी, होमगार्ड ने लिखा है कि होमगार्ड अधिकारियों,कर्मचारियों एवं स्वयं सेवकों को फील्ड में कई ऐसी ड्यूटियां करनी पड़ती है जिसमें उनके अच्छे,प्रभावशाली एवं रोबिले व्यक्तित्व के कारण अपने काम को करने में सहूलियत होती है तथा जनता पर सकारात्मक प्रभाव पड़ता है। विशेष रूप से शांति व्यवस्था एवं ट्रैफिक आदि ड्यूटी में व्यवस्थापित जवानों को इससे विशेष सहायता मिलती है। अधिकारियों एवं जवानों को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से चिन्हित किये गये अवैतनिक अधिकारियों,जवानों एवं कर्मचारी 20 जनवरी तक प्रार्थना पत्र आमंत्रित किये जा रहे हैं जिनकी ‘मूंछे’ अपने काम के अनुरूप आकर्षक हो और उनके व्यक्तित्व एवं काम में सहायक होती हो। ऐसे अधिकारियों एवं कर्मचारियों ,जवानों के नाम ,पद ,नियुक्ति के स्थान एवं फोटोग्राफ प्रमाणित करके मुख्यालय भेजे जायें जिससे उनको पुरस्कृत किये जाने पर विचार किया जाये।

पत्र ने विभाग में इस बार भ्रष्टचार के बजाये मूंछों की चर्चा जबरदस्त तरीके से की जा रही है। ‘मूंछ’  वाले ‘बिना मूंछ’  वाले अफसरों पर निशाना साध रहे हैं। यूपी में मौजूदा समय मंडलीय कमांडेंट,जिला कमांडेंट से लेकर इंस्पेक्टर की तादात सैंकड़ों में है। हाल ही में होमगार्ड मंत्री अनिल राजभर ने मुख्यालय पर आयोजित एक कार्यक्र म में होमगार्ड तपन मंडल को राष्टपति से स्वीकृत वर्ष 2016के गैलेंट्री अवार्ड से सम्मानित किया था। कायदे से मंत्री जी को उस जवान का सम्मान करने के बजाये तिरस्कार कर देना चाहिए…। क्योंकि तपन मंडल का ‘मूंछ’ नहीं है।

विभाग में पहले से ही इलाहाबाद के डीआईजी एस सी उपाध्याय, बस्ती के मंडलीय कमांडेंट ए के त्रिपाठी, गोरखपुर के मंडलीय कमांडेंट अजय कुमार पाण्डेय, कन्नौज के कमांडेंट चंदन सिंह, अमरोहा के कमांडेंट मनीष दूबे, मंडलीय कमांडेंट, लखनऊ विवेक सिंह, मंडलीय कमांडेंट,कानपुर सुरेन्द्र कुमार बिना मूंछ वाले अधिकारी हैं। इसी तरह जितने भी नये कमांडेंट बने हैं उनमें से अधिसंख्य ‘बिना मूंछ’ वाले हैं। इसका क्या मतलब, क्या ये अधिकारी अपना अपने काम की जिम्मेदारी ईमानदारी से नहीं निभा पा रहे हैं? क्या इनकी छवि जनता के बीच अच्छी नही है? क्या सभी को नकारा अधिकारी मानते हैं?

छोडिय़े, ये लम्बी बहस है। लेकिन, डीजी साहेब आपके पत्र ने विभाग के योग्य अफसरों की कार्यशैली पर सवाल उठा दिया है। ‘बिन मूंछ’ वाले अफसरों में आक्रोश की ज्वाला भडक़ाने का काम आपके पत्र ने किया है। भले ही अफसर और कर्मचारी खुली जुबां से आपके सामने कुछ ना कहें लेकिन नाम न छापने की शर्त पर सूबे के कई अधिकारियों ने सवाल किया जो जायज लगता है। सवाल है कि डीजी साहेब मूंछ वाले अफसरों पर फि़दा हैं तभी तो इस विभाग में उनके आने के बाद से हुए तबादले, कर्मचारी उत्पीडऩ पर उन्होंने कोई कार्रवाई नहीं की।

