योगी राज में एसटीएफ के अफसरों को मिला गुंडई करने का लाइसेंस

एसटीएफ के रणजीत राय ने वरिष्ठ पत्रकार के घर में गुंडों के साथ घुस कर मचाया तांड़व

सादे ड्रेस में पहुंचा रणजीत राय ने कहा: मैं एसटीएफ से रणजीत राय हूं, जो उखाडऩा हो उखाड़ लो…

संजय पुरबिया
लखनऊ।

भाजपा की सरकार बनने के बाद यूपी में अपराध तो बढ़ा ही है लेकिन अपराधियों से ज्यादा खौफ पुलिस विभाग के तथाकथित अफसरों को दिख रहा है। थाना हो या फिर एसटीएफ के अफसरान, सभी जमीन कब्जा करने एवं विवाद से घीरे मामलों में हस्तक्षेप कर करोड़ों का धंधा करने में मशगूल हैं। सभी कुछ जानने के बाद भी डीजीपी स्तर से इनके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं हो रही है। यही वजह है कि इनका इकबाल इतना बुलंद है कि अब ये वरिष्ठï पत्रकारों के साथ भी गुंडई करने पर आमादा हो गए हैं। राजधानी से प्रकाशित एक दैनिक अखबार के संपादक सुभाष राय के गोमती नगर स्थित आवास पर कल मौरंग हटाने की बात को लेकर पड़ोसी से हुए तकरार में एसटीएफ के इंस्पेक्टर रणजीत राय एक दर्जन गुंडों के साथ आ धमका। इंस्पेक्टर ने श्री राय और उनकी पत्नी के सामने अभद्र भाषाओं का प्रयोग करने के साथ ही जान से मार लेने की धमकी भी दी। कहा कि मैं रणजीत राय, इंस्पेक्टर एसटीएफ हूं। मेरा कोई कुछ नहीं उखाड़ सकता,तुम्हारी हिम्मत कैसे हुई पड़ोसी के घर पुलिस बुलाने की…। खैर, ये कोई नई बात नहीं है क्योंकि योगी सरकार बनने के बाद सूबे के अवाम को गुंडों से कम खाकी वालों से ज्यादा डर लगने लगा है।


सवाल यह उठता है कि जब पुलिस और एसटीएफ के लोग इस तरह क़ानून तोडऩे वाले, अराजक और अपराधी कि़स्म के मित्रों और रिश्तेदारों की मदद में आम जीवन जीने वालों का जीना हराम करेंगे तो कैसे काम चलेगा। क्या ये लोग ऐसा करने के लिए किसी सक्षम अधिकारी की अनुमति लेते हैं? शायद नहीं फिर बिना किसी असाइनमेंट के गुंडों की तरह कहीं भी हमला करने लगेंगे तो संभ्रांत परिवार के रहने वालों का जीना मुहाल हो जाएगा।
वरिष्ठ पत्रकार सुभाष राय के मुताबिक,एसटीएफ इंस्पेक्टर रणजी राय ने कहा कि अब तुम किसी पुलिस वाले को, किसी दरोग़ा को, एस पी को, जिसको चाहो बुला लो, देखता हूं तुम्हारी औक़ात क्या है? ये देखने से ही गुंडा लगता है, पत्रकार है, गुंडई करता है, अब बता कौन आएगा तुझे बचाने, बोल कौन है बुला… नम्बर दे मैं बुलाता हूं । एक गुस्साया हुआ आदमी दर्जन भर लोगों के साथ रविवार शाम तीन से चार के बीच मेरे विराज खंड स्थित आवास पर आ धमका। तब मैं और मेरी पत्नी केवल हम दो ही घर पर थे। उनमें से कई हथियारों से लैस थे। वे सब धड़ाधड़ रैम्प फ लांगते हुए मेरे दरवाज़े के अंदर आ गए। चीख़ते, चिल्लाते और अभद्र भाषा का इस्तेमाल करते हुए, हमलावर अन्दाज़ में एक झटके में डरा देने की कोशिश की। हम अवाक थे, लगा कि वह किसी भी क्षण मुझे थप्पड़ जड़ देगा, मेरी पत्नी पर हमले कर देगा…

 

