पत्नी से झगड़े के बाद डिप्टी कमांडेंट ने उठाया खौफनाक कदम, दो मासूमों संग नदी में कूदा, एक मौत

लखनऊ

लखनऊ के मड़ियांव के आईआईएम रोड निवासी सीआरपीएफ के डिप्टी कमांडेंट विशंभर दयाल मौर्या (46) शनिवार की सुबह दो मासूम बच्चों के साथ घैला पुल से गोमती नदी में कूद गए। सात वर्षीय तेजस तो किसी तरह तैरकर बाहर आ गया, लेकिन तीन साल का बेटा वंश और डिप्टी कमांडेंट डूब गए। राहगीरों से जानकारी पाकर पहुंची पुलिस ने सीआरपीएफ को सूचना दी। सीआरपीएफ की रेस्क्यू टीम बोट लेकर आई और नदी खंगाली। दोपहर करीब दो बजे वंश का शव मिल गया, जबकि डिप्टी कमांडेंट का पता नहीं चल सका था।

…तो इसलिए उठाया दिल दहला देने वाला कदम
घरवालों का कहना है कि पत्नी अनुराधा से झगड़े के चलते ही विशंभर दयाल ने यह दिल दहला देने वाला कदम उठा। इंस्पेक्टर अमरनाथ वर्मा ने बताया कि मूलरूप से मलिहाबाद के जगदीशपुर में रहने वाले विशंभर दयाल मौर्या सीआरपीएफ बिजनौर में तैनात हैं। करीब डेढ़ साल पहले झारखंड से तबादला होने पर वह लखनऊ आए और आईआईएम रोड स्थित एल्डिको कॉलोनी में मकान किराये पर लेकर परिवार सहित रहने लगे।उनके पत्नी से काफी तनावपूर्ण संबंध हैं। कई दिन से दोनों के बीच झगड़ा हो रहा था। बृहस्पतिवार को भी दोनों में खूब झगड़ा हुआ। शुक्रवार सुबह अनुराधा ने जगदीशपुर में ही रहने वाले पिता राजेंद्र को फोन कर बुलाया और बच्चों को लेकर उनके साथ मायके चली गईं। डिप्टी कमांडेंट भी अपने ऑफिस चले गए। रात को वह घर लौटे और पत्नी को फोन करने लगे।

उन्होंने फोन नहीं उठाया तो ससुर व ससुराल के अन्य सदस्यों को कॉल की। किसी ने फोन नहीं उठाया तो गुस्से से भड़के डिप्टी कमांडेंट कार लेकर रात करीब दो बजे जगदीशपुर पहुंच गए। वहां उन्होंने पत्नी व ससुरालवालों से जमकर झगड़ा किया, दोनों बच्चों को लेकर चले गए और घैला पुल से नदी में छलांग लगा दी। नदी से बाहर निकले बच्चे को देख राहगीरों ने सुबह पांच बजे के करीब पुलिस को सूचना दी।डिप्टी कमांडेंट ने शुक्रवार रात झगडे़ के दौरान ससुरालवालों से कहा था कि वह बच्चों के साथ नदी में कूदकर जान दे देगा। उनकी इस बात पर किसी से यकीन नहीं किया। ससुरावालों ने सोचा कि वह गुस्से में है, इसलिए ऐसा कह रहे हैं। शनिवार सुबह जब ससुरालवालों को यह दर्दनाक खबर मिली तो उनके होश उड़ गए।

लापरवाही :  100 नंबर पर दी सूचना, एक घंटे बाद पहुंची पुलिस
ग्रामीण क्षेत्र में हर सूचना पर 20 मिनट में मौके पर पहुंचने का दावा करने वाली यूपी 100 सेवा इस मामले की शिकायत मिलने पर भी एक घंटे बाद पहुंची थी। डिप्टी कमांडेंट के ससुर राजेंद्र ने बताया कि घर पर लड़ाई-झगडे़ के बाद जब दामाद ने बच्चों सहित नदी में कूदने की धमकी दी तो वह घबरा गए। दामाद के जाने के बाद उन्होंने रात करीब तीन बजे 100 नंबर डायल किया।

