आसाराम को उम्रकैद

आसाराम ने खड़ा किया 10,000 करोड़ रुपये का साम्राज्य

सूरत में भी आसाराम पर चल रहा बलात्कार का मामला

नई दिल्ली।

आसाराम को एक नाबालिग लड़की से बलात्कार के मामले में दोषी करार देते हुए अदालत ने आज उसे उम्रकैद की सजा सुनायी। एक साल के भीतर यह दूसरा मामला है जब किसी बाबा को बलात्कार के मामले में दोषी करार दिया गया है। पिछले साल अगस्त में गुरमीत राम रहीम को भी यौन उत्पीड़न के मामले में दोषी करार दिया गया था। जेल में आसाराम को कैदी नंबर 130 मिला है।

 

यौन उत्पीड़न, मुख्य तौर पर नाबालिग से बलात्कार करने के बिंदुओं पर जिरह के बाद विशेष न्यायाधीश मधुसूदन शर्मा ने जोधपुर सेंट्रल जेल परिसर में अपना फैसला सुनाया। 77 वर्षीय आसाराम यहां चार साल से अधिक समय से बंद है। अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति मामलों की विशेष अदालत ने दो अन्य आरोपियों शिल्पी और शरद को भी दोषी करार दिया और अन्य दो प्रकाश और शिव को रिहा कर दिया।पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, अदालत ने आसाराम को उम्रकैद और अन्य दो आरोपियों को 20-20 साल की सजा सुनायी है। इससे पूर्व कड़ी सुरक्षा के बीच जेल परिसर में सजा की अवधि पर जिरह की गई। राजस्थान उच्च न्यायालय ने निचली अदालत को जोधपुर सेंट्रल जेल परिसर में फैसला सुनाने का आदेश दिया था।

साबरमती नदी के किनारे एक झोंपड़ी से शुरुआत करने से लेकर देश और दुनियाभर में 400 से अधिक आश्रम बनाने वाले आसाराम ने चार दशक में 10,000 करोड़ रुपये का साम्राज्य खड़ा कर लिया था। आसाराम और शिव, शिल्पी, शरद और प्रकाश के खिलाफ पॉक्सो अधिनियम, किशोर न्याय अधिनियम और भादंवि की विभिन्न धाराओं के तहत छह नवंबर 2013 को पुलिस ने आरोपपत्र दायर किया था।

पीड़िता ने आसाराम पर उसे जोधपुर के नजदीक मनाई इलाके में आश्रम में बुलाने और 15 अगस्त 2013 की रात उसके साथ बलात्कार करने का आरोप लगाया था। उत्तर प्रदेश के शाहजहांपुर की रहने वाली पीड़िता मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा स्थित आसाराम के आश्रम में पढ़ाई कर रही थी। फैसले के बाद पीड़िता के पिता ने कहा, हमें न्यायपालिका पर पूरा भरोसा था और हमें खुशी है कि न्याय मिला। उन्होंने कहा कि परिवार लगातार दहशत में जी रहा था और इसका उनके व्यापार पर भी काफी असर पड़ा। फैसले के मद्देनजर जोधपुर जेल के आसपास सुरक्षा कड़ी कर दी गई थी जहां पहले से निषेधाज्ञा लागू है।

कानून एवं व्यवस्था बनाए रखने के मद्देनजर केन्द्र ने राजस्थान, गुजरात और हरियाणा सरकारों से सुरक्षा कड़ी करने और अतिरिक्त बल तैनात करने को कहा था। तीनों राज्यों में आसाराम के बड़ी संख्या में अनुयायी हैं। केंद्रीय गृह मंत्रालय का यह परामर्श डेरा सच्चा सौदा के प्रमुख गुरमीत राम रहीम को पिछले साल अगस्त में बलात्कार के मामले में सजा सुनाए जाने के बाद हरियाणा, पंजाब तथा चंडीगढ़ में बड़े पैमाने पर हुई हिंसा के मद्देनजर भेजा गया था। उस समय हुई हिंसा में 13 लोग मारे गए थे।

अदालत ने वर्ष 2002 के बलात्कार के एक मामले में रहीम को 20 साल की सजा सुनाई थी। आसाराम मामले में अंतिम सुनवाई अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति मामलों की विशेष अदालत में सात अप्रैल को पूरी हो गई थी और फैसला 25 अप्रैल तक के लिए सुरक्षित रखा गया था। आसाराम को इंदौर से गिरफ्तार कर एक सितंबर 2013 को जोधपुर लाया गया था और दो सितंबर 2013 से वह न्यायिक हिरासत में है। आसाराम पर गुजरात के सूरत में भी बलात्कार का एक मामला चल रहा है जिसमें उच्चतम न्यायालय ने अभियोजन पक्ष को पांच सप्ताह के भीतर सुनवायी पूरी करने का निर्देश दिया था।

आसाराम ने 12 बार जमानत याचिका दायर की, जिसे छह बार निचली अदालत ने, तीन बार राजस्थान उच्च न्यायालय और तीन बार उच्चतम न्यायालय ने खारिज किया।

कब क्या हुआ

– 15 अगस्त 2013 : उत्तर प्रदेश के शाहजहांपुर की एक किशोरी के साथ जोधपुर के मनाई आश्रम में बलात्कार किया गया।
– 19 अगस्त : नई दिल्ली के कमला नेहरू नगर थाने में एफआईआर दर्ज की गई।
– 20 अगस्त : पीड़िता का मेडिकल परिक्षण कराया गया।
– 21 अगस्त : नई दिल्ली से केस जोधपुर स्थानांतरित किया गया।
– 26 अगस्त : आसाराम को समन जारी किया गया।
– 27 अगस्त : लुकआउट नोटिस हुआ।
– 30 अगस्त : आसाराम ने 20 दिन की मोहलत मांगी।
– 30 अगस्त : पुलिस की ओर से डेडलाइन खत्म।
– 31 अगस्त : पुलिस रात 12 बजकर 26 मिनट पर इंदौर आश्रम में घुसी।
– 1 सितंबर 2013 : आसाराम को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया और उन्हें जोधपुर जेल शिफ्ट कर दिया गया।

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