‘बुलेट’ से खेलने वाले पूर्वांचल के माफिया डॉन मुन्ना बजरंगी को ‘बुलेट’ ने सुला दिया

सवाल: तन्हाई बैरेक में किसने पहुंचाई हथियार?

सवाल : क्या पहले से मुन्ना के हत्या की पटकथा लिख ली गई थी?

सवाल: इस हत्या की कहानी लिखने वालों के साथ मिले हैं जेल के अफसरान?

सवाल: क्या जेल के अंदर सुरक्षित नहीं हैं कैदी?

संजय पुरबिया

लखनऊ।

पूर्वांचल की सरजमीं पर कभी खौफ और दहशत का नाम था मुन्ना बजरंगी। कक्षा पांच के बाद के बाद उसे लगा फिल्में देखने का शौक और हीरो के बजाए विलेन आने लगे रास। विलेन में भी ऐसा अंदाज की जिसके आगे सभी नतमस्तक दिखें। बस,इसी सोच ने उसे जरायम की दुनिया की ओर कदम बढ़ाने पर मजबूर कर दिया। किशोराअवस्था आने तक उसने जुर्म की दुनिया में बुलेट के दम पर अपनी धमक का अहसास करा दिया। हथियारों का शौक उसे इस कदर भाया कि यूपी की पुलिस को उसने नाको चने चबवा दिया। उस दौर में जो अपने नाम के आगे माफिया लगाने में शान समझते थें,मुन्ना बजरंगी के आगे थर-थर कांपने लगे। और आज सुबह जौनपुर का रहने वाले मुन्ना बजरंगी उर्फ प्रेम प्रकाश सिंह को उसी बुलेट ने हमेशा-हमेशा के लिए शांत कर दिया। सवाल यह उठता है कि जब उसे झांसी से बागपत जेल के तन्हाई बैरेक में दो कैदियों के साथ रखा गया तो उनलोगों के पास हथियार कहां से आया? क्या मुन्ना बजरंगी के हत्या की योजना पहले से बना ली गई थी? आखिर मुन्ना की पत्नी ने हत्या की जो आशंका जताई थी,वो सच साबित हुई। जिस तरह से मुन्ना की जेल के अंदर हत्या की गई उसे देखकर लगता है कि इसके पीछे एक गहरी साजिश है और कहीं न कहीं इसके पीछे पूरी तरह से जेल प्रशासन के अफसरानों का भी हाथ है।

मुन्ना बजरंगी का असली नाम प्रेम प्रकाश सिंह है। यूपी के जौनपुर जिले के पूरेदयाल गांव में रहने वाले पारसनाथ सिंह के बेटे मुन्ना का पढ़ाई में मन नहीं लगता था। पांचवीं कक्षा के बाद उसने पढ़ाई छोड़ दी। जवानी की हदलीज पर कदम रखते ही उसे कई ऐसे शौक लग गए जो उसे जुर्म की दुनिया में ले जाने के लिए काफी थे। मुन्ना को हथियार रखने का बड़ा शौक था। वह फि ल्मों की तरह एक बड़ा गैंगेस्टर बनना चाहता था। 17 साल की नाबालिग उम्र में ही उसके खिलाफ पुलिस ने मुकदमा दर्ज किया। जौनपुर के सुरेही थाना में उसके खिलाफ मारपीट और अवैध असलहा रखने का मामला दर्ज किया गया था। इसके बाद मुन्ना ने कभी पलटकर नहीं देखा और वह जरायम के दलदल में धंसता चला गया। मुन्ना अपराध की दुनिया में अपनी पहचान बनाने की कोशिश में लगा था। इसी दौरान उसे जौनपुर के स्थानीय दबंग माफि या गजराज सिंह का संरक्षण मिल गया। मुन्ना अब उसके लिए काम करने लगा था। इसी बीच 1984 में मुन्ना ने लूट के लिए एक व्यापारी की हत्या कर दी। उसने गजराज के इशारे पर ही जौनपुर के भाजपा नेता रामचंद्र सिंह की हत्या करके पूर्वांचल में अपना दबदबा कायम कर लिया। हत्या करने का सिलसिल शुरू हो गया।

पूर्वांचल में अपनी साख बढ़ाने के लिए मुन्ना बजरंगी 90 के दशक में पूर्वांचल के बाहुबली माफि या और राजनेता मुख्तार अंसारी के गैंग में शामिल हो गया। मुख्तार अंसारी ने अपराध की दुनिया से राजनीति में कदम रखा और 1996 में समाजवादी पार्टी के टिकट पर मऊ से विधायक निर्वाचित हुए। इसके बाद इस गैंग की ताकत बहुत बढ़ गई। मुन्ना सीधे पर सरकारी ठेकों को प्रभावित करने लगा था। वह लगातार मुख्तार अंसारी के निर्देशन में काम कर रहा था।
पूर्वांचल में सरकारी ठेकों और वसूली के कारोबार पर मुख्तार अंसारी का कब्जा था, लेकिन इसी दौरान तेजी से उभरते बीजेपी के विधायक कृष्णानंद राय उनके लिए चुनौती बनने लगे। उन पर मुख्तार के दुश्मन ब्रिजेश सिंह का हाथ था। उसी के संरक्षण में कृष्णानंद राय का गैंग फ ल-फू ल रहा था। इसी वजह से दोनों गैंग अपनी ताकत बढ़ा रहे थे। इनके संबंध अंडरवल्र्ड के साथ भी जुड़े गए थे।

कृष्णानंद राय का बढ़ता प्रभाव मुख्तार को रास नहीं आ रहा था इसलिए उन्होंने राय को खत्म करने की जिम्मेदारी मुन्ना बजरंगी को सौंप दी। मुख्तार से फ रमान मिल जाने के बाद मुन्ना बजरंगी ने भाजपा विधायक कृष्णानंद राय को खत्म करने की साजिश रची। और उसी के चलते 29 नवंबर 2005 को माफि या डॉन मुख्तार अंसारी के कहने पर मुन्ना बजरंगी ने कृष्णानंद राय को दिन दहाड़े मौत की नींद सुला दिया। उसने अपने साथियों के साथ मिलकर लखनऊ हाइवे पर कृष्णानंद राय की दो गाडिय़ों पर ए के 47 से 400 गोलियां बरसाई थी। इस हमले में गाजीपुर से विधायक कृष्णानंद राय के अलावा उनके साथ चल रहे 6 अन्य लोग भी मारे गए थे। इस हत्याकांड ने सूबे के सियासी हलकों में हलचल मचा दी। हर कोई मुन्ना बजरंगी के नाम से खौफ खाने लगा। इस हत्या को अंजाम देने के बाद वह मोस्ट वॉन्टेड बन गया था। और आज बुलेट से खेलने वाले मुन्ना को उसी बुलेट ने मौत के आगोश में ले लिया।

You May Also Like

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *