भाजपा सरकार में डीजी सूर्य शुक्ला ने की सीएम की तौहीन,3 वर्ष से कम तैनाती वाले नौ कमांडेंट का हुआ तबादला

भाजपा सरकार में डीजी सूर्य शुक्ला ने की सीएम की तौहीन

मंत्री करे लिहाज, डीजी ने खेली वसूली की लंबी पारी

 तीन वर्ष तय करने वाले कमांडेंट को डीजी ने दिया लालीपॉप

संजय पुरबिया

लखनऊ।

उत्तर प्रदेश में सरकार किसी की हो लेकिन हुकूमत सिर्फ नौकरशाहों की ही चलती है। पिछली सपा सरकार में जहां आईपीएस का दबदबा रहा वही दृश्य भाजपा सरकार में भी देखने को मिल रहा है। इन अफसरों के लिए शासन का आदेश इसलिए भी मायने नहीं रखता क्योंकि अधिसंख्य माननीय ‘स्वयं ‘ का विवेक कम और नौकरशाहों पर पूरी तरह से निर्भर रहते हैं। होमगार्ड विभाग के मंत्री अनिल राजभर भी इन्हीं माननीयों में से एक हैं। वे पूरी तरह से मुख्यालय के अफसरों के इशारे पर चलते हैं। मंत्री जी ने एक वर्ष की अवधि में एक भी ऐसा फरमान जारी नहीं किया जिससे अफसरों में मंत्री के सख्ती का खौफ देखने को मिले। मंत्री जी के संकोची स्वभाव का अफसरों ने भरपूर फायदा उठाया और एक वर्ष के दरम्यान एक नहीं कई भ्रष्टचारकिये जिससे मंत्री जी के ऊपर ही उंगलियां उठने लगीं। हद तो तब हुई जब होमगार्ड विभाग के डीजी सूर्य कुमार शुक्ला ने शासन के उस निर्देश की धज्जियां उड़ा दी जिसे एक तरह से सीएम ने ही जारी किया है। सूबे के सभी अफसरों को निर्देशित किया गया है कि समूह क एवं ख के वे अधिकारी जो तीन वर्ष से एक ही जिले या मंडल में तैनात हैं,उनका स्वेच्छा से तबादला कर दिया जाए। इसके लिए ऐसे अफसरों से उनका तीन वर्ष का ब्यौरा मांगने के साथ ही तीन स्वैच्छिक तैनाती स्थल भी मांगा गया लेकिन डीजी ने इस आदेश की ऐसी की तैसी कर दी। उन्होंने 9 मई को 16 जिला कमांडेंट का तबादला किया जिनमें से 9 कमांडेंट ऐसे हैं जिनका एक जनपद में तीन वर्ष का कार्यकाल पूरा हुआ ही नहीं।

खास बात तो ये है कि डीजी ने बरेली मंडल की कमांडेंट श्रीमती प्रीति शर्मा पर कुछ ज्यादा मेहरबान दिखें क्योंकि उन्हें मंडलीय प्रशिक्षण केन्द्र, बरेली से बरेली का ही जिला कमांडेंट बना दिया गया। डीजी साहेब अब आपसे सवाल तो बनता ही है… आखिर बरेली के कमांडेंट में आपको ऐसा क्या टैलेंट दिखा कि उनका तीन वर्ष भी पूरा नहीं हुआ और आपने बरेली ट्रेनिंग सेंटर से बरेली का ही जिला कमांडेंट आपने बना दिया? क्या तीन वर्ष पूरा कर चुके कमांडेंट जो इस तबादले के दावेदार बनते हैं, वे काबिल नहीं हैं? आपने ऐसे कमांडेंट को रामपुर जिले का चार्ज दे दिया जिस पर ए के 47 रखने और रेप का आरोप लगा है ? क्या रिटायरमेंट से पहले आपने तय कर लिया है कि इस विभाग को पूरी तरह से लूट कर ही जाएंगे? क्या आपने सुनियोजित तरीके से ऐसे अफसर को स्टॉफ अफसर टू कमांडेंट जनरल का चार्ज दिया जो आपके खिलाफ चूं भी ना कर सके और आप मनमाने तरीके से तबादला कर सके ?

आपने इलाहाबाद भर्ती घोटाले का खुलासा करने वाले जांबाज अधिकारी को ये चार्ज इसलिए नहीं दिया क्योंकि वो तबादला नीति के खिलाफ गलत फैसलों में आपका साथ नहीं देता? स्टॅाफ अफसर टू कमांडेंट जनरल का चार्ज शासन तय करता है लेकिन आपने प्रमुख सचिव को बताना उचित नहीं समझा और स्वयं ये चार्ज एक मंडलीय कमांडेंट को दे दिया? आखिर आपको तबादला करने की इतनी जल्दी क्या थी कि जिस दिन आपने मंडलीय कमांडेंट को चार्ज दिया उसी रात कमांडेंट का तबादला भी कर दिया? डीजी साहेब, अब आप ही बताएं, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के आदेश को रौंदकर आपने जिन 9 कमांडेंट्स का तबादला किया उनसे कितना रिश्वत ली है…

