ड्राविंग के दौरान मोबाइल फोन व इयरफोन लगाने पर रद्द होगा लाइसेंस – डीजीपी

एक वर्ष में दो बार से अधिक ट्राफिक नियमों का उल्लंघन करने वाले चालक नहीं चला सकेगें स्कूली वाहन

राजधानी के चालक नियम पालन करने में अव्वल

लखनऊ।

एक वर्ष में दो बार से अधिक ट्रॉफिक नियमों का उल्लंघन करने वाले चालकों को स्कूली वैन चलाने की अनुमति नहीं दी जायेगी। स्कूली वाहन चलाने के दौरान मोबाइल फोन और इयरफोन का इस्तेमाल करने पर ड्राइविंग लाइसेंस होगा रद्द। पिछले दिनों कुशीनगर में हुए स्कूल वैन हादसा व प्रदेश के अन्य इलाकों में हुए हादसों के मद्देनजर प्रदेश पुलिस मुखिया ने स्कूली वैन चालकों पर शिकंजा कसने के लिए मातहतों को निर्देश दिए हैं। उन्होंने कई बिन्दुओं का पालन करते हुए 15 दिनों तक अभियान चलाने के आदेश दिए हैं।

 

प्रदेश पुलिस प्रवक्ता ने बताया कि डीजीपी ने लिखित रूप से प्रदेश के तमाम जिलों के पुलिस कप्तानों को निर्देशित किया है। उन्होंने बताया कि 1 वर्ष में दो बार से अधिक लाल बत्ती के उल्लंघन, अनुचित पार्किंग, ओवरटेकिंग एवं किसी अनधिकृत व्यक्ति को वाहन चलाने की अनुमति देने के सबन्ध में चालान हुआ हो अथवा ओवर स्पीडिंग, नशे में वाहन चलाने और खतरनाक ढंग से वाहन चलाने के सबन्ध में मुकदमा दर्ज हुआ हो, ऐसे चालकों को स्कूली वाहन चलाने की अनुमति नहीं दी जायेगी।

किसी भी स्कूली वाहन में निर्धारित क्षमता से अधिक बच्चों को न बैठाया जाये तथा किसी बच्चे को किसी अन्य की गोद में न बैठने दिया जाये। स्कूली वाहनों में पीने योग्य पानी की सुविधा उपलब्ध होनी चाहिये। आवश्यकतानुसार सीट बेल्ट उचित ढंग से लगाया जाये। प्रत्येक स्कूली वाहन पर स्कूल का नाम, टेलीफोन नंबर तथा चालक का नाम, पता, ड्राइविंग लाइसेन्स नबर व मोबाइल न बर अवश्य दर्शाया जाये।स्कूली वाहनों पर परिवहन विभाग, पुलिस विभाग के हेल्प लाइन नंबर अवश्य अंकित किये जायें। स्कूली वाहनों को चलाने वाले चालकों कम से कम पांच वर्षों का वाहन चलाने का अनुभव हो। भाड़े के वाहनों का इस्तेमाल करने पर वाहन स्वामी स्थानीय पुलिस थाने के प्रभारी अधिकारी को वाहन के चालक का विवरण उपलब्ध कराया जाये।

वाहनों से उतरते व चढ़ते समय परिचालक का उपस्थित होना अनिवार्य हो। स्कूली वाहनों में आईएसआई मार्क के आग बुझाने वाले दो सिलेण्डरों का होना अनिवार्य हैं। चालक, कन्डक्टर व अटेन्डेन्ट का चरित्र सत्यापन अवश्य कराया जाना चाहिये। स्कूली वाहन के चालक द्वारा निर्धारित गति से तेज वाहन न चलाया जाये।वाहन चलाने के दौरान मोबाइल फोन और इयरफोन का इस्तेमाल न किया जाये। पकड़े जाने पर आरोपित के खिलाफ विधिक कार्रवाई की जाये और उनका लासेन्स निरस्त किया जाये। स्कूली वाहनों का अनाधिकृत एलपीजी किट लगाकर संचालन न होने दिया जाये।

डीजीपी ने मातहतों को उक्त बिन्दुओं को ध्यान में रखते हुए समय-समय पर आकस्मिक चैकिंग अभियान चलाने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने अभियान के दौरान परिवहन विभाग और विद्यालयों के प्रबन्धकों व सिविल सोसाइटी से सहयोग करने का आग्रह किया है साथ ही मातहतों से प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से किसी का उत्पीडऩ नहीं किये जाने की अपेक्षा की है।डीजीपी के निर्देश पर 1 मई से चल रहे 15 दिवसीय अभियान के दौरान प्रदेश भर में हजारों की संख्या में वाहन चेक किए गए है। अभियान के दौरान सैकड़ों वाहन और चालकों के खिलाफ कार्रवाई की गई है। पुलिस आंकड़ों की माने तो राजधानी में स्कूली वाहन चालक नियमों का सबसे अधिक पालन करते हैं, जबकि गोरखपुर के स्कूली वैन चालक नियमों की धज्जियां उड़ाने में अव्वल हैं। प्रदेश पुलिस प्रवक्ता ने बताया कि मेरठ जोन में 3092 वाहन चेक किये गये, जिनमें से 262 वाहनों के विरूद्व कार्यवाही की गयी। कुल 1343 चालकों, परिचालकों के सत्यापन की कार्यवाही की गयी।

 

 

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