बंगला बचाने के लिए मुलायम ने लगाया योगी को मस्का, योगी नहीं हुए ‘मुलायम’

 ये आपकी नहीं आवाम की सम्पत्ति है माननीय, इसे हड़पना छोड़ दें!

राजनाथ सिंह,कल्याण सिंह ने पेश की मिसाल: खाली करेंगे बंगला

सुप्रीम कोर्ट के एक्शन ने सरकारी बंगला हथियाने वाले आधा दर्जन एक्स सीएम की उड़ा दी नींद

संजय पुरबिया।
लखनऊ।

उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री बनने का दावा पेश करते ही 5 केडी का सरकारी बंगला सजने-संवरने लगता है। माननीयों को मालूम होता है कि 5 के डी पर बने आलीशान बंगला नंबर 5 मुख्यमंत्री को ही मिलता है। मुख्यमंत्री के नाम के आगे ‘पूर्व’ लगते ही वही बंगला नए सिरे से फिर से दुल्हन की तरह सजाया जाता है ताकि नए मुख्यमंत्री उस बंगले में गृह प्रवेश कर सकें। भव्य एवं खूबसूरत बंगले का मोह इतना घातक होता है कि जो एक बार मुख्यमंत्री बन जाता है, उसे छोडऩे का ख्वाब भी नहीं देखता। ‘पूर्व’ वाले मुख्यमंत्री को वीवीआईपी एरिया इतना रास आता है कि वे अगल-बगल या फिर आसपास के बंगलों को कब्जिया लेते हैं। बंगला के गेट पर ‘पूर्व मुख्यमंत्री’ लिखा लिया जिंदगी भर के लिए उनकी संपत्ति हो गई, लेकिन अब सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद सभी पूर्व मुख्यमंत्रियों को इस खूबसूरत बंगले को त्यागना है। जो बेहद कष्टïदाई है। ‘पूर्व’ वालों को ऐसा लग रहा है मानों उनके ‘सपने के आवास’ पर सरकार बुलडोजर चला रही हो। तभी तो पूर्व मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मिलने पहुंच गए। वे अपना एवं अपने बेटे के सपने का सरकारी घर बचाने के लिए योगी को मस्का तक लगा बैठें। योगी मुस्कराए लेकिन ‘मुलायम’ नहीं हुए। ईमानदारी की मिसाल करने वाले योगी ने जहां कोर्ट के आदेश का सम्मान किया वहीं पूर्व मुख्यमंत्री व केन्द्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह एवं पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह ने बंगला खाली करने की बात कहकर यह साबित कर दिया कि वे कोर्ट के फैसले का सम्मान करते हैं। वे सम्मान करते हैं आवाम का,जिनके दम पर आज वे सत्ता के शिखर तक पहुंचे है।

उत्तर प्रदेश में सुप्रीम कोर्ट के आदेश ने पूर्व मुख्यमंत्रियों की नींद उड़ा दी है। एक बार मुख्यमंत्री बनने के बाद मानों सरकारी आलीशान बंगला उनकी निजी संपत्ति हो गई हो। सरकार बदलते ही नए मुख्यमंत्री के आने के बाद ये लोग सीएम आवास के बगल के बंगले में कब्जा जमा लेते हैं। ऐसा लगता है मानों वे हार ना मानेंगे,पूर्व भले ही लग गया हो लेकिन रहेंगे सीएम आवास के आसपास। लेकिन सुप्रीम कोर्ट का एक आदेश यूपी ही नहीं अन्य राज्यों के लिए नजीर बन गई है। सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया है कि सभी पूर्व मुख्यमंत्रियों को 15 दिन के अंदर सरकारी आवास खाली करना होगा। इस आदेश ने आवाम की संपत्ति को अपना समझने वाले पूर्व मुख्यमंत्रियों को मानों सोते हुए बिस्तर पर उछाल दिया हो। सभी बेचैन हैं। विधिक सलाहकारों से इस आदेश के खिलाफ कोई काट ढूंढने के लिए राय ली गई तो कोई सरकार की जी हुजूरी करने में लगा है लेकिन आदेश सुप्रीम कोर्ट का है इसलिए किसी की एक न चली। भाजपा के सूत्रों ने बताया कि पूर्व मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मिलकर अपना और अपने बेटे अखिलेश यादव का सरकारी बंगला बचाने के लिए हर संभव प्रयास किया लेकिन योगी मुलायम नहीं हुए।

