IPL 2018 : धाैनी ने बता दिया अभी कम नहीं हुई है ताकत

आइपीएल चैंपियन बनी चेन्नई सुपर किंग्स यानी टीम धाैनी, काेई आैर टीम नहीं. सीएसके ने कुछ मैच जरूर हारे लेकिन जिस एकजुटता के साथ धाैनी की टीम खेल रही थी, अंदाजा भी यही था कि सीएसके काे चैंपियन बनना ही है. इसका बड़ा कारण था – कप्तानी काेई आैर नहीं बल्कि धाैनी कर रहे थे. फाइनल में सनराइजर्स हैदराबाद काे एक तरह से कुचल कर रख दिया. आठ विकेट से हराया, वह भी डेढ़ आेवर पहले. टीम धाैनी यानी सीएसके ने यह ताे साबित कर दिया कि अगर जीत का जज्बा हाे, फिटनेस हाे, जीतने की कला आती हाे, ताे चैंपियन बनने में उम्र काेई बाधा नहीं हाेती.

टीम धाैनी में खुद धाैनी, ब्रावाे, रैना, जडेजा, वाटसन आैर हरभजन जैसे खिलाड़ी थे. इनमें से लगभग सभी पहले आइपीएल खेल चुके थे. यानी लंबा अनुभव. उम्र भी ज्यादा. हां, अगर किसी काे कुछ परेशानी हुई, ताे उससे उबरने के लिए कप्तान के ताैर पर धाैनी थे ही. वाटसन काे दाैड़ने में थाेड़ी परेशानी थी ताे उनसे गेंदबाजी नहीं करायी. सिर्फ बैटिंग की जिम्मेवारी साैंपी. रिजल्ट देखिए. उसी वाटसन ने फाइनल में तेज-आक्रामक शतक ठाेंक दिया.इस आइपीएल ने बता दिया कि धाैनी की तेजी में काेई कमी नहीं आयी है. बैटिंग आैर निखर गया है. सबसे बड़ी खासियत है कि किस खिलाड़ी का कहां आैर किस समय उपयाेग करना है, यह धाैनी बखूबी जानते हैं. पहले धाैनी के खुद के प्रदर्शन पर. भले ही टेस्ट से संन्यास ले लिया, वन डे की कप्तानी छाेड़ दी लेकिन इस आइपीएल भी शानदार कप्तानी की. नये-नये प्रयाेग किये. किंग्स इलेवन पंजाब के खिलाफ एक मैच में जब 58 रन पर चार प्रमुख बल्लेबाज आउट हाे गये ताे चहर काे अपने से पहले भेज दिया. उसी चहर ने 20 गेंदाें पर 39 रन की पारी खेल कर टीम काे जीत दिला दी.  टीम धाैनी के चैंपियन हाेने के पीछे टीम भावना सबसे आगे है. पूरी टीम खेली. पहले मैच काे ही देखिए. मुंबई इंडियन के खिलाफ उदघाटन मैच में टीम फंस चुकी थी.

मुंबई के 165 के जवाब में एक समय 118 रन पर आठ विकेट गिर चुके थे. लेकिन ब्रावाे ने 30 गेंदाें पर 68 रन की पारी खेली. तब जाधव घायल थे. मैच में उतरने की स्थिति में नहीं थे. एक रन दाैड़ नहीं सकते थे. लेकिन मैदान में उतरे. अंतिम आेवर में पहली तीन गेंद किसी तरह राेकी आैर अंतिम दाे गेंदाें पर छक्का, फिर चाैका लगाकर मैच जीत लिया. कभी वाटसन चले, कभी डुप्लेसी, ताे कभी चहर-ठाकुर.  ये सब इसलिए चले क्याेंकि कप्तान ने अपने खिलाड़ियाें पर भराेसा किया. यही ताे है लीडरशिप.
अजीब खिलाड़ी है धाैनी. चेहरे पर न हार की चिंता आैर न जीत का गुमान. बिल्कुल शांत. हार-जीत से ऊपर. तभी ताे पूरा देश इस खिलाड़ी के पीछे पागल है, दीवाना है. झारखंड ताे खास ताैर पर क्याेंकि इसी माटी का वह बेटा है. जब बल्लेबाजी करने आये ताे दिखाया कमाल. 16 मैच में 455 रन, वह भी 150 से ज्यादा के स्ट्राइक रेट से. तीन-तीन अर्द्धशतक. 16 मैच में 30 छक्के यह साबित कर रहा है कि जैसे-जैसे धाैनी की उम्र बढ़ रही है, खेलने में आैर जवान हाेते जा रहे हैं. प्रदर्शन आैर बेहतर हाेते जा रहा है. विकेट के पीछे भी वही तेजी. 16 मैच में 14 शिकार. सिर्फ कार्तिक से पीछे. आइपीएल के प्रदर्शन ने यह बता दिया है कि अगले वर्ल्ड कप में भी धाैनी का काेई जवाब नहीं रहेगा.
इस अाइपीएल ने कई नये खिलाड़ियाें काे सामने लाया है.
धाैनी खुद खुश हैं क्याेंकि उनके बाद (जब भी धाैनी क्रिकेट काे अलविदा कहेंगे, वह दिन अभी बहुत दूर है) दाे-तीन प्रतिभाशाली विकेटकीपर दिख रहे हैं. ये सभी धाैनी काे ही अपना आदर्श मानते हैं. इनमें से एक हैं ऋषभ पंत. इस युवा खिलाड़ी ने 14 मैच में 684 रन बना दिये. पांच अर्द्धशतक. 173 का स्ट्राइक रेट. जब मूड किया, जहां मूड किया, छक्के लगाये. 14 मैच में 37 छक्के आैर 68 चाैके यह साबित करता है कि ऋषभ के रूप में भारत के लिए एक आैर खिलाड़ी (छाेटा धाैनी) तैयार हाे रहा है. झारखंड का ईशान किशन भी उसके ठीक पीछे. रन भले ही उसने 275 बनाये लेकिन 17 छक्के जड़ दिये. ये दाेनाें खिलाड़ी टीम इंडिया के दरवाजे पर खड़े हैं. यहां केएल राहुल का उल्लेख नहीं कर रहा हूं (14 मैच, 659 रन आैर छह अर्द्धशतक) क्याेंकि वह ताे टीम इंडिया में  हैं ही. आइपीएल में चाैकाें आैर छक्काें की जिन खिलाड़ियाें ने बरसात की, जिस तरह का प्रदर्शन किया, उसने यह बता दिया कि भारत काे अब चिंता की जरूरत नहीं है. जिसे भी माैका मिलेगा, वर्ल्ड कप में इसकी झलक जरूर दिखायेगा.

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