नाम तय होने से पहले खरीदा राज्यसभा का नामांकन फॉर्म, बीजेपी प्रेसिडेंट ने, विरोधियों ने खोला मोर्चा

रायपुर. राज्यसभा की एक सीट के लिए भाजपा से 25 नाम दिल्ली नेतृत्व के पास भेजे गए हैं। आठ राज्यों के नाम तो तय हाे गए लेकिन छत्तीसगढ़ पर पार्टी ने फैसला नहीं किया है, बावजूद इसके प्रदेश भाजपा अध्यक्ष धरमलाल कौशिक ने अपना नाम फाइनल समझकर समय से पहले नामांकन फाॅर्म खरीद लिया। इसकी खबर फैलते ही पार्टी में किरकिरी होने लगी। पार्टी नेतृत्व ने तो इस पर नाराजगी भी जताई। बाद में कौशिक ने विधानसभा में नामांकन फॉर्म वापस करने का प्रयास किया। पर वे सफल नहीं हो पाए। नामांकन फॉर्म वापस करने का कोई प्रावधान है ही नहीं। इस कारण 10 रुपए के नामांकन फॉर्म ने कौशिक के लिए बड़ी परेशानी खड़ी कर दी।

दावेदारों में कई प्रभावशाली नेताओं के नाम भी

– छत्तीसगढ़ से प्रत्याशी की घोषणा शुक्रवार को होनी है। इससे पहले ही कौशिक ने नामांकन के लिए फॉर्म खरीद लिया। जिससे यह संकेत भी गया है कि उन्हें पार्टी से संभवत: हरी झंडी मिल गई होगी, लेकिन पार्टी के बड़े नेता इससे इंकार कर रहे हैं।

– राज्यसभा चुनाव के संदर्भ में देखेें तो ऐसा पहली बार हुआ है कि प्रदेश अध्यक्ष स्तर के नेता ऐसी उलझन में फंसे हैं। कौशिक के लिए यह उलझन इसलिए भी है क्योंकि अन्य दावेदारों में कई प्रभावशाली नेताओं के नाम भी हैं। इनमें सबसे बड़ा नाम राष्ट्रीय महामंत्री सरोज पांडेय का भी है।

विरोधियों ने खोला मोर्चा

कल फॉर्म खरीदी की खबर मीडिया में फैलते ही कौशिक विरोधियों ने मोर्चा ही खोल दिया। इनमें एक-दो पूर्व सांसदों समेत कुछ दावेदार भी शामिल हैं।सभी ने तिल का ताड़ बनाकर बाते हाईकमान तक पहुंचाई। यह कहा गया कि अरुण जेटली, रविशंकर प्रसाद जैसे दिग्गजों ने भी नाम घोषित होने तक फॉर्म नहीं खरीदा एेसे में कौशिक एेसा कर क्या संदेश देना चाहते हैं। बात राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह तक जाने के बाद हाईकमान भी सक्रिय हुआ। राष्ट्रीय सह महामंत्री सौदान सिंह ने कौशिक से संपर्क कर आलाकमान की नाराजगी से अवगत कराया। इसके बाद कौशिक ने गुरुवार को फॉर्म वापस करने अपने करीबी व्यक्ति को विधानसभा सचिवालय भेजा था पर नियमों में प्रावधान न होने से फॉर्म वापस नहीं हो पाया।

राज्य की ओबीसी आबादी को ध्यान में रखकर कौशिक का नाम

राष्ट्रीय महामंत्री सरोज पांडेय के लिए राज्यसभा जाने की संभावना भी उतनी ही है जितनी कौशिक के लिए। पार्टी के सामान्य फॉर्मूले के तहत सभी महामंत्रियों को राज्यसभा का टिकट दिया गया है। इस पर विचार हुआ तो पांडेय का नाम ही सबसे ऊपर होगा। इसके विपरीत राज्य की ओबीसी आबादी को ध्यान में रखकर कौशिक का नाम रखा गया है। कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष इसी वर्ग से आते हैं और वे राज्य की भाजपा सरकार के खिलाफ आक्रामक अभियान चला रखे हैं। इस मुद्दे पर नाम तय करने पर विचार हुआ तो कौशिक का नाम सामने हो जाएगा। यही वजह है कि भाजपा के सामने नाम तय करने में इस समय उलझन है। संभवत: इसी वजह से भाजपा की प्रदेश इकाई ने तीन नामों का पैनल भेजने के बजाय सारे आवेदनों को दिल्ली भेज दिया।

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