हम तो यही कहेंगे कि साहेब,मंूछों से अधिकारी या कर्मचारी की योग्यता,ईमानदारी या फिर यूं कहें चरित्र नहीं आंका जाता। क्योंकि जरूरी नहीं कि मूंछ रखने वाले पाक-साफ होते हैं,वे भी कुकर्मी,भ्रष्टï और कामचोर हो सकते हैं,जिनकी संख्या आपके इर्द-गिर्द ज्यादा है। डीजी साहेब,पत्र जारी करने से पहले ये तो देख लिया करिए कि आग की चिंगारी कहां तक जा सकती है। बिना मूंछ वालों में डीजीपी ओम प्रकाश सिंह सहित मुख्यमंत्री योगीजी, गृहमंत्री राजनाथ सिंह सहित सैंकड़ों माननीय हैं जिन्होंने देश का नाम रौशन कर रखा है।

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

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शर्मनाक करतूत: होमगार्ड इंस्पेक्टर और मेजर ने मिलकर 97 मृतक आश्रितों का ढाई लाख रुपए लूट लिया

– जिला कमांडेंट,लखनऊ भी इस खेल में हैं शामिल

-मुख्यमंत्री एवं डीजी को लिखे गये शिकायती पत्र में हुआ खुलासा

-डीजी सूर्य शुक्ला ने इस प्रकरण की जिम्मेदारी सौंपी सीटीआई कमांडेंट संजीव शुक्ला को

