इन्वेस्टर्स समिट की सफलता ने बनाया अनूप चंद्र पाण्डेय को ‘मुख्य सचिव’

इन्वेस्टर्स समिट के दौरान ही योगी के ‘गुड बुक’ में आ गए थें अनूप

संजय पुरबिया

लखनऊ।

यूपी के नौकरशाही में इस समय मेहनतकश अफसरों के हौसले बुलंद है। होना भी चाहिए,क्योंकि जब काम की कद्र करने वाला कोई और नहीं सूबे का मुखिया हो तोमजा ही कुछ और होता है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ एक अफसर को ‘टास्क’ देते हैं जिसमें ‘यूपी का भविष्य’ टिका हो। और ये भी शर्त रखते हैं कि यदि इसमें सफल होते हैं तो यहां पर ‘विकास’ और ‘खुशहाली की नई इबारत’ लिखी जाएगी। उस अफसर ने टास्क को चैलेंज के रूप में लिया और अपनी नौकरशाहों की पूरी टीम के साथ मिशन को सफल बनाने में जुट गये। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के ‘सपनों का प्रदेश’ उत्तर प्रदेश के भविष्य को संवारने के लिए अफसरों ने दिन-रात एक कर दिया और उस टास्क में सफल हुए। जी हां, मैं बात कर रहा हूं उत्तर प्रदेश के नये मुख्य सचिव अनूप चंद्र पाण्डेय की।

मुख्यमंत्री के टास्क का नाम ‘इंवेस्टर्स समिट’ था जिसके सफल आयोजन का डंका पूरे देश में बजा। इसकी सफलता में कई लोग शामिल हैं लेकिन जिस कुशल रणनीति के साथ इसका आगाज किया गया उसका पूरा श्रेय नवनियुक्त मुख्य सचिव अनूप चंद्र पाण्डेय को ही जाता है। इन्होंने इसके अलावा किसानों की कर्जमाफी सहित अमेरिका में सफल रोड शो का आयोजन कर सरकार की नजरों में ‘हीरो’ बन गए थे,और उसका ईनाम इन्हें मुख्य सचिव की कुर्सी के रूप में मिला। अब देखना है कि यूपी में निवेश करने वालों को कितना रिझाने में कामयाब होते हैं क्योंकि सरकार की निगाहें वर्ष 2019 पर टिकी है। सभी जानते हैं कि सूबे में बड़ी संख्या में बेरोजगारों की निगाहें सरकारी भर्तियों पर लगी है और सरकार की नजरें इनके वोट बैंक पर…।

श्री पाण्डेय के पास औद्योगिक विकास था,उम्मीद है कि ये विभाग वे अपने ही पास रखेंगे ताकि निवेश प्रस्तावों के अमल का काम सीधे उनकी निगरानी में चलता रहे। इनसे पूर्व में मुख्य सचिव रहे राहुल भटनागर व आलोक रंजन ने आईडीसी पद अपने पास ही रखा था। साथ ही पिकप अध्यक्ष पद का दायित्व भी संभाला। राहुल भटनागर तो मुख्य सचिव रहते हुए गन्ना एवं चीनी उद्योग विभाग भी संभाले रहे। भाजपा की सरकार बनने के बाद अनूप चंद्र पाण्डेय को आईडीसी बनाया तब वह वित्त विभाग व संस्थागत वित्त विभाग के प्रमुख सचिव थे और भाजपा सरकार की किसानों की कर्ज माफ ी की महत्वाकांक्षी योजना को तैयार कराने में उनकी अहम् भूमिका रही। इसलिए जब उन्हें आईडीसी बनाया गया तो सरकार ने संस्थागत वित्त विभाग का काम उनके पास बरकरार रखा। यही वजह है कि वह कर्ज माफ ी योजना लागू होने के बाद उसकी निगरानी का काम करते रहे।

चर्चा है कि खादी एवं ग्रामोद्योग विभाग में प्रमुख सचिव नवनीत सहगल को मुख्य सचिव श्री पाण्डेय इस विभाग में महत्वपूर्ण जिम्मेदारी दे सकते हैं। इन्वेस्टर्स समिट के कामयाब आयोजन में नवनीत सहगल की भी महत्वपूर्ण भूमिका रही। 2019 के नजरिए से देखा जाए तो मुख्य सचिव के सामने कई चुनौतियां भी मुंह बाए खड़ी है। मिशन 2019 के हिसाब से सरकार द्वारा चयनित कार्यक्रम को सीमित वक्त में कामयाब बनाना होगा,तभी सरकार की मंजिल कामयाबी की ओर बढ़ेगी। साथ ही सूबे के वित्तीय संसाधन को बढ़ाना, चालू योजनाओं की रफ्तार और बढ़ाने, किसानों को गन्ना बकाये का पूरी तरह भुगतान कराना एवं नौकरशाही को जवाबदेह बनाकर योजनाओं का लाभ निचले स्तर तक लाने का काम करना होगा। यदि इसमें मुख्य सचिव कामयाब हो गए तो तय है कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नजरों के तारे बन कर रहेंगे।

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