यूपी समेत भारत के कई हिस्सों में तूफान से 10 लोगों की मौत, कई जख्मी

नई दिल्ली

ब्रज में एक बार फिर बवंडर का कहर बरपा। बुधवार की देर शाम करीब आधे घंटे तक आई आंधी, बारिश और ओलावृष्टि में यहां 9 लोगों की मौत हो गई। इनमें मथुरा में 3, आगरा में 2 और अलीगढ़, हाथरस, फिरोजाबाद और एटा में एक-एक मौत हुई है। इसके अलावा करीब दो दर्जन लोग घायल बताए जा रहे हैं। वहीं असम में भी एक व्यक्ति के मारे जाने की खबर है। मथुरा में आंधी, बारिश और ओलावृष्टि से दो महिला समेत तीन की मौत हो गई। टैंटीगांव में आंधी से टूटे बिजली खंभे की चपेट में आकर 55 वर्षीया शकुंतला पत्नी छैलसिंह की मौत हो गई। जबकि गांव खंजरा वास में आंधी से ट्रैक्टर-ट्रॉली पलटने से 38 वर्षीय भगवती निवासी झंडा मरहला की मौत हो गई। वहीं मुखत्यारी पत्नी रामस्वरूप निवासी छौली, बल्देव भी बिजली के खंभे की चपेट में आकर घायल हो गई थीं। इनकी अस्पताल में मौत हो गई। इसके अलावा राया के गांव ककरेटिया में स्कूल की दीवार गिरने से 50 वर्षीय गुल्लड़, शेरगढ़ के गांव धींमरी में ओलों से फौजी युवक के सिर में चोट आ गई।

आगरा में अंधड़ से शहर और देहात क्षेत्र के तमाम बाजार बंद हो गए। देहात में कई जगह ओले गिरे और बारिश हुई। 66.5 किलोमीटर प्रतिघंटे की रफ्तार से आए अंधड़ में एत्मादपुर में दो की जान चली गई। वहीं खंदौली ब्लाक में तीन बच्चे घायल हुए हैं। फिरोजाबाद में ओमनगर में रमेश चंद्र जोशी (48) पुत्र जगदीश चंद्र घर से बाहर गया था। तभी तेज आंधी में बिजली के पोल से टकरा गया और उसकी मौके पर ही मौत हो गई। वहीं जिलेभर में कई विद्युत पोल टूटे हैं। मकान गिरे हैं और टिनशेड उड़कर गिर गईं।

एटा के थाना बागवाला के गांव लोहाखार निवासी गोविंद (10) पुत्र अरविंद मंगलवार रात परिवारीजनों के साथ छत पर सो रहा था। रात में अचानक आंधी आई। नीचे उतरने की जल्दी में वह छत से गिर गया। गंभीर रूप से घायल अवस्था में उसे अस्पताल ले गए, जहां उसे मृत घोषित कर दिया गया। वहीं अलीगढ़ के इगलास में अनीता पत्नी धर्मेंद्र और हाथरस में एक किशोर भूपेंद्र भी आंधी का शिकार बने। वहीं मैनपुरी और कासगंज में आंधी और ओलावृष्टि की सूचना है। इससे फसलों को नुकसान बताया जा रहा है, लेकिन अभी तक किसी जनहानि की खबर नहीं है।

आगरा में ब्लैक आउट
देर शाम आई तेज आंधी, बारिश और ओलावृष्टि से आगरा में ब्लैक आउट की स्थिति बन गई है। अधिकांश इलाकों में बिजली गुल बताई जा रही है। इसके अलावा मथुरा, फिरोजाबाद, मैनपुरी, एटा और कासगंज में भी कई इलाकों में बिजली गुल होने की खबर है।

उत्तर भारत में असामान्य तापमान से धूल भरी आधियां बढ़ीं

उत्तर भारत में तापमान में असामान्य बढ़ोत्तरी से धूल भरी आंधियों की संख्या में बढ़ोत्तरी हो रही है। साथ ही इनका विकरालता भी बढ़ रही है। वैज्ञानिकों का मानना है कि आने वाले समय में इनकी संख्या में और बढ़ोत्तरी हो सकती है। उत्तर-पश्चिमी राज्यों में तापमान में बढ़ोत्तरी अन्य हिस्सों से ज्यादा हो रही है। दूसरे, दीर्घावधि में इसका जलवायु पर भी प्रतिकूल असर पड़ सकता है।

मौसम विभाग के महानिदेशक डा. के. जे. रमेश के अनुसार उत्तर भारत ही नहीं दुनिया के उन तमाम हिस्सों में जहां जलवायु गर्म और शुष्क है, वहां आंधी-तूफान बढ़ रहे हैं। उत्तर भारत में यही आंधी-तूफान धूल भरी आंधियों में तब्दील हो रहे हैं। इसके कई कारण हैं। एक राजस्थान की तरफ से हवाएं आती हैं जिसमें रेगिस्तानी मिट्टी उड़कर आ जाती है। दूसरे, उत्तर पश्चिमी भारत में कृषि कार्य होने की वजह से इस मौसम में खेत खाली रहते हैं जिससे मिट्टी उड़ती है। फिर, निर्माण की गतिविधियां तेज होने की वजह से भी धूल-मिट्टी बहुत है। जब आंधी तूफान घड़ीनुमा गोलाई में उठता है तो यही धूल-मिट्टी ऊपर को उठती है जो धूलभरी आंधियों का स्थान ले लेती है।

सामान्य से ज्यादा जा रहा तापमान

पर्यावरण वैज्ञानिक मानस रे के अनुसार उत्तर भारत में यह देखा गया है कि तापमान सामान्य से डेढ़ डिग्री तक ज्यादा जा रहा है। जबकि देश के अन्य हिस्सों में यह बढ़ोत्तरी एक डिग्री से नीचे है। इसका नतीजा यह है कि जिन पॉकेट्स में यह बढ़ रहा है, वहां आंधी तूफान ज्यादा उत्पन्न हो रहे हैं। इनकी अब पुनरावृत्ति जल्दी-जल्दी हो रही है। दायरा और तीव्रता बढ़ रही है। धूल भरी ये आंधियां जब शांत होती हैं तो कई बार बारीक धूलकण वायुमंडल में जमे रह जाते हैं।

धूल की परत छाने से जलवायु पर असर 

ग्रीन पीस के शोधकर्ता सुनील दहिया के अनुसार उत्तर पश्चिम भारत के ऊपर सर्दियों में धूल की परत बन जाती है। जबकि गर्मियों में धूल भरी आधियों से लोगों की मुश्किलें बढ़ रही हैं। सिर्फ बरसात में ही आसमान साफ रहता है। वे कहते हैं कि उत्तर-पश्चिम भारत पर धूल की परत छाने से जलवायु पर असर पड़ रहा है। इससे न्यूनतम औसत तापमान में भी बढ़ोत्तरी होती है जिसका प्रभाव रात्रि के तापमान में बढ़ोत्तरी के रूप में पड़ता है। दूसरे, सर्दियों में धूल की परत धूप को धरती पर नहीं पहुंचने देती है जिससे सर्दी ज्यादा पड़ सकती है।

आंकड़े दर्ज करने की योजना

एनडीएमए और मौसम विभाग आंधी-तूफान की घटनाओं को दर्ज करने की योजना बना रहे हैं। अभी तक इन्हें दर्ज नहीं किया जाता है। इसलिए सटीक आंकड़े नहीं हैं। अभी सिर्फ उन्हीं आंधी-तूफानों का ब्योरा रखा जाता है जिनकी गति तेज होती है।

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