उन्होंने पुलिस को दामाद के झगड़ा करने और बच्चों सहित नदी में कूदने की धमकी के बारे में जानकारी दी। राजेंद्र का कहना है कि सूचना मिलने के करीब एक घंटे बाद पीआरवी मौके पर आई थी। अगर सही वक्त पर पुलिस आ जाती तो शायद अनुराधा का परिवार तबाह होने से बच जाता। यूपी 100 सेवा का यह हाल तब है जब मलिहाबाद व आसपास के इलाकों में हत्या कर डकैती की सनसनीखेज वारदातें हुई हैं।डिप्टी कमांडेंट विशंभर दयाल मौर्य कुशल तैराक हैं। सीआरपीएफ में उन्हें तैराकी का चैंपियन कहा जाता है। वह तैराकी में कई गोल्ड मेडल भी जीत चुके हैं। इसके बाद भी पानी में डूबने को लेकर तरह-तरह की चर्चाएं हैं। कुछ लोगों का मानना है कि विशंभर दयाल तैरकर निकल गए होंगे।

डरा-सहमा और निढाल तेजस बोला, पापा ने कूदने को कहा था
घटना से मासूम तेजस डरा-सहमा सा है। निढाल पड़ चुके तेजस ने बताया कि पापा नाराज और दुखी थे। वह मां पर बार-बार गुस्सा हो रहे थे। कह रहे थे कि खुद मरेंगे और बच्चों को भी साथ ले जाएंगे। बकौल तेजस, पापा हमें और वंश को लेकर नदी के पुल पर पहुंचे। मुंडेर के पास पहुंचकर उन्होंने नीचे कूदने को कहा। चारों तरफ अंधेरा था, पापा गुस्से में थे, डर के मारे मैं कूद गया। फिर वंश को लेकर पापा भी कूद गए। तेजस सीएमएस की चौक शाखा में पढ़ता है।उसने कहा कि जब पापा उसे व वंश को लेकर पुल पर पहुंचे थे तो कुछ समझ नहीं आ रहा था। चारों तरफ हलका अंधेरा भी था। डर लग रहा था। लेकिन पापा का मूड देखकर उसकी कुछ भी पूछने या कहने की हिम्मत नहीं हुई।

वह जैसा कहते गए, उसने वैसा ही किया। तेजस बर्फ से ठंडे पानी में किसी तरह तैरकर बाहर निकल आया। किनारे पर आकर वह काफी देर तक पस्त हालत में पड़ा रहा। इसके बाद हिम्मत करके वह ऊपर आया। इस बीच उधर से एक ट्रक गुजरा। तेजस ने इशारा करके ट्रक रुकवाया। ट्रक में सवार लोगों को उसने घटना की जानकारी दी तो सबके होश उड़ गए। ट्रक में बैठे मोहम्मद नौशाद ने सुबह 5.21 बजे यूपी 100 सेवा को फोन कर सूचना दी थी। पीआरवी 0496 के सब कमांडर मोहित बाजपेई और पायलट अमित कुमार सिंह मौके पर पहुंचे। बच्चे के कपड़े गीले थे।शरीर ठंडे पानी से बुरी तरह से अकड़ चुका था। हाथ-पैर व नाखून नीले पड़े थे। वह ठीक से बोल नहीं पा रहा था। पीआरवी के पुलिसकर्मियों ने बच्चे के कपड़े उतारे और आग जलाकर उसके शरीर की सिंकाई की। आग की गर्मी से कुछ ठीक हुआ, तब उसने पुलिस को घटना की जानकारी दी।

भाभी बोलीं, पता होता तो न जाने देती कभी
विशंभर दयाल अपनी ससुराल से सीधे बड़े भाई सतीश के घर पहुंचे। उन्होंने दोनों बेटों को भाभी के पास छोड़ दिया और उनके बेटे सुधीर व रोहित को लखनऊ ले जाने की बात कहते हुए साथ में बैठा लिया। कुछ दूर मुजाका गांव के पास उन्होंने भतीजों को उतार दिया।विशंभर दयाल ने कहा कि दोनों लोग घर चले जाओ। इस पर बच्चों ने कहा कि रात को अकेले पैदल कैसे घर जाएंगे। यह सुनकर विशंभर ने दोनों को कार में बैठाया और घर ले गए। वहां से उन्होंने दोनों बच्चों को ले लिया। भाभी ने रोकने की कोशिश की लेकिन वह नहीं माने। सुबह दर्दनाक खबर सुनते ही सतीश और उनकी पत्नी का कलेजा मुंह को आ गया। भाभी ने कहा कि अगर उन्हें देवर जी के इरादों का जरा भी अंदाजा होता तो उन्हें कभी न जाने देतीं। सतीश ने बताया कि पांच भाइयों में विशंभर सबसे छोटा है।

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