यूपी अपने आप में ही निराली है। भ्रष्टचार करो कुछ भी नहीं होगा, क्योंकि जांच बिठाई भी जाएगी तो उसे दबाने वाले बड़ा मुंह खोलकर पत्रावलियां दफन कर देंगे। ऐसा अधिसंख्य मामलों में होता रहता है। भाजपा सरकार बनने के बाद तो होमगार्ड विभाग में फर्जीवाड़ा करने वाले अफसरों की पौ-बारह हो गई है। होमगार्ड मंत्री अनिल राजभर को तो अफसरों ने उद्घाटन कराने और फीता काटने तक सीमित कर दिया है। मंत्री जी का संकोची स्वभाव और डीजी सूर्य कुमार शुक्ला का रिटायरमेंट, दोनों में बेचैनी देखने को मिल रहा है। मंत्री जी बेचैन हैं कि कैसे राजभर समाज को अपने पक्ष में करें,क्योंकि उनके सरकार के ही कैबिनेट मंत्री ओमप्रकाश राजभर ने उनकी नींद उड़ा रखी है, दूसरी तरफ, डीजी साहेब का रिटायरमेंट करीब है इसलिये वे भ्रष्टचार की सीमा की परवाह किए बगैर हर वो काम कर रहे हैं जिससे उन्हें चार पैसे की आमदनी हो। बिजली चोरी का प्रकरणजग जाहिर है। अब हम आपको बताते हैं सीएम के तबादला नीति का उन्होंने किस तरह से धज्जियां उड़ाकर माल कमाने की…

वर्ष 2018-19 में समूह ख संवर्ग के विभागीय राजपत्रित अधिकारियों व अराजपत्रित कर्मचारियों के वार्षिक स्थानांतरण के लिए एैच्छिक स्थानों का विकल्प मांगने के साथ ही उनका तीन वर्ष का एक ही जनपद व मंडल में कार्यकाल होना चाहिए। शासन के निर्देश पर 11 अप्रैल को स्टॉफ आफिसर टु कमांडेंट जनरल रामलाल वर्मा ने गोण्डा, सोनभद्र, इलाहाबाद, फतेहपुर, बलरामपुर, मैनपुरी, हाथरस,खीरी, बलिया, सिद्धार्थनगर,चंदौली, इटावा, झांसी, पीलीभीत, जौनपुर, रामपुर एवं रायबरेली के जिला कमांडेंट को मीटिंग के लिये (लखनऊ) होमगार्ड मुख्यालय बुलाया। पत्र में लिखा है कि शासनादेश संख्या 3-2018-1-3-96- का-4-2018 29 मार्च द्वारा सत्र 2018-19 से 2021-22 के लिये सरकारी अधिकारियों व कर्मचारियों के वार्षिक स्थानांतरण नीति निर्गत की गई है। उक्त स्थानांतरण नीति में यह व्यवस्था की गई है कि प्रशासनिक दृष्टिï से आवश्यकतानुसार स्थानांतरण किए जा सकेंगे एवं स्थान रिक्त होने या दूसरे अधिकारी व कर्मचारी के सहमत होने पर स्थानांतरण- समायोजन किया जा सकेगा। बशर्ते कि उस पर कोई प्रशासनिक आपत्ति न हो। जिलों में समूह क एवं ख के जो अधिकारी अपने सेवाकाल में कुल 3 वर्ष पूरी कर चुके हैं,को उक्त जिलों से स्थानांतरित कर दिया जाए।

पत्र में यह भी लिखा है कि किस जिले के कौन-कौन से जिला कमांडेंट जिलों में तीन वर्ष का कार्यकाल पूरा कर चुके हैं,जिनके नाम क्रमश: निम्र हैं-गोण्डा के कमांडेंट धर्मदेव मौर्य ने तीन वर्ष नौ माह,सोनभ्रद्र के कमांडेंट ज्योति कुमार रायजादा ने तीन वर्ष पंाच माह,इलाहाबाद के कमांडेंट प्रियव्रत सिंह ने तीन वर्ष (जो अब निलंबित कर दिए गए हैं) फतेहपुर के कमांडेंट मुन्नू लाल ने तीन वर्ष आठ माह,बलरामपुर के कमांडेंट विशम्भर प्रसाद मिश्रा का तीन वर्ष नौ माह,मैनपुर के कमांडेंट रविशंकर त्रिवेदी का तीन वर्ष,हाथरस के कमांडेंट अर्जुन प्रसाद का तीन वर्ष,डॉ.बृजेश कुमार मिश्र का तीन वर्ष, लखीमरपुर खीरी के कमांडेंट गुरशरण रावत का तीन वर्ष, सिद्धार्थनगर के कमांडेंट रमेश कुमार का तीन वर्ष,चंदौली के कमांडेंट सुनील कुमार तृतीय का तीन वर्ष,इटावा के कमांडेंट संजय कुमार शर्मा का तीन वर्ष,झांसी कमांडेंट अजय कुमार सिंह का तीन वर्ष,पीलीभीत कमांडेंट रमाकांत पाठक का तीन वर्ष, जौनपुर के कमांडेंट विनोद कुमार झा का तीन वर्ष,रामपुर के कमांडेंट मनोज सिंह बघेल का तीन वर्ष एवं रायबरेली के कमांडेंट रंजीत सिंह का तीन वर्ष कार्यकाल है। उक्त सभी कमांडेंट से उनके मन मुताबिक तीन एैच्छिक स्थानों का विकल्प मांगा गया।