अभी सभी पूर्व सुप्रीम कोर्ट के आदेश की काट ढूंढ ही रहे थें कि केन्द्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह एवं पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह ने हमलोग अपना सरकारी बंगला खाली करेंगे,बयान देकर मुलायम, अखिलेश और बसपा सुप्रीमो मायावती की मुश्किलें और बढ़ा दी।राजनाथ सिंह ने तो 4 कालीदास का अपना सरकारी बंगला खाली करना शुरू कर दिया है। इतना ही नहीं,उन्होंने अपने पुत्र व विधायक पंकज सिंहके नाम पर 4 कालीदास वाले बंगले को आवंटित कराने से भी इंकार कर दिया है। राजनाथ सिंह गोमतीनगर के विपुल खण्ड स्थित 200 वर्ग मीटर के निजी आवास पर रहेंगे। उन्होंने बंगला खाली करने के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को बता दिया है। इसी तरह,2 माल एवेन्यू के अध्यासी व राजस्थान के राज्यपाल कल्याण सिंह ने भी बंगला खालीकरने की इच्छा जता दी है। कल्याण सिंह के ओएसडी अजय शंकर पाण्डेय ने बताया कि वे अपने सरकारी आवास पर कभी-कभार आते थें लेकिन अब वे लखनऊ आएंगे तो अपने पौत्र और प्रदेश सरकार के राज्यमंत्री संदीप सिंह के 2 तिलक मार्ग स्थित सरकारी आवास पर रहेंगे।

बता दें कि राज्य संमत्ति विभाग ने गुरुवार को पूर्व मुख्यमंत्रियों मुलायम सिंह यादव, कल्याण सिंह, अखिलेश यादव, मायावती, नारायण दत्त तिवारी और राजनाथ सिंह को सरकारी बंगला खाली करने का नोटिस जारी किया। सभी पूर्व मुख्यमंत्रियों को आवास खाली करने के लिए 15 दिन का समय दिया है। इस अवधि में उन्हें बंगले खाली करने होंगे। बीते दिनों सुप्रीम कोर्ट ने प्रदेश सरकार के उस कानून को रद्द कर दिया था, जिसके तहत प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्रियों को आजीवन बंगला देने का प्रावधान किया गया था। पूर्व मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव की योगी आदित्यनाथ से बुधवार को हुई मुलाकात को भी इसी प्रकरण से जोड़कर देखा जा रहा है। इस मुलाकात की वजह के बारे में सत्ता के गलियारे में चर्चा रही कि मुलायम सिंह ने मुख्यमंत्री से विक्रमादित्य मार्ग स्थित अपने और अखिलेश यादव के बंगलों को पार्टी नेताओं राम गोविन्द चौधरी और अहमद हसन के नाम पर आवंटित करने का अनुरोध किया है। राम गोविन्द चौधरी विधानसभा और अहमद हसन विधान परिषद में नेता विरोधी दल हैं। इस मुलाकात के बाद अचानक नोटिस जारी होने को महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

