पूर्वांचल में प्रधानमंत्री आवास चोरी हो गया रे भाई …

पूर्व क्षेत्र पंचायत सदस्य मंजू सिंह ने की सीबीआई जांच की मांग

पिन्टू सिंह
रसड़ा,बलिया।

जरा सोचिए, प्रधानमंत्री आवास योजना में गरीबों को मिलने वाले आवास चोरी हो जाए तो कैसा लगेगा…। गरीब आवास की उम्मीदों में टकटकी लगाए बैठा हो और उसका आशियाना दलाल,साहूकार और इलाके के उन दबंगों के पास चला जाए तो इसके लिए पात्र हैं ही नहीं। इसे ही जोर का झटका धीरे से लगे,कहा गया है। अब सरकार भाजपा की और योजना प्रधानमंत्री की,उसमें भी नकारे अफसर घोटाले करने से बाज न आए तो हम-आप क्या कर सकते हैं। मेरे दिल की बात कोई सुने तो मैं यही कहूंगा कि भ्रष्टïचार जैसे महामारी में घुसे अफसरों पर कार्रवाई के बजाए सीधे जेल की सलाखों में भेज देना चाहिए। आपलोगों की सोच क्या है,मुझे नहीं मालूम लेकिन हां,गरीबों का निवाला,आवास की सुविधा छिनने वालों के खिलाफ कम से कम योगी सरकार को तो सख्ती से निपटना चाहिए। रसड़ा की पूर्व क्षेत्र पंचायत सदस्य मंजू सिंह ने इस घोटाले में सीबीआई जांच की मांग की है। हम बात कर रहे हैं रसड़ा ब्लॉक क्षेत्र के अंत्योदय गांव मंदा की…।

उत्तर प्रदेश सरकार की अति महत्वाकांक्षी अंत्योदय ग्राम समग्र विकास योजना में भी घोटाले की बू आ रही है। ये योजना जनपद में कितनी फ लीभूत हो रही है इसका अंदाजा चयनित गांवों को देखकर आसानी लगाया जा सकता है। यहंा पर चयनित किए गांवों में विकास के काम कागजों पर तेज रफ्तार से किए गए हैं। बलिया जिले के रसड़ा ब्लॉक क्षेत्र के अंत्योदय गांव मंदा में बुनियादी समस्याएं घटने के बजाय बढ़ती ही जा रही हैं। इस गांव में नाली, सड़क, शौचालय, पेयजल, बिजली, राशन कार्ड सहित अनेक समस्याएं इस कदर व्याप्त हैं कि लोगों के लिए परेशानी कम होने के बजाय बढ़ती ही चली जा रही है। अंत्योदय गांव चयनित होने के बाद पूर्व जिलाधिकारी सुरेंद्र विक्रम ने इस गांव में चौपाल लगाकर अफसरों को निर्देश दिए थे कि बुनियादी समस्याओं को दिलाने के अलावा विकास के कार्यो को तेज रफ्तार से निपटाए। बावजूद ग्राम प्रधान और प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा अब तक शायद ही कोई काम धरातल पर किया गया हो।  इस संबंध में पूर्व क्षेत्र पंचायत सदस्य श्रीमती मंजू सिंह ने कहा कि जन प्रतिनिधियों के उदासीन पूर्ण रवैये के कारण अंत्योदय गांव होने के बावजूद भी इस गांव में सड़क, बिजली, पेयजल, आवास आदि के लिए लोगों को जूझना पड़ रहा है।

इस संबंध से रसड़ा ब्लॉक के खण्ड विकास अधिकारी राम आशीष से द संडे व्यूज़ के रिपोर्टर ने सवाल किया कि रसड़ा ब्लॉक क्षेत्र के गावों मे कितने आवास बन गये है व कितने बनने बाकी हैं? इस पर उन्होंने बताया कि रसड़ा विकास खण्ड के 75 गावों मे प्रधानमंत्री योजना अंतर्गत 2300 आवास बनने थें जिसमे 1994 आवास बन गये हैं, 306 आवास बनने हैं। शेष बचे लाभार्थियों को 1,20 हजार रुपए के दर से सभी लाभार्थियों को पैसा मिल चुका है। फिर सवाल सवाल दागा कि 2300 आवास तो बन गए मगर किसी आवास पर प्रधानमंत्री योजना का नाम नहीं लिखा है? इस पर खण्ड विकास अधिकारी बगल झंाकते लगे और कहा कि सभी ग्राम विकास अधिकारियों को बता दिया गया है कि सभी आवासों पर प्रधानमंत्री आवास योजना का नाम लिखवा जरुरी है ।

रिपोर्टर ने रसड़ा ब्लॉक क्षेत्र के कई गावों में प्रधानमंत्री आवास योजना की सच्चाई जानने के लिए दौरा किया। गांवों मेे कुछ अलग ही तस्वीर देखने को मिली। सरकारी योजनाओं का लाभ तो हर कोई लेना चाहता है मगर अधिकारियों की गणेश परिक्रमा कर अपने खाते में धन को बंटरबाट कर सरकार के योजनाओं को धरातल पर धराशाई कर रहे हैं। मतलब साफ है कि जो अधिकारियों की मांग पूरी कर रहा है उसे आवास मिल गया। यानि, अधिसंख्य प्रधानमंत्री आवास योजना पात्रों के बजाय अपात्रों को दिया गया है। सवाल यह है कि उत्तर प्रदेश में जब प्रधानमंत्री सरकारी आवास योजना का ये हाल है तो अन्य योजनाओं के बारे में बताने की जरूरत नहीं समझता। अफसरों को तो बस माल चाहिए,योजना किसी की भी उससे उन्हें कोई वास्ता नहीं। यही वजह है कि लगभग सरकारी योजनाओं की बाट लग गई है।पूर्व क्षेत्र पंचायत सदस्य श्रीमती मंजू सिंह ने प्रधानमंत्री आवास योजना में दिए गए आवास की जांच सीबीआई से करानी की मांग की है, ताकि सच्चाई सबके सामेन आ जाए।

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