पीसीएस 2013: सीबीआई ने पकड़ा गोलमाल

सुहासिनी जैसा यह तीसरा प्रकरण

 इलाहाबाद

UPPCS 2013: लोक सेवा आयोग की पीसीएस 2013 परीक्षा में अनियमितता का एक बड़ा मामला उजागर हुआ है। अभिहित अधिकारी पद के लिए सफल एक अभ्यर्थी को असफल कर दिया गया जबकि उसको इस पद के लिए निर्धारित कटऑफ से 60 अंक ज्यादा मिले थे। हाईकोर्ट की दखल पर भर्ती का अंतिम परिणाम घोषित होने के बाद उसका इंटरव्यू करवाया गया फिर अंतिम तौर पर असफल कर दिया गया।

लखनऊ के इस अभ्यर्थी, जिसने अपना नाम गोपनीय रखा है, की शिकायत पर सीबीआई ने मामले की जांच शुरू कर दी है। पीसीएस 2013 में अभिहित अधिकारी के 37 पद थे। यह पद विशेष शैक्षिक अर्हता वाला है। इसके लिए केमेस्ट्री के साथ एमएससी या समकक्ष योग्यता जरूरी होती है। लखनऊ के अभ्यर्थी को पीसीएस प्री 2013 में एक्जीक्यूटिव ग्रुप में सफल किया गया पर अभिहित अधिकारी के लिए असफल कर दिया है जबकि एक्जीक्यूटिव ग्रुप की मेरिट अभिहित अधिकारी की मेरिट से अधिक थी। अभ्यर्थी ने पहले आयोग में अपील की कि वह अभिहित अधिकारी पद की योग्यता रखता है इसलिए उसे इस पद के लिए भी सफल किया जाए लेकिन आयोग ने उसकी नहीं सुनीं तो उसने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर दी।

हाईकोर्ट के आदेश पर उसे इस पद के लिए भी सफल किया गया। अभ्यर्थी ने पीसीएस 2013 की मुख्य परीक्षा दी, जिसमें वह असफल हो गया। अंतिम परिणाम घोषित होने के बाद जब आयोग ने पीसीएस 2013 का कट ऑफ और मार्कशीट जारी की तो अभ्यर्थी यह देखकर दंग रह गया कि उसे अभिहित अधिकारी पद के लिए निर्धारित कट ऑफ से 60 नंबर ज्यादा मिले थे। उसने फिर आयोग में प्रार्थना पत्र दिया लेकिन उसकी नहीं सुनी गई तो उसने हाईकोर्ट में याचिका की।

हाईकोर्ट की फटकार के बाद आयोग ने उसे इस पद के लिए सफल करते हुए अकेले उसका इंटरव्यू करवाया और अंतिम तौर पर उसे असफल कर दिया गया। अभ्यर्थी का आरोप है कि उसने आरटीआई के तहत कई बार आवेदन किया लेकिन उसे आज तक नहीं बताया गया कि उसे इंटरव्यू में कितने अंक मिले थे। वहरहाल, इस प्रकरण के सामने आने के बाद अब अभिहित अधिकारी का पूरा चयन ही सवालों के घेरे में आ गया है।

सीबीआई सूत्रों का कहना है कि मंगलवार की दोपहर पीसीएस अफसरों से पूछताछ छोड़कर सीबीआई टीम जिन प्रकरणों की छानबीन के लिए आयोग गई थी, उसमें एक प्रमुख प्रकरण यह भी था। सीबीआई ने आयोग के अफसरों से इस बारे में जानकारी मांगी तो जवाब दिया गया कि अभिहित अधिकारी का पद दिव्यांग के लिए आरक्षित था इसलिए उसे सफल नहीं किया गया था। फिर सीबीआई ने सवाल किया कि जब अभ्यर्थी ने हाईकोर्ट में याचिका की तो वहां यह क्यों नहीं बताया गया कि पद दिव्यांग के लिए आरक्षित था, अभ्यर्थी जब पद के योग्य नहीं था तो उसका इंटरव्यू क्यों करवाया गया? अफसर इस प्रश्न का जवाब नहीं दे सके। सीबीआई को पता चला है कि पीसीएस 2013 सामान्य चयन के साथ जिन 13 पदों पर दिव्यांगों के विशेष चयन हुआ था, उसमें अभिहित अधिकारी नहीं था। 13 में पांच पद डिप्टी कलेक्टर, छह पद नायाब तहसीलदार और चार पद कोषाधिकारी/लेखाधिकारी के थे। फिर भी आयोग के अफसरों के कथन की सत्यता जांचने के लिए सीबीआई इस बारे में कार्मिक विभाग से जानकारी मांग रही है कि पीसीएस 2013 में अभिहित अधिकारी का पद दिव्यांगों के लिए था या नहीं।

यह प्रकरण पीसीएस 2015 मेन्स की अभ्यर्थी रही सुहासिनी बाजपेई से मिलता जुलता है। सुहासिनी की मुख्य परीक्षा की कॉपी को बदल कर पास रहते हुए भी फेल कर दिया गया था। पिछले वर्ष विधानसभा चुनाव के दौरान सामने आए इस प्रकरण का जिक्र वाराणसी की एक चुनावी सभा में करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आयोग की कार्य प्रणाली पर कटाक्ष किया था। सीबीआई ने इसी तरह का एक प्रकरण बीते फरवरी में भी पकड़ा था। जिसमें गाजीपुर की महिला अभ्यर्थी को आरओ-एआरओ भर्ती 2013 में कट ऑफ से सात नंबर ज्यादा मिलने के बाद भी चयनित न करने का आरोप है।

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