मौजूदा समय में आधा दर्जन पूर्व मुख्यमंत्री सरकारी बंगले पर काबिज हैं। इन सभी को शहर के सबसे पॉश इलाके माल एवेन्यू, विक्रमादित्य मार्ग, कालीदास मार्ग में लंबे-चौड़े क्षेत्रफ ल के बंगले आवंटित हैं। इन सरकारी बंगलों में पूर्व मुख्यमंत्री की हैसियत से 4 विक्रमादित्य मार्ग पर अखिलेश यादव, 5 विक्रमादित्य मार्ग पर मुलायम सिंह यादव, 13 माल एवेन्यू पर मायावती, 2 माल एवेन्यू पर कल्याण सिंह, 1 माल एवेन्यू पर नारायण दत्त तिवारी और 4 कालीदास मार्ग पर केन्द्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह रह रहे हैं। पूर्व मुख्यमंत्री मायावती, अखिलेश यादव ने अपने मुख्यमंत्रित्वकाल में इन बंगलों पर बेहताशा खर्च भी किया था। अब भी इनके रख-रखाव पर सरकार काफ ी धनराशि खर्च करती है। राज्य संपत्ति विभाग इसके लिए सालाना बजट आवंटित करता है जबकि ये सभी बंगले मामूली किराये पर आवंटित हैं। पूर्व मुख्यमंत्रियों को बंगले आवंटित करने के खिलाफ लोक प्रहरी संस्था ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका की थी। सुप्रीम कोर्ट के तीन जजों की बेंच ने लोक प्रहरी संस्था की याचिका पर सुनवाई करते हुए 7 मई को राज्य सरकार द्वारा बनाए गए उ .प.्र मंत्री अधिनियम को अवैध बताते हुए खारिज कर दिया था। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुपालन में राज्य सम्पत्ति विभाग ने पूर्व मुख्यमंत्रियों को बंगले खाली करने का नोटिस दिया है।

पूर्व मुख्यमंत्रियों को सरकारी बंगला देने की शुरुआत 1986 में मुख्यमंत्री रहे स्वर्गीय वी.पी. सिंह ने की थी। उन्होंने उस समय पूर्व मुख्यमंत्री नारायण दत तिवारी को 1 माल एवेन्यू आवंटित कर दिया था। उसके बाद तो यह परंपरा सी बन गई कि पूर्व मुख्यमंत्री आजीवन सरकारी बंगलों में रहने लगे। पूर्व मुख्यमंत्री की हैसियत से वीर बहादुर सिंह, राम नरेश यादव, श्रीपति मिश्रा और राम प्रकाश गुप्ता को भी सरकारी बंगला मिला। हालांकि, इन सभी पूर्व मुख्यमंत्रियों की मृत्यु के बाद सरकार की सहमति से राज्य संपत्ति विभाग ने इनसे बंगला खाली करा लिया। वीर बहादुर सिंह के विधायक पुत्र फ तेह बहादुर ने वीर बहादुर की स्मृति में बनी संस्था के नाम यह बंगला आवंटित करा लिया। इसी तरह श्रीपति मिश्रा के बंगले पर भी उनके पुत्र का कुछ दिन कब्जा रहा। बाद में राज्य सम्पति विभाग के दबाव में बंगला खाली करना पड़ा।

मध्य प्रदेश के राज्यपाल रहने के बावजूद रामनरेश यादव ने अपने सरकारी बंगले को नहीं छोड़ा। देहांत के बाद ही यह बंगला खाली हो सका। इसी तरह कल्याण सिंह राजस्थान के राज्यपाल बनने के बाद भी अपने 2 माल एवेन्यू बंगले का मोह नहीं छोड़ पाए। लखनऊ के पॉश इलाके विक्रमादित्य मार्ग, कालीदास मार्ग और माल एवेन्यू में 20 हजार स्कवायर फु ट में बने इन बंगलों में 15 से 20 कमरे हैं लेकिन इनका किराया मात्र 4600 रुपये है। यह किराया भी 2014 में बढ़ा। उससे पहले केवल 3600 रुपये किराया था। इन बंगलों के मासिक किराए की शुरुआत केवल 600 रुपये से हुई थी। 600 के बाद 1800 रुपये हुआ फि र 3600 और अब 4600 रुपये है।
खैर, हम तो सभी पूर्व वालों से यही कहेंगे कि आपलोग तो करोड़ नहीं अरबपति हैं,बंगला खाली कर जनता-जनार्दन के बीच ऐसा नजीर बनें कि उसका भरपूर फायदा आपलोगों को वोट के रूप में आगामी चुनाव में मिले। आपलोगों एक क्या दर्जनों बंगला बना सकते हैं जिसे देखकर लोग कहें काश! ऐसा अपना भी बंगला होता…

 

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