छत्तीसगढ़ कांग्रेस में परिवारवाद की राजनीति पर फिर से विवाद

छत्तीसगढ़ कांग्रेस में परिवारवाद: पीसीसी में नेताओं के सगे संबंधी 7 परिवार के 16 प्रतिनिधि पीसीसी

डेलीगेट्स बनाए गए


रायपुर. परिवारवाद के आरोप झेलने के बावजूद छत्तीसगढ़ कांग्रेस में परिवारवाद की राजनीति ने एक बार फिर अपना असर दिखाया है। पीसीसी की नई टीम में सात परिवार से 16 लोग पीसीसी डेलीगेट्स बनाए गए हैं। इनमें वरिष्ठ नेताओं से लेकर विधायक तक के परिवार के सदस्य हैं। वरिष्ठ नेता मोतीलाल वोरा से लेकर ताम्रध्वज साहू, सत्यनारायण शर्मा, अमितेश शुक्ला और महेंद्र बहादुर के साथ ही उनके बेटे को भी पीसीसी डेलीगेट बनाया गया है। इसी प्रकार विधायक कवासी लखमा के साथ उनकी पत्नी और लक्ष्मण चंद्राकर अपनी बहन को पीसीसी डेलीगेट बनवाने में सफल रहे हैं।

डेलीगेट की सूची में अधिकांश कांग्रेस के बड़े नेता व उनके संबंधी

– बता दें कि विधानसभा चुनाव की तैयारियों में जुटी कांग्रेस ने रविवार को पीसीसी डेलीगेट्स की सूची जारी की। 198 पीसीसी डेलीगेट व 62 पीसीसी काे-आप्शन डेलीगेट की सूची में अधिकांश कांग्रेस के बड़े नेता व उनके संबंधी शामिल हैं।

– पिछले दिनों पार्टी कार्यकर्ताओं ने प्रदेश प्रभारी पीएल पुनिया के सामने पार्टी के बड़े नेताओं पर परिवारवाद का अारोप लगाया था। साथ ही उन्होंने पीसीसी के बड़े नेताओं पर कार्यकर्ताओं की उपेक्षा का आरोप भी लगाया था। पुनिया से अलग-अलग मिलकर कार्यकर्ताओं ने खुलकर अपनी भड़ास निकाली थी।

– बताया जा रहा है कि पुनिया ने भी कार्यकर्ताओं को भरोसा दिलाया था कि इस बार सभी का ख्याल रखा जाएगा। सूची जारी होने के बाद बाकायदा पार्टी कार्यकर्ताओं ने ऐसे लोगों की सूची बनाई जाे नेताओं के परिवार के सदस्य हैं। नाराज नेताओं ने यह सूची दिल्ली भेजी भी है।

इनको बनाया डेलीगेट

– मोतीलाल वोरा परिवार – अरुण वोरा, अरविंद वोरा (बेटे) और राजीव वोरा (गोविंदलाल वोरा के बेटे)।

– ताम्रध्वज साहू – जितेंद्र साहू (बेटा)।

– सत्यनारायण शर्मा-पंकज शर्मा (बेटा)।

– अमितेश शुक्ला – भवानी शुक्ला (बेटा)।

– लक्ष्मण चंद्राकर- प्रतिमा चंद्राकर (बहन)।

– महेंद्र बहादुर – देवेंद्र बहादुर (बेटा)।

– कवासी लखमा – गीता कवासी लखमा (पत्नी)।

चुनाव लड़ने वालों को संगठन से दूर रखने की रणनीति पर संशय, पीसीसी चीफ का फाॅर्मूला अब तक बेअसर

प्रदेश प्रभारी पीएल पुनिया ने सभी को साधने व संतुष्ट करने की रणनीति के तहत प्रदेश के 34 संगठन जिलों में जिलाध्यक्षों की नियुक्ति तो की गई है लेकिन पीसीसी की स्थानीय राजनीति भी इसमें साफ दिख रही है। चुनाव लड़ने के इच्छुक दावेदारों को जिलाध्यक्ष का पद छोड़ने का जो फार्मूला प्रदेश अध्यक्ष भूपेश बघेल ने तैयार किया था, उस पर संशय दिख रहा है। रायपुर शहर में भूपेश बघेल की योजना के विपरीत विकास उपाध्याय को अध्यक्ष बनाया गया है। विकास पश्चिम विधानसभा में सक्रिय हैं। ऐसे में भूपेश के फार्मूले के तहत विकास का हटना लगभग तय था, लेकिन ऐसा नहीं हुआ।

बताया जा रहा है कि विकास को यथावत रखने के पक्ष में मोतीलाल वोरा के साथ ही डॉ चरणदास महंत और सत्यनारायण शर्मा ने भी लॉबिंग की थी। इसी तरह जांजगीर-चांपा जिले में जिलाध्यक्ष को लेकर पूर्व केंद्रीय मंत्रीडॉ चरणदास महंत और भूपेश बघेल के बीच ठन गई थी, लेकिन महंत पुनिया को साधने में सफल रहे। यहां भी महंत के करीबी दिनेश चंद्र शर्मा को जिलाध्यक्ष बनाया गया है। इसके अलावा महंत की पसंद के अनुसार कोरबा शहर में राज किशोर प्रसाद और कोरबा ग्रामीण में उषा तिवारी को जिलाध्यक्ष बनाया गया है। हालांकि, दुर्ग ग्रामीण में बघेल की पसंद तुलसी साहू को तो जिलाध्यक्ष बनाया गया है, लेकिन दुर्ग शहर में मोतीलाल वोरा खेमे के आरएन वर्मा को यथावत रखा गया है।

सरगुजा संभाग के जशपुर, सरगुजा, सूरजपुर, बलरामपुर और कोरिया में जिलाध्यक्ष पद के लिए नेता प्रतिपक्ष टीएस सिंहदेव की पसंद को तवज्जो दी गई है। यहां पर सरगुजा में बालकृष्ण पाठक और कोरिया में नजीर अजहर को जिलाध्यक्ष बनाया गया है। दूसरी तरफ बस्तर संभाग में स्थानीय नेताओं द्वारा दिए गए नाम पर आम सहमति बनाकर जिलाध्यक्षों को रिपीट करने और बदलने का निर्णय लिया गया है। बस्तर ग्रामीण में देवती कर्मा की पसंद से राजमन बेंजाम को और कांकेर में स्थानीय नेताओं की पसंद को ध्यान में रखकर भुनेश्वर नागराज और कोंडागांव में रवि घोष को जिलाध्यक्ष बनाया गया है।

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