मैं एकबारगी डर गया लेकिन अपने डर से बाहर आते हुए मैंने उससे कहा कि आप बाहर जाइए, दरवाज़े से हटिए, मैं आप से बात नहीं कर रहा हूं । वह खिसियाते हुए बोला, तुम्हें मुझसे बात करनी पड़ेगी, क्यों नहीं बात करेगा? बोल कौन पुलिस वाला है जो तुम्हारी मदद करेगा। बुला, फ ़ोन कर। मैंने पूछा, आप हैं कौन ? वह मुझे डपटते हुए चीख़ा, मैं एस टी एफ से हूं, रणजीत राय। क्या उखाड़ लेगा? लग रहा था कि वह कभी भी मुझे घसीट लेगा, मार देगा। उसकी भाषा में खिसियाहट, उग्रता, आक्रामकता और गंदगी भरी हुई थी। चिल्लाते हुए उसके हाथ बिलकुल मेरे सिर के पास तक लहरा रहे थे। मेरी पत्नी डर गयीं थीं, वे मुझे अंदर खींचने का प्रयास कर रहीं थीं। मैं जितना पीछे हट रहा था, वह उतना आगे बढ़ रहा था। लगभग आधे घंटे तक वह और उसके मवाली साथी मेरे घर पर हंगामा करते रहे।  मुझे नहीं पता कि कोई भी एस टी एफ वाला इस तरह सादी वर्दी में कैसे किसी भी आम नागरिक को डरा- धमका सकता है। मुझे यह भी नहीं पता कि वह किसी असाइनमेंट पर था या अपने अधिकारियों को सूचित करके आया था या निजी तौर पर ही अपने रिश्तेदारों, मित्रों की ग़ैरक़ानूनी मदद करने आया था। इस तरह किसी फ़ ोर्स का कोई आदमी रंगबाज़ी और सरासर गुंडई की मुद्रा में किसी सभ्य नागरिक के घर धावा बोलकर केवल एस टी एफ की छवि को ही बट्टा लगाएगा और उसने ऐसा ही किया।

मामला क्या था, यह बताऊं तो आप आसानी से समझ जाएंगे कि किस तरह पुलिस संगठनों के कुछ लोग अपने पद की धौंस दिखाकर क़ानून का दायरा लांघते हुए अपने अराजक, रंगबाज़ और दलाल संबंधियों की मदद कर रहे हैं। मैं और मेरी पत्नी, दोनों एक जून को बाहर चले गए थे। जब आठ की रात दो बजे वापस लौटे तो यह देखकर सन्न रह गए कि किसी ने घर के सामने कई ट्रक मोरंग इस तरह गिरवा दिया था कि मैं अपनी गाड़ी बाहर नहीं निकाल सकता था। पता करने पर मालूम हुआ कि मोरंग मिस्टर राकेश तिवारी ने डलवाया था। अगले दिन नौ को मैंने उनसे कहा कि भाई घर के सामने से सिर्फ़ इतना मोरंग हटा लें कि मैं गाड़ी निकाल सकूं और कार्यालय जा सकूं। उसने कहा, जी बिलकुल अभी करवा दूंगा। जब दस बज गया और कोई हलचल नहीं हुई तो मेरी पत्नी उसके घर गयीं और वही आग्रह दुहराया। राकेश और उसकी पत्नी दोनों ने आश्वस्त किया की बहुत जल्द वे मोरंग हटा लेंगे पर शाम तक कुछ नहीं हुआ। मैं कार्यालय नहीं जा सका और हम अपने घर में लगभग क़ैद हो गए। मेरे पास अपने हर काम के लिए पैदल निकलने के अलावा कोई और चारा नहीं बचा। मेरे लिए इस उम्र में यह सम्भव नहीं था।

शाम को मैंने राकेश तिवारी से कहा कि आप यहाँ से मोरंग हटा लें अन्यथा मुझे क़ानून की मदद लेनी पड़ेगी। पहले तो वह सामान्य ढंग से बात करता रहा और कहता रहा कि अब आप ही बताइए इसे कहां ले जाऊं, मैं जानता हूं कि आप को तकलीफ़ हो रही है लेकिन मेरे पास कोई और चारा नहीं है। वह मेरी मुश्किल समझने को कतई तैयार नहीं था। बात करते – करते अचानक उसकी भौहें तन गयीं और भाषा बदल गयी। वैसे भी वह मुहल्ले में अकारण लोगों से झगड़ता रहता है। वह बंदूक़ भी रखता है। वह ग़ुस्से में बोला, अब मोरंग यहीं रहेगा, आप को जो उखाडऩा हो उखाड़ लीजिए। मजबूरन मुझे 100 पर पुलिस को ख़बर करनी पड़ी। पुलिस आती, इसके पहले तिवारी ने अपने कुछ लोगों बुला लिया। वे आए, मेरी घंटी बजायी और धमकाने वाली भाषा में बात करने की कोशिश की। मैंने किसी से बात करने से इनकार किया और दरवाज़ा बंद करके घर में चला गया। मैंने पुलिस के उच्च अधिकारियों को भी सूचना दे दी थी। रात आठ बजे के आस- पास एक पुलिस अधिकारी आए, उन्होंने सब देखा, राकेश तिवारी को बुलवाया और उनसे कहा कि आप इस तरह सड़क बंद नहीं कर सकते। कल सुबह जे सी बी मंगवाइ, और यहां से मोरंग हटवाइए। तिवारी ने सहमति जतायी और पुलिस अफ़ सर को आश्वस्त किया कि सवेरे काम हो जाएगा।


