इन्वेस्टर्स समिट: लोकसभा चुनाव में ‘विकास’ की ‘खुशबू’ से इतरायेगी भाजपा

संजय श्रीवास्तव
लखनऊ। उत्तर प्रदेश में २१ फरवरी २०१८ का दिन ‘विकास’ की ‘सोच’ के लिये इतिहास में दर्ज किया जायेगा। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का सपना है कि वे उत्तर प्रदेश को ‘उत्तम प्रदेश’ बनता देखें। क्योंकि यहां पर अपार संभावनाएं होने के बावजूद नौजवान दूसरे राज्यों का रूख कर लेते हैं। सपना तभी साकार होगा जब यूपी में विकास होगा,रोजगार के अवसर बढ़ेंगे। इसके लिये केन्द्र व राज्य सरकार ने मिलकर ऐसी रणनीति बनायी कि जिससे कोई बेरोजगार भी ना रहे और प्रधानमंत्री का खूबसूरत स्वप्न पूरा होने के साथ-साथ आगामी २०१९ के लोक सभा चुनाव में विकास के दम पर योगी सरकार का परचम लहरा जाये।

पीएम की ‘सोच’ को पंख लगाने का काम यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ ने युद्ध स्तर पर करना शुरू कर दिया और इसकी आगाज इन्वेस्टर्स समिट के रूप में देखा जा सकता है। कुल मिलाकर नवाबों की धरती पर बड़े उद्योगपतियों के महाकुंभ से प्रदेश में ऐसा माहौल बनता दिख रहा है कि यदि वायदे के मुताबिक सभी निवेशकों ने निवेश कर दिया तो तय है कि आगामी लोक सभा चुनाव में सभी राजनैतिक पार्टियों का सूपड़ा साफ हो सकता है और एक बार फिर चहुंओर भगवा ही भगवा दिखेगा। लेकिन,ये संभव तभी,जब वायदे पूरे हों क्योंकि पिछली सरकारों में भी बड़े उद्योगपतियों ने जोर-शोर से निवेश का वायदा किया था लेकिन यूपी का हश्र क्या है ये किसी से छिपा नहीं है।

उम्मीदों का प्रदेश उत्तर प्रदेश अब उत्तम प्रदेश बनने का सपना देख रहा है। उसे लगने लगा है जहां पर कोई झांकना मुनासिब नहीं समझता,शीघ्र वहां पर गगनचुंबी फैक्ट्रियां उम्मीदों का धुआं उगलती नजर आयेंगी। खेतों में हरियाली लहलहायेगी तो बूढ़े मां-बाप के सामने उनका लाल रहेगा। पूर्वांचल,पश्चिमी क्षेत्रों के अलावा बुंदेलखण्ड की सूखी धरती पर सरकार की योजनाएं क्रियान्वित होते ही खुशहाली की बयार देखने को मिलेगी। अब कुछ इस तरह का स्वप्न यूपी वाले देखने लगे हैं। इन्वेस्टर्स समिट ने एक बार फिर अन्य सरकारों के खोखले वायदों के बाद सोचने पर मजबूर हो रहे हैं। यहां के लोगों की एक खासियत है कि वे पुरानी बातों का जल्द भूलकर नई उम्मीद,नई ऊर्जा के साथ अपने मंजिल की ओर बढऩे लगते हैं,फिर चाहें वो रोजगार के तौर पर दूसरा राज्य ही क्यों ना हो। पुरानी सरकारों की बातें आज करनी बेमानी है क्योंकि आज उत्तर प्रदेश को नई दुल्हन की तरह से सजाया गया है।

समिट में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने देश-विदेश के सबसे बड़े उद्योगपतियों को लाकर यह साबित कर दिया कि वे जनता-जनार्दन के साथ-साथ उत्तर प्रदेश का डंका बजाने के लिये कितने बेचैन हैं। तभी तो उन्होंने कहा कि भारत को महाशक्ति बनाने का रास्ता यूपी से होकर जायेगा। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने मंच से खुले तौर पर योगी आदित्यनाथ,उनके मंत्री मंडल एवं नौकरशाहों की प्रशंसा की और कहा कि योगी ने एक सफल आयोजन किया है। इतने उद्योगपतियों को लाने का मतलब ही है कि अब यूपी की मिशाल अन्य राज्य के लोग देंगे।
ये तभी संभव हो पा रहा है, क्योंकि योगी और नरेन्द्र मोदी की  ‘सोच’ एक है। दोनों के काम करने का अंदाज एक है। ईमानदार नीयत और दूसरों के लिये कर गुजरने का माद्दा केन्द्र व राज्य की सरकार की सोच में है। समीट में पहले दिन एक हजार ४५ एमओयू साईन हुये और चार लाख २८ हजार करोड़ का निवेश आने की संभावना है। भले ही विरोधी दल इसे आगामी लोक सभा के चुनाव से जोड़ रहे हों लेकिन एक बात तो है कि सूबे के मुख्यमंत्री ने ऐसा कर दिखाया है जिसका कोई जवाब नहीं है। उन्होंने माहौल तो बना ही दिया है। उन्होंने निवेशकों के कार्यों की मानीटरिंग खुद करने की हामी भी भी,जो बहुत बड़ी बात है।

सवाल यह है कि आखिर बसपा और सपा की सरकारों ने भी यूपी में लंबे समय तक राज किया था लेकिन उनलोगों ने विकास क्यों नहीं किया? दोनों सरकारों में ऐसी योजनाएं क्यों नहीं बनायी गयीं? आखिर उनकी सरकारों में भी तो यही नौकरशाहों की टीम थी? योगी आदित्यनाथ ने उन्हीं नौकरशाहों से शानदार काम कराया इसका मतलब वे कुशल रणनीतिकार हैं। उन्हें वायदे नहीं जमीनी हकीकत में काम को उतारने की जीद्द आता है। और यही बात मोदी और योगी को दूसरे राजनैतिज्ञों से जुदा करत
ा है।
खैर,दो दिन के इस महाकुंभ के आयोजन ने यूपी की हवा में भगवा रंग घुल चुका है। इसे लोग आगामी लोक सभा चुनाव से भी देख रहे हैं। जनता को विकास से मतलब है,यदि सरकार चुनावी तैयारियों के लिये ये सब कर रही है तो क्या हुआ। रोजगार के अवसर तो बढ़ेंगे,बड़ी-बड़ी चिमनियां अठखेलियां खेेलते हुये धुएं तो उगलेंगी। यदि ऐसा होता है तो नि: संदेह ये मोदी और योगी की बहुत बड़ी जीत होगी।

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