-बयान के लिये सभी मृतक आश्रितों को बुलाया गया
31 दिसंबर
संजय श्रीवा.
लखनऊ। हराम की कमाई का चस्का ही कुछ ऐसा होता है कि जब एक बार किसी के मुंह लग जाये तो छूटता नहीं। होमगार्ड विभाग में कई अधिकारी और कर्मचारी ऐसे हैं जिन्हें तनख्वाह के अलावा ऊपरी कमाई ना हो तो उन्हें चैन नहीं मिलता। इस बार मंडलीय प्रशिक्षण केन्द्र में 42 दिवसीय बेसिक प्रशिक्षण शिविर के लिये आये 97 जवानों को शिकार बनाया गया। सभी जवान मृतक आश्रित कोटे के हैं जो आर्थिक दिक्कतों के दौर में हैं लेकिन केन्द्रीय प्रशिक्षण संस्थान,लखनऊ में तैनात इंस्पेक्टर एवं मेजर ने सभी से प्रशिक्षण में नर्मी बरतने एवं कम परेड कराने के नाम पर 1000 रुपए ,वर्दी के नाम पर 1600 रुपए एवं शस्त्र पूजन के नाम पर सभी से 75 रुपए की वसूली की गयी। इंस्पेक्टर और मेजर की धूर्तता देखिए, जवानों को घटिया स्तर की वर्दी देनी थी दसलिये नाप लेने वाले टेलर को दिन के बजाये रात में ट्रेनिंग सेंटर में बुलाते थें ताकि किसी को भनक ना लगे और काम हो जाये। कुल मिलाकर ट्रेनिंग,वर्दी एवं शस्त्र पूजन के नाम पर दोनों ने 2 लाख 59 हजार 475 रुपए की वसूली की है। इस बात का खुलासा मुख्यमंत्री एवं डीजी,होमगार्ड को लिखे गये पत्र में किया गया है। डीजी,होमगार्ड डॉ. सूर्य कुमार शुक्ला ने इस मामले में जांच की जिम्मेदारी मुख्यालय स्थित सीटीआई,कमांडेंट संजीव शुक्ला को सौंप दी है। खास बात यह है कि जांच की प्रक्रिया शुरू होते ही कमांडेंट स्तर पर जवानों पर अपने बयान से मुकरने का खेल शुरू हो गया है ताकि इस मामले में शामिल सभी लोग एक बार फिर बाहर निकल सकें।
उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में होमगार्ड मुख्यालय पर तैैनात अधिकारी,भ्रष्टïाचार की गाथा लिखने में जुटे हैं। प्रशासनिक लचरता को देख निचले स्तर के अधिकारी और कर्मचारी भी बेखौफ होकर वसूली का तांड़व मना रहे हैं। सभी को मालूम है कि जब जांच होगी तो देख लिया जायेगा,क्योंकि उसी समय बोली लगती है और तथाकथित अफसरों को खरीदने में कर्मचारी कामयाब हो जाते हैं।
एक गोपनीय पत्र में लिखी बातें आपलोगों को सुनाता हूं,आप खुद ही तय करें कि क्या ऐसा होना चाहिए? क्या ऐसे भ्रष्टï लोगों को बख्शना चाहिए या फिर ऐसे भ्रष्टï लोगों को संरक्षण देने वाले अफसरानों के खिलाफ कार्रवाई करने से बचने वाले मंत्री को कुछ करना चाहिए या नहीं? आप ही तय करें…
(डीटीसी) केन्द्रीय प्रशिक्षण संस्थान,होमगार्ड (लखनऊ) में 1 नवंबर से 12 दिसंबर 2117 तक मृतक आश्रित कोटे से चयन किये गये जवानों का प्रशिक्षण चल रहा था। सीएम,डीजी,होमगार्ड को लिखे गये पत्र में जवानों ने (सीटीआई) केन्द्रीय प्रशिक्षण केन्द्र में तैनात इंस्पेक्टर दीपक श्रीवास्तव एवं मेजर (हवलदार प्रशिक्षक) नीरज पाण्डेय पर गंभीर आरोप लगाया है। जवानों ने लिखा है कि 42 दिवसीय प्रशिक्षण के दौरान अधिकारी एवं कर्मचारियों द्वारा उनलोगों के साथ अमानवीय व्यवहार एवं भ्रष्टïाचार किया गया। हमलोग यहां पर प्रदेश के अलग-अलग जिलों से प्रशिक्षण के लिये आये हैं लेकिन जो बर्ताव हमलोगों के साथ किया गया है,बाध्य होकर इस पत्र को लिखना पड़ रहा है। सभी के सिर से पिता का साया उठ गया है,किसी को अपनी बहन की शादी करानी है तो कई अत्यंत गरीब परिवार से है।
जवानों का आरोप है कि सीटीआई,कृष्णानगर में तैनात इंस्पेक्टर (प्रशिक्षण प्रभारी) दीपक श्रीवास्तव के आदेश पर प्रशिक्षण में नर्मी बरतने के नाम पर एवं कम परेड कराने के नाम पर शिविर मेजर ,हवलदार प्रशिक्षक नीरज पाण्डेय द्वारा प्रत्येक टोली कमंाडरों को यह आदेश दिया गया कि तुम लोग सभी टोली से प्रति जवान 2000 रुपए मेरे पास जमा करवाओ,नहीं तो परेड में सख्ती कराकर तुम लोगों को मार डालेंगे। फेल करके घर भेज देंगे,फिर दुबारा अपने पैसे से ट्रेनिंग करना। परेड में फेल होने के डर से प्रत्येक जवान द्वारा 1000 रुपए के हिसाब से 97000 रुपए वसूले गये। पैसा मिलने के बाद कहा गया कि तुम लोगों से परेड कम करायी जायेगी।
इसी तरह,वर्दी के नाम पर प्रति जवान 1600 रुपए लिये गये। 97 जवानों ने 1600 रुपए के हिसाब से 7275 रुपए जमा किये। नाप लेने वाला टेलर दिन के बजाये रात में वर्दी का नाम लेने के लिये बुलाया जाता था। मेजर नीरज पाण्डेय को डर था कि दिन में नाप कराने में कहीं कोई देख ना ले। इस तरह से सस्ते दर पर वर्दी सिलवाई गयी।
सबसे शर्मनाक बात इस लाइन में जवानों ने लिखा है कि इंस्पेक्टर और मेजर ने भगवान को भी नहीं छोड़ा। शस्त्र पूतन के नाम पर सभी जवानों से 75 रुपए के हिसाब से 7275 रुपए की वसूली की गयी। यानि, मृतक आश्रितों से 42 दिन की ट्रेनिंग के दौरान इंस्पेक्टर और मेजर ने मिलकर 2,59,475 रुपए हराम की कमाई की। मेरे जेहन में कई सवाल हैं…। पहला तो यह कि जब लखनऊ के कमंाडेंट कृपाशंकर पाण्डेय को मालूम था कि इंस्पेक्टर और मेजर की गिनती भ्रष्टïतम में आंकी जाती है तो उन्होंने किसी ईमानदार इंस्पेक्टर को जिम्मेदारी क्यों नहीं सौंपी? इसमें कतई संदेह नहीं कि जिला कमांडेंट को भी दोनों ने हराम की कमाई का कुछ हिस्सा ना दिया हो। भ्रष्टïाचार की शुरूआत तभी होती है जब ऊपर बैठा अधिकारी को मिलाये
उस खेल में शामिल होता है?
इस मामले को गंभीरता से लेते हुये होमगार्ड विभाग के डीजी डॉ. सूर्य कुमार शुक्ला ने जांच बिठा दी है। जांच की जिम्मेदारी डीटीसी के कमांडेंट संजीव शुक्ला को सौंप दी गयी है। बताया जाता है कि जवानों का बयान के लिये सभी जनपदों के कमांडेंट को अवगत करा दिया गया है।

