SC-ST एक्ट पर सुप्रीम कोर्ट कायम, बदलाव से किया इनकार

नई दिल्ली

सुप्रीम कोर्ट ने SC-ST एक्ट पर अपना फैसला बदलने से इनकार कर दिया है। सरकार की तरफ से दायर पुनर्विचार याचिका पर सुनवाई करते हुए अदालत ने कहा कि वो इस आदेश पर स्टे जारी नहीं करेगी बल्कि दस दिनों बाद मामले की फिर सुनावाई करेगी। इसके लिए कोर्ट की तरफ से सभी पार्टियों से दो दिनों के भीतर जवाब मांगा गया है। इससे पहले अटॉर्नी जनरल की जिरह सुनने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हम कानून के खिलाफ नहीं है लेकिन चाहते हैं कि निर्दोषों को सजा नहीं मिले।


अनुसूचित जाति व जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम, 1989 पर सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिए हालिया आदेश को लेकर देशभर में हो रहे विरोध प्रदर्शन के बीच केंद्र सरकार ने शीर्ष अदालत में पुनर्विचार याचिका दायर की गई है। पुनर्विचार याचिका में केंद्र सरकार ने कहा है कि नए आदेश का व्यापक असर पड़ेगा। सरकार ने इससे एससी-एसटी एक्ट कमजोर होने की बात कहते हुए पुरानी व्यवस्था को बहाल करने की गुहार की है।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि SC-ST एक्ट के तहत जो व्यक्ति शिकायत कर रहा है, उसे तुरंत मुआवजा मिलना चाहिए। इस मामले की सुनवाई जस्टिस आदर्श कुमार गोयल और जस्टिस यूयू ललित की बेंच ने की। कोर्ट ने इस मामले में सभी पार्टियों से अगले दो दिनों में विस्तृत जवाब देने को कहा है। अब इस मामले की अगली सुनवाई 10 दिन बाद होगी।

केंद्रीय कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने भी सवाल उठाया कि इस मामले में कोई निर्णय देने से पहले सुप्रीम कोर्ट ने भारत सरकार को औपचारिक तौर पर पार्टी क्यों नहीं बनाया उधर, सोमवार को ही सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले से जुड़ी एक अन्य याचिका पर तत्काल सुनवाई करने से इनकार कर दिया। ये याचिका ऑल इंडिया फेडरेशन ऑफ एससी-एसटी नामक संगठन की ओर से दायर की गई थी।

संगठन का कहना था कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद देशभर में हिंसा हो रही है, लिहाजा याचिका पर जल्द सुनवाई होनी चाहिए। लेकिन चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ ने याचिका पर जल्द सुनवाई से इनकार कर दिया।

इससे पहले पुनर्विचार याचिका में सरकार ने कहा कि अदालत का हालिया आदेश एससी व एसटी समुदाय के लोगों के मौलिक अधिकार के विपरीत है। केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट से कहा कि पुनर्विचार याचिका पर सुनवाई ओपन कोर्ट में होनी चाहिए और सरकार को मौखिक पक्ष रखने का मौका मिलना चाहिए। मालूम हो कि पुनर्विचार याचिका पर सुनवाई आमतौर पर जज चैंबर में होती है।

यह है सुप्रीम कोर्ट का फैसला

हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने एससी/एसटी एक्ट 1989 में सीधे गिरफ्तारी पर रोक लगाने का फैसला किया था। कोर्ट ने कहा था कि एससी/एसटी एक्ट के तहत दर्ज मामलों में तुरंत गिरफ्तारी की जगह शुरुआती जांच हो। केस दर्ज करने से पहले डीएसपी स्तर का अधिकारी पूरे मामले की प्रारंभिक जांच करेगा और साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने ये भी कहा था कि कुछ मामलों में आरोपी को अग्रिम जमानत भी मिल सकती है। दलितों की मांग है कि कानून में इस बदलाव को वापस लिया जाए।

 

 

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