खास बात यह है कि 9 मई को डीजी के स्तर से नई तबादला सूची जारी की गई है इनमें से तीन वर्ष पूरी करने वाले 7 कमांडेंट का ही तबादला किया गया है। इसके अलावा 9 ऐसे कमांडेंट का तबादला कर दिया गया जिनका कार्यकाल जिलों में तीन वर्ष से कम है। तीन वर्ष से कम कार्यकाल होने वाले कमांडेंट का नाम क्रमश: निम्र हैं-अतुल कुमार सिंह गौतम का संतकबीरनगर से प्रतापगढ़,श्रीमती प्रीति शर्मा का मंडलीय प्रशिक्षण केन्द्र ,बरेली से बरेली का कार्यभार दे दिया है। इसी तरह, अभिलेष नारायण सिंह का बरेली जिला कमांडेंट से बिजनौर,बृजेश कुमार मिश्र का मिर्जापुर से मं. प्र. केन्द्र, इलाहाबाद के अलावा कुंभ मेला का अतिरिक्त प्रभार, शैलेन्द्र प्रताप सिंह को मं. प्र. केन्द्र, इलाहाबाद से मिर्जापुर, अनिल कुमार यादव का कासगंज से बलिया, दिलीप कुमार यादव का प्रतापगढ़ से मं. प्र. केन्द्र, फैजाबाद,मार्कण्डेय सिंह का मं. प्र. केन्द्र, आजमगढ़ से चंदौली हैं।

बता दें कि 21 अप्रैल को कमांडेंट के तबादले में क्या रेट चलेगा इसका खुलासा ‘द संडे व्यूज़ डॉट कॉम‘ एवं ‘इंडिया एक्सप्रेस न्यूज डॉट कॉम’ ने ‘तबादले का माल अंदर डीजी गए मायानगरी’ एवं माल अंदर करने वाले अफसर हलकान, ट्रांसफर नहीं हुआ तो लौटाना पड़ेगा माल’ शीर्षक से खबरें प्रकाशित की थी। विभाग में हड़कम्प मचा और डीजी ने अचानक रातो-रात 9 मई को 16 कमांडेंट्स का तबादला कर दिया। खास बात यह है कि इस लिस्ट को जारी करने से पहले डीजी सूर्य कुमार शुक्ला ने तबादले के बाद रामलाल वर्मा स्टॉफ अफसर टु कमांडेंट जनरल की रिक्त (तबादला के बाद खाली हुई कुर्सी) जगह पर लखनऊ के मंडलीय कमांडेंट विवेक कुमार सिंह को बिठा दिया। श्री सिंह की गिनती सीधे-साधे अधिकारियों में की जाती है।

नियम की बात करें तो डीजी को इस पद पर किसी अधिकारी को तैनात करने का अधिकार है ही नहीं, क्योंकि क्लास वन एवं टू ऑफिसर का तबादला एवं कार्यभार लेने का अधिकार सिर्फ शासन को है ना कि डीजी को। कायदे से उन्हें शासन को रामलाल वर्मा के तबादले से अवगत कराना चाहिए, वहां से जिस अधिकारी की तैनाती का लिखित आदेश होता,उसे ही चार्ज देते। लेकिन, डीजी ने अपना तुगलकी फरमान जारी कर विवेक कुमार सिंह को श्री वर्मा का चार्ज दे दिया। कायदे से रिक्त पद पर सीनियर स्टॉफ आफिसर सुनील कुमार को बिठाना चाहिए लेकिन डीजी ने ऐसा नहीं किया। उन्हें मालूम था कि यदि ईमानदार एवं तेज तर्रार अधिकारी सुनील कुमार को लाते तो ट्रांसफर में फर्जीवाड़ा का खेल नहीं कर पाते। इससे साबित होता है कि डीजी की मंशा शुरू से रही कि किसी तरह ट्रांसफर में अपनी मनमानी कर लाखों रुपए अंदर कर लें जिसमें वे पूरी तरह से कामयाब भी हो गए हैं। मैं तो यही कहूंगा कि डीजी ने अपने विभाग के फीता काटने वाले मंत्री अनिल राजभर की नहीं बल्कि सूबे के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के आदेश की तौहीन की है। देखना है कि सरकार आखिर कब तक सूर्य कुमार शुक्ला पर मेहरबानी बरतेगा।

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