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योगी सरकार का वाईन किंग पर कहर: 54 करोड़ जमा करो वर्ना जब्त होंगी दुकानें

पोंटी चड्ढा का साम्राज्य खत्म कर देंगी कल्पना अवस्थी

सूबे में पोंटी चडढ ग्रुप के सभी दुकानों,गोदामों में आज हो रही है छापेमारी

संजय श्रीवा.
लखनऊ। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नौकरशाहों की बेस्ट टीम की सदस्य कल्पना अवस्थी को प्रमुख सचिव,आबकारी बनाया गया है। योगी सरकार की मंशा है कि नई आबकारी नीति आने से पहले वाईन किंग पोंटी चड्ढा की कंपनी मे. एक्यूरेट फूड्स एण्ड ब्रिवरेजज प्रा.लि. द्वारा सरकार को लगाये गये करोड़ों रुपए की चपत का करारा जवाब दे सकें। प्रमुख सचिव बनने के बाद कल्पना अवस्थी ने पोंटी चड्ढा के साम्राज्य को ध्वस्त करना शुरू कर दिया है। उन्होंने मेरठ जोन में इस ग्रुप द्वारा वर्ष 2017-18 में अंगे्रजी,बीयर,देशी शराब की दुकानें आवंटित होने के बाद उसे बंद रखने एवं लाइसेंस फीस जमा ना करने से होने वाली करोड़ों रुपए के सरकारी नुकसान की भरपाई करने के लिये आखिरी तारीख 6 जनवरी दी है। स्पष्टï है कि यदि पोंटी चड्ढा गु्रप बकाये की लगभग 54 करोड़ रकम जमा नहीं करेंगे तो उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जायेगी। उसमें उनकी मेरठ जोन में पडऩे वाली अंग्रेजी,देशी,मॉडल शॉप,बीयर की दुकानों को सीज कर दिया जायेगा। इसी कड़ी में प्रमुख सचिव,आबकारी के निर्देश पर तीन जनवरी को पूरे प्रदेश में आबकारी और जिला प्रशासन स्तर से शराब की दुकानों की चेकिंग की गयी। आज यानि 5 जनवरी को प्रदेश में पोंटी चड्ढा ग्रुप के थोक आपूर्ति गोदामों की सघन जांच की जा रही है।