अगला दिन 10 जून। सवेरा हुआ। दस बजा, बारह बजा, सब ख़ामोश, वहां एक चुटियावाला आदमी तिवारी का काम करा रहा था, मैंने उससे कहा तो उसने रूखा जवाब दिया, अभी सुबह नहीं हुई है, कर रहे हैं, कर देंगे, हटा देंगे, ज़्यादा हाइपर न होईए…। दोपहर गुजऱ गयी मगर उनकी सुबह नहीं आयी। मैंने फि र पुलिस अधिकारी से सम्पर्क किया तो पता चला कि मिस्टर तिवारी को जे सी बी नहीं मिल पा रही है। मैंने कहा कि अगर मैं जे सी बी मंगवा दूं तो … अधिकारी ने कहा, आप को मिल जाय तो मंगा लीजिए और जब जे सी बी आ जाए तो मुझे फ़ ोन कर दीजिएगा। मैं फ़ ोर्स भेज दूंगा, आप मोरंग हटवा दीजिएगा। मैंने जे सी बी मंगा ली। उसके आते ही मिस्टर तिवारी आए, उन्होंने मुझे बताया कि खाली प्लॉट में डलवा दीजिए। मैंने उनको बताया कि इसे तीन हज़ार रुपए भी देने हैं। मिस्टर तिवारी ने कहा, कोई बात नहीं, हो जाएगा। मुझे लगा कि समस्या हल हो गयी लेकिन जे सी बी ने अभी एक तिहाई भी मोरंग नहीं उठायी होगी कि तिवारी की पत्नी आकर मशीन के सामने खड़ी हो गयी और गाली देने लगी, चिल्लाने लगी। तिवारी के तेवर भी अचानक बदल गए, वह भी अनाप- शनाप बोलने लगा। जे सी बी वाला डर कर भाग गया।

मैंने सुना, तिवारी की पत्नी ने किसी को फ ़ोन किया और कुछ ही पलों में एक गाड़ी से दनदनाते हुए एक दर्जन हथियारबंद लोग आ गए। आते ही उन्होंने मेरे घर पर धावा बोल दिया, गरियाते हुए, औक़ात पूछते हुए और धमकाते हुए। शोर सुनकर मेरे एक पत्रकर साथी भी आए, उन्होंने हस्तक्षेप करने की कोशिश की लेकिन हमलावर किसी की कुछ भी सुनने को तैयार नहीं थे। इस बीच मैंने पुलिस अधिकारी को कई बार फ ़ोन करने की कोशिश की मगर नाकाम रहा। उनका जब तक फ ़ोन आया, तब तक मिस्टर तिवारी के बुलावे पर आए लोगों ने मुझे, मेरी पत्नी को झुकाने, डराने, धमकाने और मैन हैंडलिंग के हर सम्भव जतन कर लिए। जब हम नहीं डरे तो वे सब बाहर निकलकर खड़े हो गए और तिवारी दम्पती चीख़- चीख़ कर चुनौती देने लगे। अब जिसे बुलाना हो बुला लो और एक इंच भी मोरंग हटवा कर दिखा दो।  मैं पसोपेश में था, समझ में नहीं आ रहा था क्या करूं योगी राज में पुलिस अफसरों को मिला गुंडई करने का लाइसेंस पुलिस अधिकारी का फ ़ोन आया, मैंने उन्हें सारी बात बतायी, अपमानजनक घटना का पूरा ब्योरा दिया। तब तक मेरे मित्र अरुण सिंह और रामबाबू भी आ गए थे। आधे घंटे बाद पुलिस आयी। जे सी बी बुलाने की बहुत कोशिश हुई पर वह भाग चुका था, मिला नहीं, फि र पुलिस ने आस-पास काम कर रहे मज़दूरों को लगाकर मोरंग हटवायी।

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