बलिया में खटारा वाहनों पर जा रहे हैं स्कूली बच्चे

जांच करायी जाये तो स्कूली वाहन को अप्रशिक्षित चालक चलाते मिलेंगे

हादसा होता है तो जागता है प्रशासन,परिजनों को होना होगा जागरूक

पिन्टू सिंह
रसड़ा।

बलिया जनपद में 1000 विद्यालय कागजों पर चल रहे हैं ,मगर अॅान लाइन मान्यता वाले केवल 40 ही ऐसे विद्यालय हैं जिन्हें अच्छे विद्यालयों के दर्जे में आता है। स्कूल जाने वाले वाहनों में बच्चे कितने सुरक्षित हैं इससे अभिभावक भी बेपरवाह रहते हैं। बच्चों के स्कूली वाहनों में इस समय खटारा बस, मैजिक एवं टैम्पू हैं जो पूरी तरह से आरटीओ के मानक पर खरे नहीं उतरते। बिना प्रशिक्षित वाहन चालकों के हवाले लोग अपने मासूमों को कर रहे हैं। स्कूल तक का सफर कितना सुरक्षित है, इस बात से बेखबर लोग तब जागते हैं जब उनके नौनिहालों के साथ कोई बड़ा हादसा होता है। बलिया जनपद में कुछ विद्यालयों को छोड़ दिया जाये तो अधिकांश विद्यालयों में खटारा वाहन के साथ अप्रशिक्षित चालक बच्चों को स्कूल ले जा रहे हैं।
जब दुर्घटना होती है तो स्कूल प्रबंधन सहित पुलिस- प्रशासन भी कुछ दिनों तक सक्रिय दिखते है, उसके बाद सब कुछ पुराने ढर्रे पर चलने लगता है।

देश के भविष्य की जान हमेशा सासंत मे फं सी रहती है। बच्चों के सहारे शिक्षण संस्थान वाले लाखों रुपए कमाने के बाद भी इनकी सुरक्षा को ताख पर पर रख देते हंै। बच्चों की सलामती इसी में है कि स्कूल प्रबंधन पैसा को तब्वजो देने के बजाय बच्चों का जान जोखिम में न डाले। पुलिस- प्रशासन भी समय – समय पर स्कूली वाहनों व स्कूलों पर ध्यान दें तो निश्चित रुप से स्कूली वाहनों से होने वाली दुघर्टनाओं को रोकने में सफ ल हो सकते हैं।
सवाल यह है कि आखिर परिजन अपने बच्चों को खटारा वाहनों से क्यों भेजते हैं? क्या किसी ने यह जानने की कोशिश की है कि जिन वाहनों से अपने जान के टुकड़े को स्कूल भेजते हैं,उस वाहन चालक का किसी ने ड्राइविंग लाइसेंस चेक किया? क्या किसी ने गाड़ी के फिटनेश के कागजात देखने की जहमत उठायी है या फिर वाहन चलाते समय जब चालक हेड फोन लगाता है तो उसका विरोध किया? मुझे लगता है अधिकांश लोगों का जवाब ना ही होगा,लेकिन अब परिजनों को अपने बच्चों को सुरक्षित स्कूल भेेजना है तो इन बातों की परख करनी होगी।

ताजा मामला उत्तर प्रदेश के कुशीनगर दुदुई रेलवे स्टेशन के नजदीक मानव रहित क्रासिंग पर गुरुवार कि सुबह बच्चों से भरी वैन एक पैसेंजर ट्रेन की चपेट में आने कारण 13 बच्चों की मौत हो गयी व पांच बच्चों कि हालत गंभीर है । इस हादसे में वैन चालक की भी मौत हो गई है। उत्तर पूर्व रेलवे, एनईआर के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी संजय यादव ने बताया कि मानवरहित रेलवे क्रासिंग पर एक मानव रहित क्रासिंग मित्र तैनात था जिसने वैन ड्राइवर को रोकने की कोशिश की लेकिन उसने बात अनसुनी कर दी। चालक ने क्रासिंग पार करने की कोशिश की तभी बच्चों से भरी वैन बीच पटरी पर अचानक पहुंच गयी और और दर्द्रनाक हादसा हो गया। वहीं इस हादसे के बाद स्थानीय ग्रामीणों की भीड़ ने जमकर हंगामा किया। आनन- फ ानन में प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी घटना स्थल का जायजा लेने पहुंचे । सीएम के पहुंचने से पहले वहां काफ ी भीड़ जमा थी। सीएम योगी ने पूरे मामले की जांच की बात कही है। दूसरी तरफ , रेलवे ने अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ लिया है। सीएम योगी ने मीडिया से बात करते हुए इस हादसे के लिए स्कूल के प्रबंधन व चालक को जिम्मेदार ठहराया है।

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