VIDEO:मेरी मौत के जिम्मेदार लखनऊ के कमांडेंट कृपाशंकर पाण्डेय होंगे : सुषमा अवस्थी

मेरी मौत के जिम्मेदार लखनऊ के कमांडेंट कृपाशंकर पाण्डेय होंगे : सुषमा अवस्थी

कई बीमारियों से जूझ रही सुषमा अवस्थी को स्टोर इंचार्ज बनाने पर आमादा

योगी राज में सरकारी विभाग में हो रहा है महिला उत्पीडऩ

प्रमोटी कमांडेंट कृपाशंकर पर होमगार्ड मंत्री अनिल राजभर, डीजी सूर्य शुक्ला की है ‘कृपा’

मंत्री को पहुंचाता है 2 लाख रुपए ,डीजी का उठाता है खर्च, इसीलिए सबने साध रखी है चुप्पी

वसूली नंबर वन बनने के बाद महिला उत्पीडऩ करने पर आमादा कृपाशंकर

मंत्री नहीं अब मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ तक पहुंचाएंगे अपनी फरियाद

संजय पुरबिया
लखनऊ।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी हों या फिर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ,सभी महिला सशक्तिकरण एवं महिलाओं की सम्मान की नसीहत देते हैं लेकिन कुछ अफसरों पर इसका असर नहीं दिख रहा। योगी राज में महिला उत्पीडऩ की घटनाएं भी हो रही हैं और अफसर सरकारी विभाग को अपना विभाग बताकर महिलाओं को भाग जाने की धौंस भी देते हैं। होमगार्ड विभाग में प्रमोटी जिला कमांडेंट कृपाशंकर पाण्डेय ने आतंक मचा रखा है। होमगार्डों से ड्यूटी के नाम पर वसूली का रिकार्ड तोडऩे के बाद अब वो महिला उत्पीडऩ भी करने लगे हैं। विभाग में काम करने वाली महिलाओं से अभद्रता पूर्वक बात करने एवं खुद को मुखिया बताने का धौंस दे रहे हैं। लखनऊ में होमगार्ड विभाग के डीटीसी में तैनात कनिष्ठ लिपिक सुषमा अवस्थी (कई बीमारियों से जूझ रही हैं) , को कमांडेंट कृपाशंकर पाण्डेय ने स्टोर का चार्ज लेने का निर्देश दिया। स्टोर में जवानों के असलहे, कारतूस, वर्दी, कम्बल, डंडा, टोपी, दरी आदि रहते हैं। शासनादेश के मुताबिक स्टोर इंचार्ज की जिम्मेदारी जनपदीय इकाइयों एवं मंडलीय प्रशिक्षण केन्द्रों पर स्टोर का प्रभार संबंधित इकाइयों के लिपिक संवर्ग अंतर्गत स्वीकृत स्टोर कीपर को सौंपा जाता है ना कि कनिष्ठ सहायक को।   प्रमोटी कमांडेंट कृपाशंकर पाण्डेय ने मौखिक आदेश जारी कर सुषमा अवस्थी पर स्टोर का चार्ज लेने का दबाव बनाना शुरू कर दिया। डीटीसी पर तैनात इंस्पेक्टर ने कार्यालय के रजिस्टर पर सुषमा अवस्थी को हस्ताक्षर करने से भी मना कर दिया है। उसका कहना है कि कमांडेंट का आदेश है। कमांडेंट से मिलने जिला कार्यालय सुषमा अवस्थी गई तो उनका जवाब था कि स्टोर का चार्ज लेने के लिए कहा है तो वही काम करो। मैं एक बार जो आदेश देता हूं उसे बदलता नहीं, ये मेरा विभाग है,जो मैं चाहूंगा वही होगा…। सुषमा रोई, गिड़गिड़ाई लेकिन दंभी प्रमोटी कमांडेंट पर इसका असर नहीं पड़ा जिसकी वजह से सुषमा डिपे्रेशन में चली गईं है।


सुषमा अवस्थी ने द संडे व्यूज़,इंडिया एक्सप्रेस व्यूज़ के ब्यूरो चीफ संजय पुरबिया से कहा कि मैं सुसाइट कर लूंगी। कमांडेंट कृपाशंकर ने जिस तरह से मानसिक, शारीरिक उत्पीडऩ किया है, उससे मैं डिप्रेशन में चली गई हूं। मेरे पति नहीं है, एक बेटा है। मैं सुसाइट करती हूं तो इसके लिए पूरी तरह से जिम्मेदारी लखनऊ के कमांडेंट कृपाशंकर पाण्डेय होंगे। सुषमा अवस्थी ने यह भी शंका जाहिर की कि स्टोर का इंचार्ज मुझे बनाने पर वे इतने बेचैन क्यों हैं? हो सकता है कि स्टोर में बड़ा घपला किया गया हो,कल को यदि कोई बात होती है तो वो मुझे फंसा दें? सुषमा के इस बयान का मेरे पास वीडियो है।

