क्या होगा इस देश का, जब परीक्षाओं में नक़ल की आदी हमारी नयी पीढ़ी अयोग्य होगी ?

 नकल माफिया पर योगी आदित्यनाथ सरकार की नकेल, दो दिन में पांच लाख ने छोड़ी परीक्षा…
राम महेश मिश्र
अब पानी सिर के ऊपर निकल चुका है। हमारी पूर्ववर्ती सरकारों और कमाऊ विद्यालयों ने विद्यार्थियों को स्वच्छंदता के साथ नक़ल करना सिखा दिया। बड़ी सख़्ती ज़रूरी है, ताकि बच्चे ठीक से पढ़ाई करें, सुयोग्य बनें, देश के लिए उपयोगी बनें।  प्रदेश के उप मुख्यमंत्री डॉ. दिनेश शर्मा के पास माध्यमिक तथा उच्च शिक्षा विभाग है। परीक्षा के पहले दिन से ही उन्होंने ताबड़तोड़ औचक निरीक्षण किया है। एक-एक दिन में चार जिलों में उन्होंने परीक्षा केंद्रों का जायजा लिया है। इसके साथ ही हर परीक्षा केंद्र को सीसीटीवी कैमरा से जोड़ा गया है। पहली बार एसटीएफ को भी उत्तर प्रदेश बोर्ड की परीक्षा में लगाया गया है। यूपी बोर्ड ने आंकड़े जारी करते हुए बताया कि पहले दिन दसवीं में 69201 और बारहवीं में 220107 छात्रों ने परीक्षा छोड़ दी।
उत्तर प्रदेश बोर्ड की 2018 की परीक्षा में सरकार की सख्ती का असर दिखाई देने लगा है। बोर्ड परीक्षा के पहले दो दिनों में पांच लाख से ज्यादा छात्रों ने परीक्षा छोड़ दी है। कल 144 नकलची पकड़े गए। माना जा रहा है सरकार की सख्ती की वजह से नकल के भरोसे परीक्षा देने वाले छात्रों को मायूसी हाथ लगी है, जिसकी वजह से इतनी बड़ी संख्या में छात्र परीक्षा छोड़ चुके हैं। इसके साथ सीसीटीवी और एसटीएफ की मुस्तैदी से भी नकल माफियाओं को तगड़ा झटका लगा है। जानकार भी मान रहे हैं कि इस बार नकलविहीन परीक्षा का माहौल बना है।
यूपी बोर्ड की सचिव नीना श्रीवास्तव ने बताया कि परीक्षा के दो दिन बीत चुके हैं। सभी जिलों से उत्साहजनक सूचनाएं आ रही हैं। नकल माफिया के हौसले पस्त हैं। हर बड़े जिले में एसटीएफ सक्रिय है। कहीं पर भी नकल की सूचना मिलते ही सख्त से सख्त कार्रवाई की जा रही है यूपी बोर्ड की छह फरवरी से शुरू हुई परीक्षा के लिए कुल 66 लाख 37 हजार छात्रों को एडमिट कार्ड जारी हुआ था। दो दिन में पांच लाख से अधिक ने परीक्षा छोड़ दी। पहले दिन कुल 289308 परीक्षार्थियों ने छोड़ी परीक्षा। दूसरे दिन दसवीं में 214265 व बारहवीं में 1496 छात्र अनुपस्थित रहे। दूसरे दिन कुल 215761 छात्रों ने परीक्षा छोड़ी।*
हालाँकि फ़ेसबुक पर लिखी हमारी इस पोस्ट पर कुछ टिप्पणियाँ आयीं और बताया गया कि बीते वर्षों में भी ऐसा हुआ है। मूल समस्या बड़ी संख्या में सेवारत ऐसे स्कूलों की है, जो ज़रूरत से ज़्यादा और निर्धारित मानकों से अधिक बहुत भारी संख्या में प्रवेश ले लेते हैं और पास करा देने का ठेका ले लेते हैं। हमारे मुख्यमन्त्री जी एवं Dy CM साहब को सख़्ती से यह फरजिफिकेशन बन्द कराना चाहिए। ‘शिक्षा’ उद्योग से बाहर कैसे निकले, इस पर दृढ़प्रतिज्ञ सन्यासी राजनेता माननीय योगी जी और वरिष्ठ शिक्षाविद डॉ. दिनेश शर्मा जैसे व्यक्ति ही कुछ बदलाव ला सकते हैं।

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