केदारनाथ में हर दिन एक श्रद्धालु की जा रही जान, मौत की वजह चौंकाने वाली

तकलीफ होने पर नजदीक की स्वास्थ्य इकाई में जाएं 

इन बातों का रखें ध्यान 

रुद्रप्रयाग

केदारनाथ धाम की यात्रा शुरू हुए 18 दिन हो गए हैं। लगातार यात्रियों की संख्या में इजाफा हो रहा है। इस छोटी सी अवधि में 182166 तीर्थयात्री भगवान केदारनाथ के दर्शन भी कर चुके हैं। किंतु इस बार यात्रा मार्ग और केदारनाथ में यात्रियों की मौत का आंकड़ा बढ़ गया है। 18 दिन के भीतर 18 तीर्थयात्रियों की मौत हुई है। इस हिसाब से हर दिन एक यात्री की मौत हो रही है। यात्रियों के मौत की वजह चौंकाने वाली है।

उत्तराखंड में बदरीनाथ, केदारनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री चारधाम हैं। जिनकी यात्रा इस समय चल रही है। केदारनाथ धाम की यात्रा अन्य धामों की यात्रा से कुछ अलग है। इनमें से यमुनोत्री और केदारनाथ ऑक्सीजन की कमी सबसे बड़ी समस्या है। यमुनोत्री में हल्की ऑक्सीजन की कमी महसूस होती है, किंतु केदारनाथ धाम की विषम परिस्थितियां, ऊंचाई वाला मार्ग और समुद्र सतह से 11 हजार 7 सौ फीट की ऊंचाई यात्रियों के लिए सबसे बड़ी मुसीबत बनती है। केदारनाथ में सामान्य तौर पर ऑक्सीजन की कमी महसूस होती है। एक उम्र के बाद यह केदारनाथ जाने वाले हर व्यक्ति को महसूस होती है।

धार्मिक आस्था के चलते कई यात्री बीमार और असहाय होने के बावजूद केदारनाथ पहुंच जाते हैं, उन्हें यहां मुश्किलों का सामना करना पड़ता है। यही कुछ यात्रियों के मौत की वजह भी बनती है। 29 अप्रैल को केदारनाथ धाम के कपाट खोले गए हैं। तब से आज तक 18 दिनों में 18 तीर्थयात्रियों को ऑक्सीजन कमी और हार्ट अटैक के कारण जीवन गंवाना पड़ा हैं। मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. एसके ज्ञा ने बताया कि अधिक ऊंचाई होने के कारण यहां कुछ तकलीफें जरूर होती है, किंतु यात्री को यात्रा शुरू करने से पहले अपना स्वास्थ्य परीक्षण जरूर करवाना चाहिए। किसी गंभीर बीमारी या आपातकाल की स्थिति में उसे अपने स्वास्थ्य का भी ध्यान देना होगा।

स्वास्थ्य विभाग द्वारा तीर्थयात्रियों को 17 किमी पैदल मार्ग पर हर संभव मदद और स्वास्थ्य सेवाएं दी जा रही हैं। इधर, यात्रा मार्ग पर हर रोज हार्ट अटैक से मरने वाले यात्रियों की बढ़ती संख्या को लेकर प्रशासन भी चिंतित है। डीएम मंगेश घिल्डियाल ने केदारनाथ का निरीक्षण कर स्वास्थ्य सेवाएं चेक कीं। उन्होंने सभी सरकारी एमआरपी, सिक्स सिग्मा आदि की पड़ताल कर उनसे जबाब भी मांगा की आखिर यात्रियों की मौत क्यों हो रही है। उन्हें समुचित उपचार दिया जाए।

गरम एवं ऊनी वस्त्र साथ में अवश्य ले जाएं
स्वास्थ्य परीक्षण के उपरांत ही यात्रा के लिए प्रस्थान करें
हृदय, सांस, मधुमेह, उच्च रक्तचाप के रोगी सावधानी बरतें
ऊंचाई वाले क्षेत्रों में होने वाली बीमारियों से ग्रस्त रोगी भी विशेष को सावधानी बरतें
अपने चिकित्सक का परामर्श पर्चा और संपर्क नंबर साथ रखें
चिकित्सक द्वारा लिखी गई दवा को यात्रा के दौरान अपने साथ लाएं।
धूम्रपान और अन्य मादक पदार्थों के सेवन से परहेज करें।
यात्रा के दौरान पर्याप्त पानी पीएं और भूखे पेट न रहें। 

सीएमओ डॉ एसके ज्ञा ने बताया कि स्वास्थ्य विभाग ने जागरूकता के लिए हेल्थ एडवाइजरी भी जारी की है। इसमें यात्रियों को ऊंचाई वाले स्थान पर चलने, खान-पान, ठंड से बचाव आदि की अनेक तरीके बताए गए हैं। यह भी बताया कि ऑक्सीजन की कमी महसूस होते या अन्य किसी भी दिक्क्त पर शीघ्र स्वास्थ्य केंद्र में पहुंचे ताकि उसे जल्द उपचार मिल सके।

डॉ. झा ने यात्रियों से आग्रह किया है कि यात्रा के दौरान सांस फूलने, बेहोशी या चक्कर आने, सिरदर्द व घबराहट होने, दिल की धड़कन तेज होने, मितली, उल्टी आने व हाथ पांव व होंठों के नीले पड़ने पर नजदीक की स्वास्थ्य इकाई, चिकित्सा राहत केंद्र (एमआरपी) में तत्काल संपर्क करें। उपचार के बाद स्वस्थ महसूस करने पर ही आगे की यात्रा प्रारंभ करें।

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