DM दीपक रावत के एक्शन से हिली हरिद्वार तहसील, गड़बड़ी पर किसी को नहीं बख्शा

एफआईआर न करने पर तहसीलदार होगी निलंबितमौके पर नहीं आए मुख्य निबंधन लिपिक 

हरिद्वार

औचक छापेमारी के लिए चर्चाओं में रहने वाले डीएम दीपक रावत एक बार फिर एक्शन में दिखे। शनिवार को उन्होंने हरिद्वार तहसील में औचक निरीक्षण किया तो अफसर-कर्मचारियों के कामकाज की पोल खुल गई। उन्होंने गड़बड़ी मिलने पर किसी अफसर-कर्मचारी को नहीं छोड़ा। बड़े स्तर की इस कार्रवाई से पूरी तहसील में हड़कंप मच गया। जिलाधिकारी दीपक रावत ने शनिवार को तहसील का निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान कई खामियों के चलते डीएम ने दो सब रजिस्ट्रारों, एक नायब नाजिर, दो लिपिकों और कई अमीनों का वेतन रोकने का आदेश दिए। साथ ही लिपिकों की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए उनका ट्रांसफर करने का भी आदेश जारी किया। जबकि एक स्टांप विक्रेता का लाइसेंस भी रद्द कर दिया।

शनिवार को जिलाधिकारी दीपक रावत के निरीक्षण के दौरान सब रजिस्ट्रार भावना कश्यप और सुमेर चंद गौतम सक्षम अधिकारी की अनुमति के बिना अवकाश पर थे, जबकि सब रजिस्ट्रारों की जगह लिपिक रजिस्ट्रियों में हस्ताक्षर कर रहे थे। इसके अलावा कई रजिस्ट्रियां दो महीने पुरानी होने के अलावा रिकॉर्ड भी रजिस्ट्रर में दर्ज नहीं किया गया था। जिस पर डीएम ने दोनों सब रजिस्ट्रारों को प्रतिकुल प्रविष्टी देने, वेतन रोकने और नियुक्ति प्राधिकारी को पत्र प्रेषित कर पदोन्नित के दौरान दोनों सब रजिस्ट्रारों की इस प्रकार की कार्यप्रणाली को संज्ञान रखते हुए निर्णय लेने को आदेश दिया।

एक माह पुरानी रजिस्ट्रियां मिलने पर जिलाधिकारी ने सब रजिस्ट्रार सुमेर चंद गौतम की सत्यनिष्ठा को संदिग्ध ठहराया। उन्होंने कहा कि सुमेर चंद की सत्यनिष्ठा को वार्षिक चरित्र पंजिका में संदिग्ध दर्शाया जाए। उन्होंने ने बिना किसी आदेश या अनुमति के रजिस्ट्रियों पर हस्ताक्षर करने और रजिस्ट्री के कार्य को लंबे समय तब लंबित रखने के कारण लिपिक राम कुमार यादव और प्रबंधक लिपिक प्रमोद राणा का अगले आदेश तक वेतन रोकने, प्रतिकुल प्रविष्टी देने और खराब कार्यप्रणाली के कारण दोनों का ट्रांसफर करने का आदेश दिया है। इसके अलावा स्टांप विक्रेताओं सहित अन्य जानकारी नहीं देने पर नपा नाजिर जेपी शुक्ला और वसूली के लेटलतीफी करने पर कई अमीनों का भी वेतन रोकने के आदेश दिए। जिलाधिकारी दीपक रावत ने कहा कि रजिस्ट्रियों की जानकारी रजिस्टर में दर्ज न करने से अभिलेखों के लिए अनुचित लाभ प्राप्त होने की संभावना है। इस मौके पर एसडीएम मनीष सिंह, तहसीलदार सुनैना राणा, नायब तहसीलदार महेंद्र सिंह, कानूनगो अमरीष शर्मा  आदि मौजूद थे।

निरीक्षण के दौरान डीएम ने पाया कि कई रजिस्ट्रियों पर सब रजिस्ट्रार के नाम की सील के बिना ही हस्ताक्षर किए गए हैं। जिस पर उन्होंने आदेश दिया कि कोई भी अधिकारी-कर्मचारी बिना नाम की सील के कहीं भी हस्ताक्षर नहीं करेगा। बिना सील के हस्ताक्षर करने पर संबंधित अधिकारी और कर्मचारी के खिलाफ उचित कार्रवाई की जाएगी।जिलाधिकारी ने प्रतिबंध के बावजूद पॉलीथिन बेचने के कारण दाना पानी रेस्टोरेंट के संचालक संजीव चौधरी और तहसील के समीप एक किराना स्टोर का पांच-पांच हजार रुपये का चालान किया। डीएम ने कहा कि आदेश के बाद तहसील परिसर के पास पॉलीथिन के प्रयोग से सिद्ध होता है कि लोगों के अंदर कानून का डर खत्म हो गया है। उन्होंने एक इलेक्ट्रॉनिक व्यापारी का अतिक्रमण भी हटवाया।

 

बीते वर्ष निरीक्षण के दौरान डीएम स्टांप विक्रेता आशीष कुमार का लाइसेंस रद्द किया था। लेकिन शनिवार को निरीक्षण के दौरान आशीष का काउंटर लगा मिला। जिस पर डीएम ने मौके पर आशीष कुमार को बुलाया और आगे तहसील परिसर में दिखने पर तहसीलदार को अशीष के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने का आदेश दिया। डीएम ने कहा कि तहसीलदार द्वारा एफआईआर दर्ज न कराने पर तहसीलदार को निलंबित किया जाएगाडीएम रजिस्ट्रार कार्यालय में मुख्य निबंधन लिपिक यूपी गौनियाल के कार्यलय का निरीक्षण करने भी आए। इस दौरान कार्यालय पर ताला लगा मिला। जिस पर उन्होंने कर्मचारियों से यूपी गौनियाल को बुलाने के लिए कहा। जिस पर डीएम ने कहा कि वह यूपी गौनियाल के कार्यालय में कुछ महत्वपूर्ण अभिलेख देखने आए थे, लेकिन कार्यालय बंद मिला। निरीक्षण के दौरान कई रजिस्ट्रियों को लिपिकों ने हस्ताक्षर किए गए थे। जिस पर डीएम ने एडीएम को सभी रजिस्ट्रियों को चेक कर सभी में हस्ताक्षर करने का आदेश दिया। 

जिलाधिकारी ने निरीक्षण के दौरान पाया कि कई रजिस्ट्रियों को बिना कारण के स्थगित कर दिया गया है। जिस पर उन्होंने सब रजिस्ट्रार को डीएम कार्यालय में आकर रजिस्ट्रियों को स्थगित करने का कारण बताने के साथ ही पक्षकारों को इस बात की पुष्टि होने की जानकारी देने का आदेश दिया।जिलाधिकारी ने तहसील के एक कर्मचारी की बिना नंबर की स्पोर्ट्स बाइक में ताला लगवाकर नंबर नहीं मिलने तक बाइक को तहसील में ही रखने का आदेश दिया। जिलाधिकारी ने कहा कि बिना नंबर की बाइक चलाना गैरकानूनी है।

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