आज भी पहले सिद्ध बाबा का आशीर्वाद लेने आता है नवविवाहित जोड़ा

हापुड़ में गढ़मुक्तेश्वर यूं ही देव भूमि के रूप में प्रसिद्ध नहीं है। तपेश्वरी मंदिर पर भगवान अर्जुन ने पड़ाव डाला था तो सैदपुर में पांडव सहदेव ने पूजा-अर्चना की थी। झड़ीना गांव की इसी परिधि में स्थित सिद्ध बाबा मंदिर का प्राचीन काल से ही अपना महत्व और मान्यता है।आज भी नव विवाहित दूल्हा-दुल्हन बाबा का आशीर्वाद लेकर ही अपने घर में जाते हैं। क्षेत्र के गांवों के नवदंपत्ति शादी के बाद बाबा का आशीर्वाद लेकर अपने घर में पितरों की पूजा-अर्चना करके ही अपने नए जीवन की शुरूआत करते हैं।

 

झड़ीना सिद्ध बाबा मंदिर के महंत महाराज अशोकानंद के मुताबिक प्राचीन काल में एक बारात मंदिर पर पहुंची, जहां दूल्हे और बारातियों ने पूजा-अर्चना की, जिसके बाद वे लोग आगे बढ़ गए। शादी के बाद दूल्हा-दुल्हन मंदिर के सामने से निकलकर सीधे अपने घर पहुंच गए और मंदिर पर रुककर बाबा का आशीर्वाद नहीं लिया। इससे रुष्ट होकर सिद्ध बाबा ने दूल्हा-दुल्हन सहित सारी बारात को बुत बना दिया था।

आज भी सिद्ध बाबा मंदिर में दूल्हा-दुल्हन के अलावा बारात बुत के रूप में है। महंत अशोकानंद ने बताया कि क्षेत्र के गांवों से सभी जात बिरादरी लोग बारात ले जाने से पहले और दुल्हन लाने के बाद बाबा का आशीर्वाद जरूर लेते हैं। उसके बाद घर जाकर अपने पितरों की पूजा करते हैं। मान्यता है कि यह परंपरा लंबे समय से चली आ रही है। इस मंदिर में मेरठ, दिल्ली एनसीआर और हरियाणा के वर-वधू भी सिद्ध बाबा का आशीर्वाद लेने के लिए आते हैं।

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