सवाल यह है कि आखिर एक प्रमोटी कमांडेंट इतना बददिमाग कैसे हो सकता है? आखिर वो क्यों उस महिला का स्टोर इंचार्ज बनाने पर आमादा है जिसका हाल ही में आप्रेशन हुआ हो और जिसके फेफड़े से साढे चार लीटर पानी निकाला गया हो,जो हार्निया, ब्लड प्रेशर की मरीज है ? चौंकाने वाली बात यह भी है कि डीजी सूर्य प्रकाश शुक्ला ने कमांडेंट से बात की उसके बाद भी वो अपनी बात पर अड़ा रहा। बल्कि उसके बाद उसने सुषमा को कहा कि मंत्री और डीजी के पास जा रही हो, होगा वही जो मैं चाहूंगा…। वे लोग मेरा कुछ नहीं बिगाड़ सकते…। कमांडेंट के दावों में दम है क्योंकि जब मंत्री और डीजी उससे अपनी ख्वाहिशों को पूरा कराएंगे तो मेमना शेर की तरह दहाड़ेगा ही…

उत्तर प्रदेश की योगी सरकार में अब क्या बचा है। मंत्री और अफसरों की जुबां से भले ही ईमानदारी,महिलाओं का सम्मान,भ्रष्टïाचारियों को नहीं बख्शेंगे जैसे कीमती वचन निकल रहे हों लेकिन हकीकत इसके ठीक उलट है। यानि, बेईमानी करो, महिलाओं का उत्पीडऩ करो, भ्रष्टïाचारियों को पूरा संरक्षण दो। उक्त बातों को आदर्श की तरह मान रहे हैं होमगार्ड विभाग के कमांडेंट कृपाशंकर पाण्डेय। उन्होंने मंडलीय प्रशिक्षण केन्द्र (डीटीसी) ,कृष्णानगर,लखनऊ में तैनात कनिष्ठ सहायक सुषमाअवस्थी पर स्टोर का इंचार्ज बनाने का इस कदर दबाव बना रखा है कि वो डिप्रेशन में चली गई हैं। 21 जून को कमांडेंट कृपाशंकर पाण्डेय ने मौखिक रूप से समस्त स्टोर का चार्ज लेने की बात कही। इससे पूर्व 6 जुलाई को स्टोर का चार्ज उर्दू अनुवादक कु. शहनाज को दिया गया था। किसी की पैरवी लगी तो कु.शहनाज को वहां से हटा दिया गया। शहनाज उर्दू अनुवादक है और सुषमा अवस्थी कनिष्ठï सहायक है। मौजूदा समय अधिकांश जनपदों में लिपिक संवर्ग में शायद ही कहीं पर स्टोर इंचार्ज कीपर का पद स्वीकृत है और न ही स्टोर कीपर की नियुक्ति है।

व्यवहारिक बात करें तो मंडलीय प्रशिक्षण केन्द्रों पर जवानों को प्रशिक्षण देने का काम होता है। इस दौरान जवान यहीं पर ठहरते हैं। 24 घंटे प्रशिक्षण चलता है इस दौरान कभी भी,किसी भी समय स्टोर इंचार्ज से कंबल,दरी,वर्दी, असलहे आदि मांगे जा सकते हैं। यदि स्टोर का इंचार्ज महिला को सौंपा जाएगा तो उसे रात्रि में भी ठहरना पड़ेगा जो संभव नहीं है। कमांडेंट ने जिस तरह से एक महिला कर्मचारी को मानसिक,शारीरिक उत्पीडऩ किया,वो अपराध की श्रेणी में आता है। खैर,लखनऊ के प्रमोटी कमांडेंट कृपाशंकर पाण्डेय ने तुगलकी मौखिक फरमान तो जारी कर दिया लेकिन वे उस महिला को स्टोर इंचार्ज बनाने पर क्यों अड़े हैं जो बीमार है? क्या स्टोर में भी असलहा या अन्य सामानों में भी तो कमांडेंट खेल तो नहीं कर दिए हैं? ये सवाल इसलिए वाजिब है क्योंकि इन्होंने लखनऊ तैनाती के बाद से पूरी परिपाटी को ही बदल दिया है। लखनऊ में शहरी एवं ग्रामीण इलाकों में तैनात जवानों से ड्यूटी के नाम पर प्रतिमाह 15 से 20 लाख रुपए महीने की वसूली करा रहे हैं।

जवानों से बातचीत के बाद द संडे व्यूज़ ने खुलासा किया था कि कमांडेंट कृपाशंकर पाण्डेय वसूली की रकम में से हर माह दो लाख रुपए मंत्री अनिल राजभर को लखनऊ से लेकर बनारस तक का खर्च उठाता है। डीजी सूर्य कुमार शुक्ला के मौखिक जरूरतों को पूरा करता रहता है। यही वजह है कि जब सुषमा अवस्थी अपनी फरियाद लेकर डीजी सूर्य शुक्ला के पास गई तो उन्होंने मौके पर ही कमांडेंट से बात की लेकिन उल्टे वो और अधिक प्रताडि़त करने लगे हैं। सुषमा अवस्थी को इस बात का अहसास हो गया है कि उसके विभाग में भ्रष्टïाचार इस कदर बीमारी का विक्राल रूप धारण कर चुका है कि उसे इंसाफ नहीं मिलने वाला। इसीलिए उन्होंने कहा कि यदि मेरी मौत होती है तो इसके लिए जिम्मेदारी कमांडेंट कृपाशंकर पाण्डेय होंगे…

 

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