विधायक ने घोड़ों को दिया सम्मान, क्रांतिकारियों का किया अपमान

विधायक ने घोड़ों को दिया सम्मान, क्रांतिकारियों का किया अपमान

कं्रातिकारियों की मूर्ति को सम्मान मिलेगा तो युवाओं में सकारात्मक संदेश जाएगा : महंत कौशलेन्द्र गिरी

पिन्टू सिंह
रसड़ा, बलिया।

उत्तर प्रदेश में बलिया की पहचान क्रांतिकारियों के शहर के रूप में होता है। इस माटी ने कई क्रांतिकारियों को जना जिन्होंने देश की आजादी में अपना योगदान दिया। समय बदलता रहा लेकिन इस सरजमीं पर रहने वालों की सोच नहीं बदली। यहीं से देश के प्रधानमंत्री चंद्रशेखर से लेेकर ना जाने कितने काबिना मंत्रियों ने सत्ता के मंदिर तक पहुंचे। सरकारें बदलती रही और माननीयों के चेहरों के साथ-साथ शायद सोच में भी बदलाव देखने को मिला। रसड़ा तहसील में बसपा सरकार में विधायक रहे उमाशंकर सिंह ने शहर को खूबसूरत बनाने की सोची और कुछ ऐसा कर गए जिससे क्रांतिकारियों का शहर बलिया शर्मशार हो गया। रसड़ा शहर के बीचो-बीच उन्होंने एक चौराहा बनाया जिसका नाम चंद्रशेखर आजाद चौराहा रखा। चौराहे पर चंद्रशेखर जी की छोटी मूर्ति लगाई और उसके चारो तरफ विशाल घोड़ों की मूर्ति लगा दी। आज इस चौराहे की पहचान चंद्रशेखर नहीं घोड़ा चौराहे के नाम से पहचान बन गई है। लोग शर्मशार हैं, लेकिन करे भी तो क्या…। विधायक जी की माडर्न सोच ने सिर्फ क्रांतिकारी का ही नहीं बल्कि इस देश का अपमान करने का काम किया है। सबसे हैरत करने वाली बात तो ये है कि भाजपा की सरकार है,जो क्रांतिकारियों के सम्मान के लिये कई बेहतरीन काम कर रहे हैं लेकिन क्या उनकी चंद्रशेखर आजाद की उस मूर्ति पर नजर नहीं पड़ती जो चारो तरह से घोड़ों के बीच में दबी हुई है। काश! चंद्रशेखर जी को सम्मान दिलाने वाला कोई भाजपाई आगे आता…। इस मसले को श्रीनाथ मठ,रसड़ा के महंत कौशलेन्द्र गिरी ने गंभीरता से लिया है और कहा कि वे इस मुद्दे को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ तक पहुंचाएंगे।

बलिया में क्रंातिकारियों को सम्मान देने की प्रक्रिया पुरानी है लेकिन कुछ सरकारों में माडर्न सोच के विधायकों ने सम्मान करने का तरीका थोड़ा बेढंगा तरीके से निकाला है। रसड़ा विधान सभा क्षेत्र के विधायक उमाशंकर सिंह ने जब रसड़ा मार्केट में हिताकापुरा मोड़ स्थित एक चौराहे का नाम चंद्रशेखर आजाद चौराहा रखने की घोषणा की तो उनकी चहुंओर प्रशंसा हुई। लेकिन उन्होंने जिस कार्यदायी संस्था को काम सौंपा उसने चंद्रशेखर आजाद की आदम कद मूर्ति लगाने के बजाये चारो तरफ घोड़ों की विशाल मूर्ति लगा दी। चंद्रशेखर जी की छोटी मूर्ति लगाकर संस्था और विधायक ने तो बंदरबांट कर ली लेकिन ये नहीं सोचा कि ऐसा करने से वे क्रांतिकारियों का अपमान कर रहे हैं।उस चौराहे से कोई भी गुजरता है और सही राह पूछनी होती है तो वहां के बाशिंदे चंद्रशेखर आजाद चौराहा के बजाए घोड़ा चौराहे पर आने की बात करते हैं।

इसी तरह, थोड़ी दूर पर भगत सिंह चौराहा भी उन्होंने बनाया,जिसकी स्थिति भी बेहद खराब है। समझ में नहीं आता कि आखिर विधायक उमाशंकर सिंह को चौराहों का नाम क्रांतिकारियों के नाम से रखने की क्यों सूझी। जब चौराहों पर क्रांतिकारियों की मूर्ति लगानी थी तो उनका सम्मान भी करने तौर-तरीका भी सीखते। जब इतनी तहजीब विधायक जी में नहीं है तो इन चौराहों का नाम क्रांतिकारियों कीजगह घोड़ा,गदहा या किसी अन्य जानवरों के नाम से रखते। अब आपलोग ही तय करें कि उमाशंकर सिंह ने ऐसा कर क्रांतिकारियों का सम्मान कर रहे हैं या अपमान। इस बात को लेकर लोगों में आक्रोश है और राज्यपाल को पत्र लिखकर अपने गुस्से का इजहार किया है।

 

यहां पर रहने वाले बुजुर्गों एवं राष्ट्र मजदूर युवा कांग्रेस के कार्यकत्र्ताओं ने राज्यपाल के नाम तहसीलदार, रसड़ा को ज्ञापन सौंपा है। पत्र में कहा गया है कि नगर पालिका परिषद के पश्चिमी छोर पर बने चंद्रशेखर चौराहा पर बनी चंद्रशेखर आजाद की प्रतिमा को सुंदरीकरण के नाम पर कार्यदायी संस्था ने घोड़ों की प्रतिमा से ढक दिया है। लोगों का आरोप है कि चंद्रशेखर आजाद चौराहेके बजाय घोड़ा चौराहा के नाम से लोग अब इस चौराहे का जानने लगे हैं। लोगों ने मांग किया गया है कि चंद्रशेखर आजाद की 15 फ ीट की आदम कद प्रतिमा लगायी जाये और उसके चारों तरफ चंद्रशेखर चौराहा लिखवाया जाये। साथ ही भगत सिंह प्रतिमा जो दिन- रात धूप में तप रही है उसे भी छतरी लगाकर शहीदों का सम्मान बढाया जाये।

इस बारे में श्रीनाथ मठ,रसड़ा के महंत कौशलेन्द्र गिरी ने कहा कि विधायक ने तीनों चौराहे का असितत्व खत्म कर दिया है। सही कहा गया है कि इंसान की सोच पर सबकुछ निर्भर है। जो जैसा होगा वो वैसा ही सोचेगा और कार्य करेगा।।उन्होंने कहा कि जनप्रतिनिधि का कर्तव्य होता है कि वो विधान सभा में क्रांतिकारियों के अपमान का मुद्दा उठाए लेकिन ऐसा हो नहीं रहा। वे शीघ्र ही मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मिलकर उनके समक्ष इस मसले को रखेंगे।

 

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