क्या आपको लगता है मेरे पिता सुसाइड कर सकते थे… श्रेया

ईमानदार,मृदु स्वभाव, मिलनसार आफिसर को द संडे व्यूज परिवार की तरफ से श्रृद्धांजलि 

राजेश साहनी की मौत का रहस्य उलझता जा रहा है

संजय पुरबिया

लखनऊ।

एक ईमानदार,यारों का यार,किसी भी चैलेंज को स्वीकारने वाले,कर्मचारियों के साथ याराना व्यवहार रखने एवं सादगी से प्यार करने वाले यूपी के सीनियर आफिसर राजेश साहनी ने आत्महत्या कर लिया,ये किसी के गले नहीं उतर रहा। डिपार्टमेंट के आफिसर की बात तो छोडि़ए, मीडिया के साथियों और उनसे जुड़ा हर शख्स उनकी मौत से सकते में है। सभी की जुबां पर एक ही सवाल,राजीव आत्महत्या नहीं कर सकते? बात सही है। उनके शोक सभा के बाद अफसरों ने सवाल उठाया कि आखिर उनकी मौत के लिए जिम्मेदार कौन है? किस बात का तनाव था जो राजेश ने इतना खौफनाक कदम उठाया… इस तरह के कई सवाल पुलिस विभाग के अफसर तलाशते रहें। साथियों ने सीबीआई जांच की मांग उठाई है जिसे सीएम ने स्वीकार करते हुए बुधवार को ही सीबीआई जांच के लिए केन्द्रीय गृह मंत्रालय को पत्र भेज दिया है।


राजेश साहनी की मौत ने एक बार फिर सवाल उठा दिया है कि आखिर पुलिस विभाग के सीनियर आफिसरों पर किसका दबाव रहता है कि वे इतना बड़ा कदम उठाने पर मजबूर हो जाते हैं। ये दबाव विभाग का होता है या फिर सरकार का, या फिर बड़े रैकेट का पर्दाफाश करने वालों का। ये सवाल राजेश साहनी की मौत के बाद एटीएस के अफसरों की जुबां से रह-रह कर फूट रहा था। राजेश की मौत पर उनका परिवार तो चुप है लेकिन आईपीएस एसोसिएशन और पीपीएस एसोसिएशन आमने -सामने हो गए हैं। खैर, इस मामले की जांच लखनऊ के एडीजी राजीव कृष्ण को दी है। लखनऊ के आईपीएस मेस में शाम को राजेश साहनी को श्रद्धांजलि देने के लिए एक शोक सभा रखी गयी थी। डीजीपी ओम प्रकाश सिंह ने उन्हें एडीजी राजीव कृष्णा से जांच का भरोसा दिया लेकिन पीपीएस अफ सरों ने ही बात मानने से इंकार कर दिया। सब सीबीआई जांच की मांग पर अ? गएण् पीपीएस अफ सरों के एसोसिएशन ने जिम्मेदार पुलिस अधिकारियों पर केस भी दर्ज कराने की मांग की। अफसरों ने कहा कि ये मामला गंभीर है और इसकी सीबीआई से जांच होनी चाहिए।


सुबह राजेश साहनी को सबने नम आंखों से आखिरी विदाई दी। एटीएस के एएसपी को उनकी इकलौती बेटी श्रेया ने मुखाग्नि दी। उसने अपने पिता को सलामी भी दी। इस दौरान यूपी के समी सीनियर पुलिस आफिसर मौजूद थें।
29 मई को एटीएस के एएसपी राजेश साहनी ने अपने ही कार्यालय में ग्लास्को पिस्तौल से खुद को गोली मार ली थी। उस समय दोपहर के 12. 45 बज कर मिनट हो रहे थे। राजेश ने अपने ड्राईवर मनोज को कह कर अपने घर से पिस्तौल मंगाई थी। उन्होंने 10 दिनों की छुट्टी ले रखी थी। अब सवाल उठ रहे हैं कि छुट्टी के बाद भी आखिर राजेश अपने कार्यालय क्यों गए थे? क्या उस दिन उनकी अपने किसी सीनियर अफ सर से कहा-सुनी तो नहीं हो गयी थी? उनके साथी एटीएस के ही सीनियर अफ सरों पर सवाल उठा रहे हैं ?

चर्चा ये भी है कि सरकारी काम -काज को लेकर वे पिछले कुछ दिनों से तनाव में थे। सवाल यह भी उठता है कि क्या किसी ने राजेश को आत्महत्या के लिए मजबूर किया?  बिहार के पटना के रहने वाले राजेश साहनी की छवि एक बेहद ईमानदार और तेज तर्रार पुलिस अफ सर की रही है। वे 1997 बैच के पीपीएस अफ सर थे। कई जिलों में डीएसपी रह चुके राजेश यूपी के डीजीपी के पीए का काम भी देख चुके हैं। वे दो सालों तक केंद्रीय जांच एजेंसी एनआईए में भी तैनात थे। अपनी बेटी श्रेया के सोशल साइंस में एडमिशन को लेकर राजेश बहुत खुश थे। 31 मई को उन्हें बेटी के साथ मुंबई जाना था।

ऐसे हालात में राजेश के पास आत्मह्त्या करने की कोई वजह नहीं थी। राजेश की एकलौती बेटी श्रेया ने सवाल उठाया कि क्या आपको लगता है मेरे पिता सुसाइड कर सकते थे ! आप तो उन्हें जानते थे…। श्रेया के इस सवाल ने मानों निरूत्तर कर दिया। फिर भी सवाल बनता है कि आखिर राजेश साहनी ने आत्महत्या क्यों की? क्या उन पर अपने ही विभाग के सीनियर आफिसर द्वारा कोई नाजायज दबाव था या फिर सरकार के स्तर पर कोई भारी दबाव… सवाल पुलिस विभाग के अफसरों के दिलो-दिमाग में तैर रहे हैं,इसका सही जवाब तो सीबीआईजी जांच में ही सामने आएगा।

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