बिना डीजी से आदेश लिए एस. के. सिंह ने रिटायर्ड डीआईजी को कैसे जाने दिया गोपनीय विभाग में ?

‘डीजी साहेब, क्या आपके अफसर नकारा हैं! आखिर डीआईजी ने क्यों कराया एक्स डीआईजी से लेखा,स्थापना का मुआयना

कहीं किसी सीनियर के खिलाफ साजिश की पटकथा तो नहीं लिखी जा रही है?

आखिर मुख्यालय पर बैठ कर कर क्या रहे हैं डीजी…

संजय पुरबिया
लखनऊ।

होमगार्ड विभाग में मुख्यालय के अफसर विभाग की गोपनीयता को भंग कर रहे हैं। ये काम कोई और नहीं मुख्यालय पर तैनात डीआईजी एस.के.सिंह कर रहे हैं। उन्होंने विभाग के ही रिटायर्ड डीआईजी आर बी सिंह को कार्यालय बुलाया। चाय की चुस्कियां लेने के बाद एक्स डीआईजी स्थापना और लेखा अनुभाग में गए। बताया जाता है कि वहां पर उन्होंने अपने कार्यकाल के दरम्यान तैनात रहे बाबूओं से मुलाकात की और गुप्त मंत्रणा भी की। इस बात की जानकारी डीजी सूर्य शुक्ला को भी नहीं लगी। मुख्यालय पर तैनात अफसरों ने बताया कि एक्स डीआईजी आर बी सिंह जब रिटायर्ड हो गए हैं तो लेखा और स्थापना विभाग में जाने की क्या जरूरत आन पड़ी? क्या उन्होंने दोनों विभाग में जाने के लिए डीजी से आदेश लिया था? क्या डीआईजी एस के सिंह डीजी से अपने को बड़ा मानते हैं? मेरा सवाल यह है कि जब डीआईजी रिटायर्ड हो गए तो उन्हें दोनों विभाग में जाने की क्या जरूरत पड़ी? कहीं किसी वरिष्ठï अधिकारी के खिलाफ साजिश की पटकथा तो नहीं लिखी जा रही है ?

25 मई को होमगार्ड मुख्यालय पर तैनात डी आईजी एस के सिंह ने एक्स डीआईजी आर बी सिंह को बुलाया था। कमरे में वार्ता करने के बाद एक्स डीआईजी निकले और स्थापना एवं लेखा विभाग में गए। सरकारी विभागों में सबसे महत्वपूर्ण विभाग लेखा एवं स्थापना होता है जिसमें अधिकारियों की गोपनीय पत्रावलियों के साथ-साथ वेतन संबंधित रिकार्ड मौजूद होते हैं। खास बात यह है कि दोनों विभाग में जाने के लिए उन्होंने डीजी से अनुमोदन लेने की जहमत नहीं उठाई और ना ही मौजूदा डीआईजी एस के ङ्क्षसंह ने बताने की जरूरत समझी।

बताया जाता है कि एक्स डीआईजी आर बी सिंह ने वहां तैनात बाबूओं से मुलाकात की और मंत्रणा की। इस दौरान उन्होंने डीआईजी के स्टेना के सी गौतम,वरिष्ठï लिपिक,गोपनीय दस्तावेज सुरेश कुमार सिंह यादव,वरिष्ठ लिपिक,स्थापना-मुख्यालय रामबचन एवं एसएसओ के स्टेना बृजेश शर्मा मौजूद थें। इनलोगों से क्या वार्ता हुई नहीं मालूम लेकिन मुख्यालय पर तैनात अफसरों ने बताया कि यदि एक्स डीआईजी को मुख्यालय पर डीआईजी एस के सिंह ने बुलाया था तो उन्हें मिलकर वापस चला जाना चाहिए। लेखा,स्थापना विभाग में किसी भी बाहरी व्यक्ति को घुसने की अनुमति नहीं है। ये तभी संभव है जब विभाग का मुखिया डीजी अनुमोदन करें। ना तो एस के सिंह ने और ना ही एक्स डीआईजी ने दोनों विभाग में जाने का अनुमोदन लिया था। यूं कह सकते हैं कि डीआईजी एस के सिंह ने तानाशाही रवैया अपना कर यह साबित कर दिया कि उनकी निगाहों में डीजी की कोई अहमियत नहीं है…।

 

खैर,इस बात को लेकर अफसरों के बीच चर्चा जोरों पर है कि आखिर एक्स डीआईजी अचानक क्यों प्रकट हुए…। आए भी तो वे दोनों अनुभाग में क्यों गए? कहीं ये किसी अफसर के खिलाफ कोई साजिश तो नहीं? कहीं,दस्तावेजों को गायब कराने की योजना तो नहीं? भईया,इस विभाग में कुछ भी हो सकता है,मैं तो यही कहंूगा कि ये योगी राज है लेकिन होमगार्ड विभाग के अफसरों ने मचा रखा है लूटराज…

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