नव वर्ष पोंटी चड्ढा ग्रप के लिये बधाई का नहीं बल्कि अवसाद का साल होने वाला है। भाजपा की सरकार बनने के बाद से ही कयास लगाया जाने लगा था कि अब वाईन किंग के नाम से मशहूर पोंटी चड्ढा का एक छत्रराज खत्म हो जायेगा लेकिन पिछले छह माह की बात करें तो उसकी हकूमत इस सरकार में भी देखने को मिली। सरकार में मंत्री से लेकर संतरी, यहां तक की आबकारी विभाग में भी उसके एक इशारों पर बड़ी-बड़ी कुर्सियां खिसकती रही। इसका अंदाजा इसी से लगा सकते हैं कि तात्कालीन प्रमुख सचिव,आबकारी दीपक त्रिवेदी ने 15 दिसंबर को 2017 को पोंटी चड्ढा ग्रुप पर पूरी मेहरबानी दिखा दी थी। उन्होंने इस ग्रुप के लिये नई आबकारी नीति का ढांचा बनाने की पूरजोर कोशिश की इसके अलावा मेरठ जोन में 453 शराब की 2017-18 सत्र की बंद दुकानों की निकासी एवं लाइसेंस फीस जो लगभग 54 करोड़ रुपए आती है,को माफ कर दिया था।
बता दें कि सुप्रीम कोर्ट का निर्देश है कि हाईवे के किनारे खुली शराब की दुकानों को हटा दिया जाये। बताया जाता है कि पोंटी चड्ढा ग्रुप के पास मेरठ,बागपत,बुलंदशहर,गाजियाबाद, हापुड़ ,गौतमबुद्ध नगर , मुरादाबाद ,संभल ,अमरोहा, रामपुर ,बिजनौर ,सहारपुर ,मुजफ्फरनगर, शामली ,बरेली, बदायूं, पीलीभीत एवं शाहजहांपुर में पडऩे वाली देशी,अंग्रेजी,बीयर शॉप एवं मॉडल शाप
की दुकानें पिछले कई सालों से बंद कर दी गयी थी। इसके चलते सरकार को करोड़ों की चपत लग रही थी। खैर,तात्कालीन प्रमुख सचिव,आबकारी दीपक त्रिवेदी ने पश्चिम मंडल में पडऩे वाली सभी दुकानों की निकासी एवं लाइसेंस फीस माफ कर इस ग्रुप के प्रति अपनी वफादारी दिखाकर मोटी रकम अंदर कर ली। 15 दिसंबर को जारी इसी आदेश को कल्पना अवस्थी ने खारिज कर दिया है।

29 दिसंबर 2017 को आबकारी आयुक्त को लिखे गये पत्र में कल्पना अवस्थी ने हवाला दिया है कि उ.प्र. डिमार्केशन एण्ड रेग्यूलेशन ऑफ स्पेशल जोन्स फार एक्सक्लूसिव प्रिवलेज ऑफ एक्साइज शॉप रूल्स, 2009 द्वारा गठित विशिष्टï जोन मेरठ की देशी शराब,विदेशी मदिरा,बीयर की फुटकर दुकानों व सभी मॉडल शॉप के अनुज्ञापन के संचालन के लिये वर्ष 2011-12 में एकांतिक विश्ेाषाधिकार मे. ऐक्यूरेट फू्डस एण्ड ब्रिवरजेज प्रा.लि. को प्रदान किया गया था जिसका नवीनीकरण 2017-18 तक समय-समय पर किया गया है। विशिष्टï जोन मेरठ के संबंध में 15 दिसंबर 2017 द्वारा शुरू से ही एब-इनीटो निरस्त किया जाता है। आपके उपरोक्त पत्रों में उपलब्ध कराये गये प्रस्तावनानुसार विशिष्टï जोन,मेरठ की विशेष प्रास्थिति के दृष्टिïगत

संबधित क्षेत्र से असंचालित आबकारी दुकानों को संचालित कराये जाने का उत्तरदायित्व मे. एक्यूरेट फूड्स एण्ड बिवरजेज प्रा.लि. पर निर्धारित करते हुये असंचालित आबकारी दुकानों की सभी देयताओं की वसूली सुनिश्चित की जाये। यदि उक्त अनुज्ञापी द्वारा निर्देश के बावजूद देयताएं जमा नहीं की जाती है तो राजस्वहित में विशिष्टï जोन,मेरठ की देशी शराब,विदेशी मदिरा,बीयर की फुटकर दुकानों व मॉडल शॉप के संचालन के लिये जारी किये गये एकान्तिक विशेषाधिकार को निरस्त किये जाने की नियमानुसार कार्रवाई की जाये।
आबकारी विभाग के आधिकारिक सूत्रों ने बताया कि 6 जनवरी पोंटी ग्रुप के लिये रकम जमा करने की आखिरी मियाद सरकार ने तय की है। यदि बकाये की लगभग 54 करोड़ रुपए नहीं जमा करते हैं तो सरकारी कार्रवाई शुरू हो जायेगी। इस पत्र के बाद प्रदेश सभी आबकारी अधिकारियों एवं जिलाधिकारियों को वाईन किंग की शराब की दुकानों एवं गोदामों में छापामारी करने का फरमान जारी किया गया है। बताया यह भी जाता है कि प्रमुख सचिव,आबकारी कल्पना अवस्थी के इस आक्रामक तेवर के खिलाफ अपना वजूद बचाने के लिये पोंटी चड्ढा ग्रुप न्यायालय की शरण में जायेगा।

 

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