शर्मनाक :अनिल राजभर जी होमगार्ड विभाग में 14 वर्ष सात माह में कर डाली नियुक्ति

14 वर्ष सात माह में कर डाली होमगार्ड विभाग में नियुक्ति

डीआईजी को मालूम लेकिन उसने दबा दी पत्रावली,

आरटीआई में बाबूओं ने पत्रावली गायब होने की दी गलत सूचना

जब पीएम के संसदीय क्षेत्र का ये हाल तो होमगार्ड विभाग में कुछ भी हो सकता है…

संजय पुरबिया
लखनऊ।

मेरा सवाल होमगार्ड मंत्री अनिल राजभर से है। मंत्री जी, क्या जिस व्यक्ति की उम्र 14 वर्ष सात माह हो उसे सरकारी विभाग में भर्ती कर सकते हैं।

शायद आपका जवाब ना हो क्योंकि आप भी जानते हैं सरकारी मुलाजिम बनने के लिए कम से कम 18 वर्ष उम्र होनी चाहिए। लेकिन,आपके विभाग ने ये कारनामा कर दिखाया है और एक व्यक्ति 14 वर्ष सात माह में भर्ती हो गया और पूरी दबंगई से वहां जितने कमांडेंट रहें या फिर हैं,सभी का भरोसेमंद वसूली मैन बन कर काम कर रहा है। मंत्री जी ये कितनी शर्मनाक बात है कि ये वाक्या कहीं और नहीं बल्कि प्रधानमंत्री के संसदीय क्षेत्र और आपके विधान सभा क्षेत्र के करीब का मामला है। चलिए मान लेते हैं कि इतना बड़ा फ्राड आपकी जानकारी में ना हो लेकिन होमगार्ड विभाग के डीआईजी जो मुख्यालय पर बैठ कर प्रदेश चला रहे हैं, उन्हें तो है। फिर इतने सालों से एक व्यक्ति अपराध करता चला आ रहा है वहां तैनात सभी कमांडेंट्स को मालूम था फिर उनलोगों ने उसके खिलाफ एफआईआर दर्ज क्यों नहीं कराया ? क्या इसलिए कि वो दो नंबर का पैसा होमगार्डों से वसूलकर इनकी जेबें गरम करता है ?

मंत्री जी द संडे व्यूज़ एवं इंडिया एक्सप्रेस न्यूज़ डॉट कॉम  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के संकल्प भ्रष्टïाचार मिटाओ की मशाल लेकर आगे बढ़ रहा है। अब आपको इस भ्रष्टचार और इसमें साथ देने वाले अधिकारियों के बारे में अवगत करा रहा है,आप इन पर क्या एक्शन लेंगे,ये देखना है। मेरा मानना है कि मुख्यमंत्री की राह पर यदि आप चल रहे हैं तो उम्र छिपाकर भ्रष्टचार में अधिकारियों का साथ देने वाले को आप बख्शेंगे नहीं…

होमगार्ड विभाग में भ्रष्टïाचारियों की जितनी भी जांचें मुख्यालय पहुंचती रही है उसे डीआईजी एस के सिंह ने दबा दिया है। पिछले एक वर्ष के दौरान ऐसा कोई वाक्या याद नहीं आ रहा जिन पत्रावलियों पर डीआईजी ने एक्शन लिया हो। शुक्र है आरटीआई विभाग का जिसने उम्र के इस खेल की सही रिपोर्ट देकर इस विभाग के मुंह पर कालिख पोतने का काम किया है। बता दें कि उस शख्स का नाम मोहन प्यारे यादव है जो नई बस्ती, पाण्डेयपुर, वाराणसी का रहने वाला है। होमगार्ड विभाग में 6 मई 1984 को होमगार्ड स्वयं सेवक के रूप में नियुक्ति की गई। नियुक्ति के समय उसकी उम्र्र 3 अगस्त 1969 थी,इस तरह उसकी नियुक्त 14 वर्ष सात माह में किया गया है।

अब आते हैं शासनादेश पर। इसके मुताबिक किसी भी सरकारी या गैर सरकारी कर्मचारी बनने के लिए उम्र 18 वर्ष होनी चाहिए लेकिन मोहन प्यारे अफसरों को इतने प्यारे लगे कि उनलोगों ने नियम को ताख पर रखकर उसकी नियुक्ति कर दी। अब ये मत पूछिएगा कि इस फर्जी काम के लिए अफसरों ने कितने पैसे लिए…।

द संडे व्यूज़ के हर खुलासे के बाद भ्रष्ट अफसर एक-दूसरे से सवाल बहुत करते हैं जैसे पत्रकार को सेट करो,पत्रकार को मैनेज करो वगैरह-वगैरह।जहां तक मेरी जानकारी है जन सूचना अधिकारी ने जब मुख्यालय से प्यारे मोहन की उम्र संबंधित पत्रावलियां मांगी गई तो यहां बैठे घाघ बाबूओं ने पत्रावली गायब होने की सूचना दे डाली। ये बात हजम नहीं हो रहा है। मुख्यालय के बाबूओं के काकस का ये आलम है कि उन्हें प्रत्येक सूचना जिलों में देने के एवज में रकम मिलता है।। इसका खुलासा अगले अंक में करेंगे,

अभी हम बात कर रहे हैं अफसरों के प्यारे प्यारे मोहन यादव की। भाजपा की सरकार में वो सब कुछ हो रहा है जो अभी तक पिछली सरकारों में नहीं देखने और सुनने का ेमिला। होमगार्ड मंत्री अनिल राजभर को हो सकता है इस बात की जानकारी ना हो लेकिन अब तो मालूम चल ही गया होगा। मंत्र जी ये आपका विधान सभा क्षेत्र भले ही ना हो लेकिन प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का संसदीय क्षेत्र है। मामला आपके विभाग से जुड़ा है इसलिए आपकी नैतिक जिम्मेदारी बनती है कि इस फ्र ाड का खुलासा कर सख्त कार्रवाई करें क्योंकि इसमें जितना बड़ा अपराध प्यारे मोहन यादव ने किया है उससे बड़े अपराधी वे अधिकारी हैं जिन्होंने चंद रूपयों की लालच में इसकी नियुक्ति की। साथ ही जब इस बात की जानकारी डीआईजी एस के सिंह को थी तो उन्होंने विभागीय कार्रवाई क्यों नहीं की? क्या इन्हें भी इस फ्राड को छिपाने की रकम तो नहीं मिली…

You May Also Like

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *